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बैरकपुर

कोलकाता के उपनगरीय इलाकों में शुमार बैरकपुर संसदीय क्षेत्र उत्तर 24 परगना जिले में हुगली नदी के तट पर बसा है। बैरकपुर की पहचान राज्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के तौर पर है। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी का जन्म इसी संसदीय क्षेत्र के नैहाटी में हुआ था। स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे ने सन् 1857 में प्रथम स्वाधीनता संग्राम का बिगुल इसी बैरकपुर की जमीन से फूंका था। कहा जाता है कि यहां आजादी के पहले सैनिकों की छावनी हुआ करती थी, जिस कारण इसका नाम बैरकपुर पड़ा। आज भी यहां सेना का कैंप है। जिले के इच्छापुर में राइफल फैक्ट्री है। क्षेत्र की पहचान जूट मिलों के लिए है। लोकसभा क्षेत्र के तौर पर 1952 में अस्तित्व में आए बैरकपुर में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहा है। हालांकि ज्यादातर समय यहां से माकपा के सदस्य चुने जाते रहे हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यहां से सांसद भी तृणमूल कांग्रेस का ही बना। दिनेश त्रिवेदी 2009 और इसके बाद 2014 में दूसरी बार सांसद चुने गए। त्रिवेदी केंद्र में रेल मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि सांसद पर इलाके से नदारद रहने का आरोप लगता रहा है।


सातों विधानसभा सीटों पर तृणमूल का वर्चस्व

इस संसदीय क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें हैं, जिनमें आमडांगा, बीजपुर, नैहाटी, भाटपाड़ा, जगदल, नोआपाड़ा और बैरकपुर शामिल हैं। बैरकपुर से लेकर नदिया जिले से सटे बीजपुर विधानसभा सीट तक सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व है।

 

डेमोग्राफी

जिले में अधिकतर लोग कामकाजी हैं। यहां तकरीबन 35 फीसद आबादी हिंदीभाषी लोगों की है, जो यूपी-बिहार से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा ओडि़शा और दक्षिण भारत के कुछ लोग भी यहां कामकाज के सिलसिले में बसे हुए हैं। क्षेत्र में कुछ जगहों पर अल्पसंख्यक वोट बैंक मायने रखता है। यहां की आबादी का करीब 40 फीसद हिस्सा शहरी क्षेत्रों में निवास करता है, जबकि बाकि लोग ग्रामीण इलाकों में खेती और कुटीर उद्योग से जुड़े हुए हैं। क्षेत्र में पिछले पांच साल में तृणमूल-माकपा कार्यकर्ताओं के बीच खूनी संघर्ष सुर्खियों में रहा है। बीते साल नोआपाड़ा में हुए विधानसभा उपचुनाव में जमकर हिंसा देखने को मिली थी। बीजपुर विधानसभा सीट के तहत पडऩे वाले हाजीनगर में दो साल पहले दुर्गापुजा और मोहर्रम एक साथ पडऩे के दौरान सांप्रदायिक तनाव भड़क उठा था।


विकास का हाल

बैरकपुर संसदीय क्षेत्र के विकास के लिए सांसद निधि के तहत 25 करोड़ रुपये आवंटित हैं। इसमें 22.47 करोड़ रुपये को मंजूर किया गया है, जिसमें 87.87 फीसद रकम खर्च करने का दावा किया जाता है। वैसे बुनियादी ढांचे को लेकर किया गया खर्च जमीनी स्तर पर दिखता भी है।


स्थानीय मुद्दे

यहां कमोबेश समस्याएं जूट मिलों से संबंधित ही हैं। चुनावों में नेता बंद पड़ी जूट मिलों को खुलवाने का दावा तो करते रहे हैं लेकिन धरातल पर इसके परिणाम नहीं दिखते। क्षेत्र में आबादी घनी है, लेकिन रोजगार इस अनुपात में कम है। सत्तारूढ़ तृणमूल के लिए विकास चुनावी मुद्दा है तो विपक्ष बेरोजगारी, राजनीतिक संघर्ष, बंद कारखानों को खुलवाने, अवैध बालू खनन और सिंडीकेट को मुद्दा बना सकता है।

 

बैरकपुर की खास बातें

बैरकपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 14 संसदीय क्षेत्रों में से एक है। इस लोकसभा क्षेत्र में अमदांगा, बीजपुर, भाटपारा समेत सात विधानसभा क्षेत्रों को समाहित किया गया है। हुगली नदी के किनारे बसा यह क्षेत्र उत्तर 24 परगना जिले का हिस्सा है। सेना की छावनियां यहां होने के कारण इसका नाम बैरकपुर पड़ा। प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत यहीं से मंगल पांडे ने की थी। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी का बिगुल बजाने वाले मंगल पांडे की याद में यहां उनका स्मारक और प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां पर बड़ी संख्या में देशभक्त आते हैं और वीर मंगल पांडे को श्रद़धासुमन अर्पित करते हैं।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता604,844
  • पुरुष मतदाता682,366
  • कुल मतदाता1,287,222

घोषित उम्मीदवार लोकसभा 2019

लोकसभा चुनाव

    दिनेश त्रिवेदी

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि4 जून 1950
    • जेंडरM
    • शिक्षापोस्ट ग्रेजुएट
    • संपत्ति5.35 करोड़

    पूर्व सांसद

    • श्री अर्जुन सिंह

      बीजेपी2019

    • दिनेश त्रिवेदी

      तृणमूल कांग्रेस2009

    • तरित बरन तोपदार

      सीपीआई-एम2004

    • तरित बरन तोपदार

      सीपीआई-एम1999

    • तरित बरन टोपदार

      सीपीआई-एम1998

    • तरित बरन टोपदार

      सीपीआई-एम1996

    • तरित बर्बन तोपदार

      सीपीआई-एम1991

    • तरित बरन तोपदार

      सीपीआई-एम1989

    • देबी घोषाल

      कांग्रेस1984

    • मोहम्मद इस्माइल

      सीपीआई-एम1980

    • सौगुप्‍ता रॉय

      कांग्रेस1977

    • एमडी इस्माइल

      सीपीआई-एम1971

    • एम इस्माइल

      सीपीआई-एम1967

    • रेणू चकवर्ती

      सीपीआई1962

    • बिमल कुमार घोष

      पीएसपी1957

    • रामानंद दास

      कांग्रेस1952

    वीडियो

    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • अरुण जेटली(भाजपा)

      प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

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    • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

      मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

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    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

      अन्य बयान
    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

      अन्य बयान
    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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