क्लीनिकल ट्रायल से ठीक हुआ भारतीय मूल की महिला का कैंसर, कुछ ही महीनों की बची थी जिंदगी; मिला नया जीवन

मैनचेस्टर के फेलोफील्ड की 51 वर्षीय जैस्मिन डेविड को वर्ष 2017 में स्तन कैंसर का पता चला। दो वर्ष बाद कैंसर बड़ी तेजी से फैलने लगा। फेफड़ों और हड्डियों तक कैंसर फैल चुका था। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

Dhyanendra Singh ChauhanPublish: Mon, 04 Jul 2022 10:38 PM (IST)Updated: Mon, 04 Jul 2022 10:59 PM (IST)
क्लीनिकल ट्रायल से ठीक हुआ भारतीय मूल की महिला का कैंसर, कुछ ही महीनों की बची थी जिंदगी; मिला नया जीवन

लंदन, प्रेट्र। भारतीय मूल की कैंसर पीड़ित महिला की कुछ ही दिनों की जिंदगी बची थी। उन्हें स्तन कैंसर था। यह तेजी से फैल रहा था, लेकिन ब्रिटेन के एक अस्पताल में 'क्लीनिकल ट्रायल (दवा का परीक्षण) के बाद उन्हें नया जीवन मिला है। डाक्टरों ने बताया कि उनका कैंसर पूरी तरह से ठीक हो गया है। उनके शरीर में कैंसर कोशिकाएं नहीं मिलीं।

हर तीन सप्ताह पर दी गई दवा

मैनचेस्टर के फेलोफील्ड की 51 वर्षीय जैस्मिन डेविड को वर्ष 2017 में स्तन कैंसर का पता चला। दो वर्ष बाद कैंसर बड़ी तेजी से फैलने लगा। फेफड़ों और हड्डियों तक कैंसर फैल चुका था। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। नेशनल इंस्टीट्यूट फार हेल्थ केयर रिसर्च (NIHR) मैनचेस्टर की क्लीनिकल रिसर्च फैसिलिटी (CRF) में इम्युनोथेरेपी दवा एटोजोलिजुमाब के साथ एक दवा का परीक्षण करने का फैसला लिया गया। हर तीन सप्ताह पर उन्हें दवा दी गई।

दवा की वजह से शुरू में सिरदर्द और तेज बुखार का करना पड़ा सामना

जैस्मिन डेविड ने कहा,जब मुझे क्लीनिकल ट्रायल की पेशकश की गई तो मुझे नहीं पता था कि यह मेरे लिए काम करेगा या नहीं। लेकिन मैंने सोचा कि कम से कम मैं दूसरों की मदद करने और अगली पीढ़ी के लिए अपने शरीर का उपयोग करने के लिए कुछ कर सकती हूं। दवा की वजह से शुरू में मुझे सिरदर्द और तेज बुखार का सामना करना पड़ा। मेरी स्थिति काफी खराब हो गई। लेकिन बाद में दवा ने कैंसर पर असर करना शुरू कर दिया। मुझे नया जीवन मिला है। यह सब मेडिकल साइंस और भगवान की कृपा है। परिवार और दोस्तों की प्रार्थनाओं और समर्थन ने मुझे चुनौती का सामना करने की ताकत दी।

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Edited By Dhyanendra Singh Chauhan

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