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आरामबाग

उलबेड़ि‍या मूल रूप से औद्योगिक इलाका है। हालांकि यहां की एक बड़ी आबादी आजीविका के लिए खेती-बारी पर निर्भर है। 2006 में इंडोनेशिया के सलेम ग्रुप ने यहां मोटरसाइकिल फैक्ट्री लगाने के लिए 250 मिलियन डॉलर के निवेश का प्रस्ताव रखा था, हालांकि यह परियोजना मूर्त रूप नहीं ले पाई थी। रेल यातायात के लिए उलबेड़ि‍या रेलवे स्टेशन सुगम है। बात अगर राजनीतिक गतिविधियों की करें तो इस सीट पर वामो का एकछत्र राज रहा है। 1952 से 2009 के बीच वामो का यहां छह दशकों तक राज रहा है। माकपा के हन्नान मोल्ला लगातार चार दशकों तक यहां से सांसद चुने गए। 2004 में तृणमूल प्रत्याशी सुलतान अहमद ने माकपा के मन्नान की जीत की दौड़ को रोका था। इस जीत के साथ पहली बार यहां तृणमूल का खाता खुला। इसके बाद लगातार तीसरी बार तृणमूल का यहां कब्जा बरकरार है। दिवंगत सुलतान अहम की पत्नी वर्तमान में यहां से तृणमूल सांसद हैं।
 

विधानसभा सीटें, डेमोग्राफी और विकास

इस संसदीय क्षेत्र के तहत कुल सात विधानसभा सीटें हैं। 2006 में इस क्षेत्र का परिसीमन कर उलबेडिय़ा पूर्व, उलबेड़ि‍या उत्तर, उलबेड़ि‍या दक्षिण, श्यामपुर, बागनान, आमता और उदयनाराणपुर विधानसभा क्षेत्रों को इसके तहत लाया गया। वर्तमान में यहां से तृणमूल की सजदा अहमद सांसद हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार इलाके में कुल मतदाता 14,48,632 हैं। इनमें महिलाएं 47.4 फीसद, और पुरुष 52.6 फीसद हैं। शिक्षा दर 80.03 फीसद है। लिंग का अनुपात 1000 पुरुषों पर 901 महिलाएं हैं।

 

स्थानीय मुद्दे

उलबेड़ि‍या संसदीय क्षेत्र बीते कुछ वर्षों से राजनीतिक अखाड़ा बना हुआ है। इलाके में भाजपा के बढ़ते प्रभाव को लेकर आए दिन यहां राजनीतिक हमले की घटनाएं होती रहती हैं। तृणमूल और भाजपा के बीच प्राय: रार की स्थिति बनी रहती है। औद्योगिक इकाइयों के बंद होने से इलाके में रोजगार की समस्या भी उभरी है। यहां के ज्यादातर युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं। इस सीट के दक्षिण हिस्से से गंगा नदी बहती है। नदी का कटान व निकासी यहां की मौलिक समस्याओं में शुमार हैं।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता766,658
  • पुरुष मतदाता833,629
  • कुल मतदाता1,600,293

लोकसभा चुनाव

    अपरूपा पोद्दार

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि8 जनवरी 1986
    • जेंडरF
    • शिक्षापोस्ट ग्रेजुएट
    • संपत्ति32 लाख

    पूर्व सांसद

    • शक्ति मोहन मलिक

      सीपीआई-एम2009

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम2004

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम1999

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम1998

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम1996

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम1991

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम1989

    • अनिल बसु

      सीपीआई-एम1984

    • बिजॉय कृष्ण मोदक

      सीपीआई-एम1980

    • प्रफुल्ल चंद्र सेन

      बीएलडी1977

    • मनोरंजन हाजरा

      सीपीआई-एम1971

    • ए बोस

      एफबीएल1967

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    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

      अन्य बयान
    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

      अन्य बयान
    • साक्षी महाराज(भाजपा)

      मैं एक संत हूं और वोट मांगने आए हूं। एक वोट का दान कई कन्यादान के बराबर होता है। संन्यासी लोगों का भला करते हैं। मैं आपसे घर, खेती या अन्य चीज दान में नहीं मांग रहा, सिर्फ आपका वोट मांग रहा हूं। संत की मांग जो पूरी नहीं करता वह उसके किए गए पुण्य ले जाता है।

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    • राजनाथ सिंह(भाजपा)

      अगर हमारी सरकार सत्ता में दोबारा आती है, तो हम देशद्रोह कानून को और ज्यादा सख्त करेंगे। अगर जम्मू-कश्मीर के लिए अलग पीएम की मांग की जाती रही तो हमारे पास अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

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    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      लोकसभा 2019 का चुनाव देश की दो विचारधाराओं की लड़ाई है। कांग्रेस कहती है कि देश की सभी विचारधारा, अवसर, भाषा, इतिहास, संस्कृति सब हंसी-खुशी से साथ रहें। सबको अपनी बात रखने का हक है। लेकिन संघ और बीजेपी चाहती है कि देश में एक ही विचारधारा का राज कायम रहे।

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