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तामलुक

पूर्व मेदिनीपुर जिले का मुख्यालय तमलुक संसदीय क्षेत्र के तौर पर शिक्षा का गढ़ माना जाता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में भी तमलुक का नाम ताम्रलिप्त के तौर पर श्रद्धा से लिया जाता था। मुख्य रूप से कृषि व मत्स्य पालन पर यह क्षेत्र निर्भर है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह काफी जागरूक क्षेत्र रहा है। 2009 से पहले तक यह सीट माकपा का अभेद्य दुर्ग माना जाता रहा, लेकिन 2009 में हुए संसदीय चुनाव में इस सीट से तृणमूल के शुभेंदु अधिकारी निर्वाचित हुए और फिर माकपा का अभूतपूर्व पराभव शुरू हो गया। 2014 में हुए पिछले चुनाव में भी इस सीट से शुभेंदु जीते, लेकिन 2016 में राज्य विधानसभा चुनाव के बाद शुभेंदु अधिकारी संसदीय राजनीति से दूर हो गए और नंदीग्राम से विधायक चुने गए। लिहाजा 2016 में इस सीट के लिए उपचुनाव हुआ, जिसमें शुभेंदु के छोटे भाई दिव्येंदु अधिकारी उम्मीदवार बने और जीते भी। कुल 7,96,779 पुरुष व 7,30,494 महिला मतदाताओं वाले इस संसदीय क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में व्यापक परिवर्तन हुआ है, हालांकि 2007 में हुआ नंदीग्राम का भूमि आंदोलन आज भी यहां बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता रहा है।


विधानसभा क्षेत्र और स्‍थानीय मुद्दे

तमलुक संसदीय क्षेत्र में हल्दिया, महिषादल, तमलुक, मयना, नंदकुमार, पांशकुड़ा पूर्व और नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इनमें फिलहाल हल्दिया माकपा और तमलुक विधानसभा क्षेत्र भाकपा के कब्जे में हैं जबकि अन्य सीटों पर तृणमूल का ही कब्जा है। तृणमूल 2011 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद किए गए विकास कार्यों के जरिए जनता के बीच जाने की तैयारी में है, वहीं भाजपा व वामपंथी दल समेत तमाम विरोधी विकास कार्यों में कथित पक्षपात तथा पुलिस व तृणमूल के आतंक को मुद्दा बना चुकी है।
 

तमलुक की खास बातें

तमलुक, पश्चिम बंगाल का लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र है। यह बंगाल की खाड़ी से सटे हुए रूपनारायण नदी के किनारे स्थित है। रूपनारायण नदी के दाहिने तट पर बसे तामलुक का ताम्रलिप्‍ता, दामलिटता, ताम्रलिप्ति, ताम्रलित्‍तिका या वेलकुला जैसे नामों से भी जाना जाता है। प्राचीन समय में यह एक महत्‍वपूर्ण बंदरगाह के रूप में कार्य करता था, जहां से भारतीय समुद्रगामी जहाज़ दूर देशों में जाया करते थे। बरगाभीमा मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, ब्रह्मो समाज, जोरा मस्जिद यहां के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। दिल्ली से इस की दूरी 1,552.5 किलोमीटर है।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता730,482
  • पुरुष मतदाता796,779
  • कुल मतदाता1,527,273

घोषित उम्मीदवार लोकसभा 2019

लोकसभा चुनाव

    सुवेन्दु अधिकारी

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि15 दिसम्बर 1970
    • जेंडरM
    • शिक्षापोस्ट ग्रेजुएट
    • संपत्ति64 लाख

    पूर्व सांसद

    • दिब्येंद्रु अधिकारी

      तृणमूल कांग्रेस2019

    • अधिकारी सुवेंदु

      तृणमूल कांग्रेस2009

    • सेठ लक्ष्मण चंद्र

      सीपीआई-एम2004

    • लक्ष्मण चंद्र सेठ

      सीपीआई-एम1999

    • लक्ष्मण चंद्र सेठ

      सीपीआई-एम1998

    • जयंत भट्टाचार्या

      कांग्रेस1996

    • सत्यगोपाल मिश्रा

      सीपीआई-एम1991

    • सत्यगोपाल मिश्रा

      सीपीआई-एम1989

    • सत्यगोपाल मिश्रा

      सीपीआई-एम1984

    • मिश्रा सत्यगोपाल

      सीपीआई-एम1980

    • सुशील कुमार धरा

      बीएलडी1977

    • सतीश चंद्र सामंत

      बीएसी1971

    • एस सी सामंता

      बीएसी1967

    • सतीश चंद्र सामंत

      कांग्रेस1962

    • सतीश चंद्र समंता

      कांग्रेस1957

    • सतीश चंद्र समंत

      कांग्रेस1952

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    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • अरुण जेटली(भाजपा)

      प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

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    • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

      मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

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    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

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    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

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    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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