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बारासात

बारासात लोकसभा सीट पर 2009 से ही तृणमूल का कब्जा है। इसके अलावा 1998 व 199 में भी तृणमूल को जीत मिली थी, लेकिन 2004 में वाममोर्चा समर्थित फाब्ला प्रत्याशी को जीत मिली थी। कोलकाता से सटी हुई यह सीट अपने ऐतिहासिक और भौगोलिक स्थिति के कारण भी प्रसिद्ध है। संसदीय राजनीति में यह सीट ज्यादातर समय वामपंथी दलों के पास रही है, जहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और फारवर्ड ब्लॉक के प्रतिनिधि संसद पहुंचते रहे हैं। बारासात लोकसभा सीट पर लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस के बीच आमतौर पर मुकाबला रहा है. लेकिन पिछले दो आम चुनावों से इस सीट पर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है।

ब्रिटिश शासन के सयम ईस्ट इंडिया कंपनी के कलकत्ता में रहने वाले अंग्रेज अधिकारियों के लिए बारासात एक तरह से वीकेंड में छुट्टी मनाने की जगह हुआ करता था। यहां पर अंग्रेजों ने सुंदर सुंदर गार्डेन और इमारतें बनवाईं। वारेन हेस्टिंग ने बारासात शहर के बीच में अपना महल बनवाया। बंकीम चंद्र चटर्जी इस शहर के पहले भारतीय डिप्टी मजिस्ट्रेट हुए।  यहां की आबादी शहरी है। लोग सांस्कृतिक तौर पर संगीत और कला से जुड़े हुए हैं और सभी धर्मों की इमारतें यहां देखी जा सकती हैं। जनगणना 2011 के मुताबिक बरसात की कुल आबादी 278,235 है, जिनमें 140,882 (51 %) पुरुष और 137,613 (49 %) महिलाएं हैं।  इसमें 22,605 उनकी आबादी है जिनकी उम्र 6 साल से कम बताई गई थी। बारासात संसदीय क्षेत्र की साक्षरता दर 89.69 फीसद है। बारासात में 4.77% आबादी गांवों में रहती है जबकि  65.23% लोग शहरों में रहते हैं। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का अनुपात क्रमशः 18.8 और 1.45 फीसदी है। मतदाता सूची 2017 के अनुसार बरसात संसदीय क्षेत्र में 1638780 मतदाता है जो 1835 बूथों पर वोटिंग करते हैं।  2014 के चुनावों में यहां  83.96% वोटिंग हुई थी जबकि 2009 में यह आंकड़ा 83.6% था।  बारासात संसदीय क्षेत्र के तहत सात विधानसभा सीट है।  इनमें हाबरा, अशोक नगर, राजरहाट न्यू टॉउन, बिधाननगर, मध्यमग्राम, बारासात और देगंगा शामिल हैं।  इन सात विधानसभा सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है।

 

सांसद का रिपोर्ट कार्ड 

सियासी मुद्दों को लेकर मुखर रहने वालीं काकोली घोष संसद में 60 फीसदी उपस्थित रहीं और 17 डिबेट में हिस्सेदारी की। 14 फरवरी 2019 तक के आंकड़े बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने सदन की कार्यवाही में 10 सवाल पूछे। हालांकि वह कोई प्राइवेट मेंबर बिल नहीं लाईं। बारासात संसदीय क्षेत्र के लिए संसदीय निधि के तहत 25 करोड़ रुपये निर्धारित हैं। इसमें से विकास संबंधी कार्यों के लिए पूरे पैसे मंजूर कर दिये गए जिनमें से 94.43 फीसद राशि खर्च की जा चुकी है।

 

स्थानीय मुद्दे

कानून व्यवस्था,  सरकारी स्कूलों की खास्ताहाली। सिंडीकेट राज, डेंगू मलेरिया आदि मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम में ढिली पकड़ प्रमुख मुद्दे हैं।

 

बारासात की खास बातें

बारासात लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में से एक है। इस संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। यह क्षेत्र उत्तरी 24 परगना जिले का हिस्सा है। 1600 में जेसोर के राजा शंकर चक्रवर्ती बारासात आए और यहीं पर अपनी राजधानी बनाई। उस समय के कई स्मारक आज भी मौजूद हैं। कोलकाता शहर से करीब होने और बागानों से घिरे होने की वजह से यहां अंग्रेज अफसर और बंगाल के पहले गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स ने विला बनवाया। इस क्षेत्र में हज़रत एकदिल शाह का मकबरा मुस्लिम समुदाय के लिए एक तीर्थ स्थल है। यहां बड़ी संख्या में जायरीन आते हैं।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता738,463
  • पुरुष मतदाता774,305
  • कुल मतदाता1,512,792

घोषित उम्मीदवार लोकसभा 2019

लोकसभा चुनाव

    दस्तीदार काकोली घोष

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि23 नवंबर 1959
    • जेंडरF
    • शिक्षाएमबीबीएस
    • संपत्ति3.12 करोड़

    पूर्व सांसद

    • डॉ काकोली

      तृणमूल कांग्रेस2019

    • ककाली घोष दस्तीदार

      तृणमूल कांग्रेस2009

    • सुब्रत बोस

      एआईएफबी2004

    • डॉ रंजीत कुमार पांजा

      तृणमूल कांग्रेस1999

    • डॉ रंजीत कुमार पांजा

      डब्लूबीटीसी1998

    • चित्ता बसु

      एफबीएल1996

    • चित्ता बसु

      सीपीआई1991

    • चित्ता बसु

      एफबीएल1989

    • तरुण कांति घोष

      कांग्रेस1984

    • चित्ता बसु

      एफबीएल1980

    • चित्ता बसु

      एफबीएल1977

    • रनेन्द्र नाथ सेन

      सीपीआई1971

    • आर एन सेन

      सीपीआई1967

    • अरुण चंद्र गुहा

      कांग्रेस1962

    • अरुण चंद्र गुहा

      कांग्रेस1957

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    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • अरुण जेटली(भाजपा)

      प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

      अन्य बयान
    • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

      मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

      अन्य बयान
    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

      अन्य बयान
    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

      अन्य बयान
    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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