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गढ़वाल

वीरों की धरती है गढ़वाल संसदीय सीट। बावन गढ़ों वाली यह सीट हिंदुओं के पवित्र तीर्थ बद्रीनाथ से शुरू होकर पवित्र धाम केदारनाथ के साथ ही सिक्खों के पवित्र हेमकुंड साहिब से होते हुए मैदान की ओर उतरती है और तराई में रामनगर व कोटद्वार पहुंचकर समाप्त होती है। हेमवती नंदन बहुगुणा जैसे दिग्गज नेता देने वाली इस सीट पर 1991 से लेकर अब तक भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्‍व रहा है। दसवें लोकसभा चुनाव से लेकर 2014 में संपन्न 16वें लोकसभा चुनाव तक मात्र दो बार यह सीट भारतीय जनता पार्टी के हाथों से फिसली है। 1996-1998 के दौरान ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (तिवारी) से और 2009-2014 के बीच भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सतपाल महाराज इस सीट पर विजयी रहे, जबकि 1998 से अब तक भुवनचंद्र खंडूरी पांच बार यहां से सांसद चुने जा चुके हैं। सातवीं लोकसभा चुनाव में गढ़वाल संसदीय सीट उस वक्त काफी चर्चा में रही, जब हेमवती नंदन बहुगुणा ने कांग्रेस का दामन छोड़ जनता पार्टी (सेक्यूलर) से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इससे पूर्व, पहले लोकसभा से चौथे लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस के भक्तदर्शन इस सीट से सांसद रहे, जबकि पांचवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रताप सिंह नेगी इस सीट से सांसद रहे थे। 1977 में जनता पार्टी के जगन्नाथ शर्मा इस सीट से सांसद बने। 1984 में कांग्रेस (आई) और 1989 में जनता दल से चंद्रमोहन सिंह नेगी लगातार दो बार इस सीट से सांसद बने। 14-वीं लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए टीपीएस रावत इस सीट से सांसद बने।

गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र में बद्रीनाथ, केदारनाथ, थराली, कर्णप्रयाग, रूद्रप्रयाग, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, यमकेश्वर, पौड़ी, श्रीनगर, पौड़ी, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडौन, कोटद्वार व रामनगर विधानसभा सीटें शामिल हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में गढ़वाल लोकसभा सीट में 7127057 मतदाता थे, जिनमें से 4391890 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। गढ़वाल लोकसभा सीट में जहां केदारनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण बड़ा मुद्दा है, वहीं श्रीनगर के मेडिकल कॉलेज को सेना के सुपुर्द किए जाने का मामला भी बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
 

गढ़वाल की खास बातें

गढ़वाल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तराखंड के पांच संसदीय क्षेत्रों में से एक है। इस लोकसभा सीट को चमोली, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल, टिहरी गढ़वाल और रुद्रप्रयाग जिलों के इलाकों को मिलाकर गठित किया गया है। इस संसदीय सीट में 14 विधानसभा क्षेत्रों को शामिल किया गया है। हिमालय की पर्वत श्रंखलाओं और वनों से घिरा यह क्षेत्र साहित्य और संस्कृति में बेहद समृद्ध है। यह क्षेत्र तिब्बत और नेपाल देश से भारत की सीमाएं बांटता है। गढ़वाल को दो भागों पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल में बांटा गया है। चान्दपुर किला, श्रीनगर-मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर, पाडुकेश्वर, जोशीमठ के निकट देवी मादिन एवं देवलगढ मंदिर इसी क्षेत्र में हैं।

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  • सीटें534
  • महिला मतदाता615,350
  • पुरुष मतदाता651,868
  • कुल मतदाता1,267,218

घोषित उम्मीदवार लोकसभा 2019

लोकसभा चुनाव

    भुवन चन्द्र खण्डूरी

    विजयी सांसद – 2014
    • जन्मतिथि17 फरवरी 1964
    • जेंडरM
    • शिक्षाबी एस सी, बी ई सिविल
    • संपत्ति4.43 करोड़

    पूर्व सांसद

    • श्री तीरथ सिंह रावत

      बीजेपी2019

    • सतपाल महाराज

      कांग्रेस2009

    • मेजर जर्नल रिटायर्ड भुवन चंद्र खंडूरी

      बीजेपी2004

    • मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी

      बीजेपी1999

    • मेजर जनरल रिटायर्ड भुवन चंद्र खंडूरी ए वी एस एम

      बीजेपी1998

    • सतपाल महाराज

      एआईआईसी  टी1996

    • भुवन चंद

      बीजेपी1991

    • चंद्र मोहन

      जेडी1989

    • चंद्र मोहन सिंह

      कांग्रेस1984

    • हेमवती नंदन बहुगुणा

      कांग्रेस1980

    • जगन्नाथ शर्मा

      बीएलडी1977

    • प्रताप सिंह

      कांग्रेस1971

    • बी दर्शन

      कांग्रेस1967

    • भक्त दर्शन

      कांग्रेस1962

    • भक्त दर्शन

      कांग्रेस1957

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    किसने क्या कहा और पढ़ें

    • अरुण जेटली(भाजपा)

      प्रधानमंत्री की जाति कैसे प्रासंगिक है? उन्होंने कभी जाति की राजनीति नहीं की। उन्होंने केवल विकासात्मक राजनीति की है। वह राष्ट्रवाद से प्रेरित हैं। जो लोग जाति के नाम पर गरीबों को धोखा दे रहे हैं वे सफल नहीं होंगे। ऐसे लोग जाति की राजनीति के नाम पर केवल दौलत बटोरना चाहते हैं। बीएसपी या आरजेडी के प्रमुख परिवारों की तुलना में प्रधानमंत्री की संपत्ति 0.01 फीसद भी नहीं है।

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    • दिग्विजय सिंह(कांग्रेस)

      मैं सदैव देशहित, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की बात करने वालों के साथ रहा हूं। मैं धार्मिक उन्माद फैलाने वालों के हमेशा खिलाफ रहा हूं। मुझे गर्व है कि मुख्यमंत्री रहते हुए मुझ में सिमी और बजरंग दल दोनों को बैन करने की सिफारिश करने का साहस था। मेरे लिए देश सर्वोपरि है, ओछी राजनीति नहीं।

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    • राहुल गांधी(कांग्रेस)

      हमारे किसान हमारी शक्ति और हमारा गौरव हैं। पिछले पांच साल में मोदी जी और भाजपा ने उन्हें बोझ की तरह समझा और व्यवहार किया। भारत का किसान अब जाग रहा है और वह न्याय चाहता है

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    • नरेंद्र मोदी(भाजपा)

      आज भारत दुनिया में तेजी से अपनी जगह बना रहा है, लेकिन कांग्रेस, डीएमके और उनके महामिलावटी दोस्त इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए वे मुझसे नाराज हैं

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    • राबड़ी देवी(राजद)

      जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर लालू जी से मिलने उनके और तेजस्वी यादव के आवास पर पांच बार आए थे। नीतीश कुमार ने वापस आने की इच्छा जताई थी और साथ ही कहा था कि तेजस्वी को वो 2020 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं और इसके लिए 2019 के लोकसभा चुनाव में लालू उन्हें पीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर दें।

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