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संस्कृत के लिए प्रौद्योगिकी में अपार संभावनाएं

संवाद सूत्र, बहादराबाद: उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय और उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा अनुसंधान केंद्

By JagranEdited By: Published: Mon, 04 Dec 2017 07:41 PM (IST)Updated: Mon, 04 Dec 2017 07:41 PM (IST)
संस्कृत के लिए प्रौद्योगिकी में अपार संभावनाएं
संस्कृत के लिए प्रौद्योगिकी में अपार संभावनाएं

संवाद सूत्र, बहादराबाद: उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय और उत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा अनुसंधान केंद्र देहरादून की ओर से योग विभाग सभागार में प्रौद्योगिकी संवर्धित शिक्षा विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

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मुख्य अतिथि प्रो. दुर्गेश पंत ने कहा संस्कृत के लिए अनंत संभावनाएं प्रौद्योगिकी में है। प्रयास करने की आवश्यकता है। कहा संस्कृत भाषा पीछे न रह जाए, इसके लिए संस्कृत के छात्रों को व्यापक स्तर पर तकनीकी ज्ञान को आत्मसात करना होगा। कहा कि प्रौद्योगिकी समाज में समानता लाकर ज्ञान के अंतर को कम करती है। आज का युवा इसके साथ कदमताल कर रहा है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने कहा कि संस्कृत के साथ प्रौद्योगिकी का अलग करके नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने छात्रों को आत्मा और जीव के संबंध के बारे में विस्तार से बताते हुये संस्कृत भाषा के वैज्ञानिक ²ष्टिकोण को स्पष्ट किया। डॉ. ओपी नौटियाल ने कहा संस्कृत के ज्ञानी को ही विज्ञान कहा जाता है फिर कुछ समय बाद इसके बीच में अंतर पैदा हुआ। वर्तमान में यह अंतर समाप्ति की ओर है। संचालन कर रहे डॉ. दामोदर परगाईं ने किया। इस दौरान सुशील चमोली, दिनेश चन्द चमोला, मनजीत कौर, मनोज गहतोड़ी, आशुतोष दुबे, चंद्रप्रकाश पांडेय, डॉ प्रतिभा शुक्ला, कैलाश गहतोड़ी, कंचन तिवारी, बिन्दुमति द्विवेदी, सुमन भट्ट, छात्र संघ अध्यक्ष रवींद्र नौटियाल, कुलदीप भट्ट, परमेश कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


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