'पंजाबी लहर' ने भारत व पाकिस्तान के 200 परिवारों को फिर से जोड़ा, 74 वर्षों बाद बुजुर्ग भाइयों की भावुक मुलाकात के दौरान नम हुई हर किसी की आंखें

भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त बिछुड़े भाई जब 74 वर्षों बाद मिले। दावा है कि पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल पंजाबी लहर के प्रयासों से दोनों देशों के 200 से ज्यादा परिवारों और दोस्तों को एक बार फिर जुड़ने का मौका मिला।

Amit SinghPublish: Sat, 15 Jan 2022 09:59 PM (IST)Updated: Sat, 15 Jan 2022 09:59 PM (IST)
'पंजाबी लहर' ने भारत व पाकिस्तान के 200 परिवारों को फिर से जोड़ा, 74 वर्षों बाद बुजुर्ग भाइयों की भावुक मुलाकात के दौरान नम हुई हर किसी की आंखें

लाहौर, प्रेट्र: भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त बिछुड़े भाई जब 74 वर्षों बाद मिले, तो उनकी आंखों से गंगा-यमुना की धारा फूट पड़ी। इसी हफ्ते वीजामुक्त करतारपुर गलियारे में हुई इस मुलाकात के दौरान वहां मौजूद शायद ही कोई अपनी आंखों को नम होने से रोक पाया। दावा है कि पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल 'पंजाबी लहर' के प्रयासों से दोनों देशों के 200 से ज्यादा परिवारों और दोस्तों को एक बार फिर जुड़ने का मौका मिला।

पाकिस्तान के पंजाब निवासी 84 वर्षीय साद्दीक खान व भारत के पंजाब निवासी उनके भाई हबीब उर्फ सिक्का खान की भावुक मुलाकात लगभग एक घंटे तक चली। वर्ष 1947 में विभाजन के दौरान अलग हुए दो भाइयों के पुनर्मिलन ने करतारपुर में तीर्थयात्रियों को खासा प्रभावित किया। साद्दीक जब बिछुड़े थे, तब उनकी उम्र 10 साल थी और उनके भाई सिक्का सिर्फ डेढ़ साल के थे। उन्होंने बताया, 'जब दंगाइयों ने हमला किया तब मेरी मां, छोटी बहनें और सिक्का, दादा के यहां थे। मैं अपने पिता के साथ पाकिस्तान के लिए निकल पड़ा। दुर्भाग्यवश रास्ते में मेरे पिता की हत्या हो गई और मैं अकेला रह गया।'

करीब 5.31 लाख सब्सक्राइबर के साथ अपना यूट्यूब चैनल चलाने वाले नासिर ढिल्लों ने कहा कि उनकी इस पहल का मकसद पूर्वी और पश्चिमी पंजाब में विभाजन से पैदा हुई दूरी को मिटाना है। ननकाना साहिब के भूपेंद्र सिंह लवली के साथ चैनल का संचालन करने वाले ढिल्लों ने कहा, 'वर्ष 1947 में विभाजन के खूनी दंगों के दौरान सीमा के दोनों तरफ के लोगों के पास अपने परिवार, रिश्तेदारों व दोस्तों से अलग होने की कहानियां हैं। कुछ न कुछ लिंक वीडियो कहानियों से मिल जाता है, जिससे उन्हें अपने प्रियजनों, दोस्तों तथा अपने पूर्वजों का घर ढूंढ़ने में मदद मिलती है।' ढिल्लों ने कहा कि अगर भारत सरकार उन्हें वीजा दे तो वह भी अपने पैतृक गांव जाना चाहेंगे।

Edited By Amit Singh

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