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बनगाँव

उत्तर 24 परगना जिले की बनगांव लोकसभा सीट 2009 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह क्षेत्र बारासात संसदीय क्षेत्र के तहत आता था, लेकिन परिसीमन 2009 की रिपोर्ट में बनगांव को अलग से लोकसभा क्षेत्र घोषित किया गया।  इस संसदीय क्षेत्र का कुछ हिस्सा नादिया जिले में भी आता है।

सात विधानसभा सीट

इस संसदीय सीट के अस्तित्व में आने के बाद से यहां तृणमूल का ही बर्चस्व रहा है। इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें हैं जिनमें कल्याणी, हरिनघाटा, बाग्दा, बनगांव उत्तर, बनगांव दक्षिण , गोघाट और स्वरूपनगर शामिल हैं।  2014 के लोकसभा चुनावों में चुने गए सांसद कपिल कृष्ण ठाकुर के निधन के बाद 2015 में इस सीट पर उपचुनाव हुए जिसमें तृणमूल कांग्रेस की ही उम्मीदवार ममता ठाकुर जीतने में कामयाब रहीं।


डेमोग्राफी

अभी तक यहां तीन ही लोकसभा चुनाव देखने को मिले हैं। सभी सात विधानसभा सीटें अनुसूचित जातियों के लिए सुरक्षित हैं। अनुसूचित जनजाति की हिस्सेदारी क्रमश: 42.56 और 2.8 फीसदी है। बांग्लादेश से सटे होने के कारण इस संसदीय क्षेत्र में दोनों देशों की सांस्कृतिक झलक देखने को मिलती है। यहां की आबादी कृषि पर सर्वाधिक निर्भर है। जातिगत आधार पर कुछ जगहों पर अल्पसंख्यक समुदाय का वर्चस्व है। सीट के लिए मतुआ समुदाय की भूमिका काफी अहम है। बनगांव लोकसभा क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा मतुआ समुदाय के लोग हैं। यह समुदाय 1947 में देश विभाजन के बाद शरणार्थी के तौर पर यहां आया था। बंगाल में इनकी आबादी लगभग तीस लाख है और उत्तर व दक्षिण 24-परगना जिलों की कम से कम पांच सीटों पर ये निर्णायक स्थिति में हैं। मतुआ समुदाय मुख्य रूप से बांग्लादेश से आए छोटी जाति के हिंदू शरणार्थी हैं और इन्हें लगभग 70 लाख की जनसंख्या के साथ बंगाल का दूसरा सबसे प्रभावशाली अनुसूचित जनजाति समुदाय माना जाता है। यही वजह है कि सभी दल इनको लुभाने की जुगत में हैं। पीएम मोदी ने हाल ही में मतुआ संप्रदाय की बयोवृद्ध बड़ो मां से मुलाकात की थी तो तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी भी उनके सेहत का हाल जानने पहुंची थी।  

विकास का हाल

इस संसदीय सीट ने तीन बार चुनाव देखा है। बनगांव लोकसभा सीट के पहले सांसद तृणमूल कांग्रेस के गोविंद चंद्र नास्कर बने थे। क्षेत्र में कृषि आधारित विकास कार्यों पर अधिक फोकस करने का दावा किया जाता है।

स्थानीय मुद्दे

यह वह इलाका है जिस पर भारतीय जनता पार्टी की निगाह बनी हुई है। सभी राजनीतिक दलों की नजर मतुआ समुदाय पर है। पेट्रापोल बोर्डर बांग्लादेश से सटा हुआ है। यद्यपि अब सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त है लेकिन गो तस्करी यहां के लिए बड़ा मुद्दा है। रोजगार के अभाव में लोगों का शहरों की ओर पलायन भी प्रमुख मुद्दा है। बनगांव लोकसभा क्षेत्र के लिए संसदीय निधि के तहत 22.50 करोड़ रुपये निर्धारित है. इस फंड से ममता ठाकुर ने विकास संबंधी कार्यों के लिए 103.64 फीसदी निधि खर्च किए हैं।


बनगांव की खास बातें

बनगांव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में से एक है। यह संसदीय क्षेत्र 1952 में देश के लिए हुए पहले लोकसभा चुनावों में अस्तित्व में नहीं था। भारत के परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद 2008 में इसे संसदीय क्षेत्र बनाया गया। 2009 में यहां पहली बार लोकसभा निर्वाचन के लिए मतदान हुआ। यह क्षेत्र पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिले का हिस्सा है। नगर पालिका होने के साथ ही यह क्षेत्र बंगाल उपखंड का मुख्यालय भी है। इस क्षेत्र के प्रमुख शैक्षिक संस्थानों में पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय, दीनबंधु महाविद्यालय प्रमुख हैं।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता744,053
  • पुरुष मतदाता796,650
  • कुल मतदाता1,540,713

घोषित उम्मीदवार लोकसभा 2019

लोकसभा चुनाव

    कपिल कृष्ण ठाकुर

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि13 जून 1940 निधन 13 अक्टूबर 2014
    • जेंडरM
    • शिक्षाग्रेजुएट
    • संपत्ति96 लाख

    पूर्व सांसद

    • शांतनु ठाकुर

      बीजेपी2019

    • गोविन्द्र चंद्र नस्कर

      तृणमूल कांग्रेस2009

    वीडियो

    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • अरुण जेटली(भाजपा)

      प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

      अन्य बयान
    • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

      मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

      अन्य बयान
    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

      अन्य बयान
    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

      अन्य बयान
    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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