रूस के उपग्रह रोधी परीक्षण का नतीजा बेहद खतरनाक, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नाराजगी

अमेरिका ने मास्को पर आरोप लगाया कि इसने मलबे का बादल बनाकर खतरा पैदा किया है। रूस ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया कि मलबों के बादल के अन्य वस्तुओं से टकराने और चेन रिएक्शन होने से धरती की कक्षा में उथल-पुथल मच सकता है।

Monika MinalPublish: Fri, 21 Jan 2022 04:18 AM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 04:18 AM (IST)
रूस के उपग्रह रोधी परीक्षण का नतीजा बेहद खतरनाक, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नाराजगी

नई दिल्ली, जेएनएन।  अंतरिक्ष में फैलता प्रदूषण चिंता का विषय है। इस पर गंभीरता से कदम उठाने की जरूरत है। इस बीच अंतरिक्ष प्रदूषण को लेकर रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गुस्सा है। इस गुस्से की वजह यह है कि पिछले वर्ष नवंबर में रूस ने उपग्रह रोधी मिसाइल परीक्षण के दौरान अपने एक उपग्रह को मार गिराया था। अब चीन का एक उपग्रह इस मलबे के कई टुकड़ों में से एक के काफी नजदीक से गुजरा। रूस के इस परीक्षण से 1,500 से अधिक टुकड़े उत्पन्न हुए थे। इसका मलबा पृथ्वी की कक्षा के चारों ओर बिखरा हुआ है।

अमेरिकी अधिकारियों ने मास्को पर एक खतरनाक और गैर-जिम्मेदार हमला करने का आरोप लगाया, जिसने मलबे का बादल बनाकर खतरा पैदा किया है। रूस ने उन चिंताओं को खारिज कर दिया कि मलबों के बादल के अन्य वस्तुओं से टकराने और चेन रिएक्शन होने से धरती की कक्षा में उथल-पुथल मच सकता है, लेकिन जिस तरह से चीन का उपग्रह मलबे के बेहद करीब से गुजरा है, वह खतरे का संकेत करता है। ग्लोबल टाइम्स की खबर के मुताबिक, चीन का सिंहुआ विज्ञान उपग्रह मलबे के एक टुकड़े से 14.5 मीटर के करीब आया। बेहद खतरनाक घटना मंगलवार को हुई। अंतरिक्ष मलबे के विशेषज्ञ लियू जिंग ने बताया कि मलबे और अंतरिक्ष यान के बीच इतनी कम दूरी गंभीर थी।

क्या होती है उपग्रह रोधी मिसाइल

इस समय सैन्य के साथ नागरिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं के लिए काफी हद तक उपग्रहों पर निर्भरता है। ऐसे में बड़े देश इस होड़ में लगे हैं कि किसी दूसरे देश से जंग होने की स्थिति में उनके उपग्रहों को नष्ट कर किस तरह संचार तंत्र को ठप किया जा सकता है। इसी काम के लिए उपग्रहरोधी मिसाइलें बनाई जा रही हैं। इन मिसाइलों से हमला कर अंतरिक्ष में भ्रमण कर रहे दुश्मन देश के उपग्रह को नष्ट करने की तकनीक ही उपग्रहरोधी तकनीक है। वैसे अभी तक दुनिया के किसी भी देश ने अपने दुश्मन देश के खिलाफ इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया है। अमेरिका के साथ-साथ रूस, चीन और भारत सफलतापूर्वक अपनी क्षमता का परीक्षण कर चुके हैं।

Edited By Monika Minal

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