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पाकिस्तान सरकार देश के अल्पसंख्यकों की तेजी से छीन रही है आजादी, बदतर हुए हालात

पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता के हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। सरकार ईश-निंदा कानून और एंटी-अहमदिया कानून के माध्यम से अल्पसंख्यकों का जबर्दस्त उत्पीड़न कर रही है। अमेरिका के मानवाधिकार परिषद ने अपनी सालाना रिपोर्ट में इन गंभीर स्थितियों का विस्तार से हवाला दिया है।

Pooja SinghThu, 22 Apr 2021 03:05 PM (IST)
पाकिस्तान सरकार देश के अल्पसंख्यकों की तेजी से छीन रही है आजादी, बदतर हुए हालात

वाशिंगटन, एएनआइ। पाकिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता के हालात तेजी से खराब हो रहे हैं। सरकार ईश-निंदा कानून और एंटी-अहमदिया कानून के माध्यम से अल्पसंख्यकों का जबर्दस्त उत्पीड़न कर रही है। अमेरिका के मानवाधिकार परिषद ने अपनी सालाना रिपोर्ट में इन गंभीर स्थितियों का विस्तार से हवाला दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की सरकार ही अल्पसंख्यकों के खिलाफ नियोजित तरीके से काम कर रही है। इसमें ईश निंदा कानून को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। विदेशी आतंकियों से देश के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा देने में सरकार नाकाम साबित हो रही है। लोगों को निशाना बनाकर उनकी हत्या के मामलों में तेजी आई है। जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में सुधार आने के बजाय ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। घृणा अपराध भी तेज हो गए हैं।

पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय मुस्लिम होते हुए भी दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह रहने को मजबूर हैं। रिपोर्ट में जबरन अपहरण, धर्म परिवर्तन और अल्पसंख्यक महिलाओं व लड़कियों के उत्पीड़न के मामलों का भी उल्लेख किया गया है। ऐसे अपराध विशेषतौर पर हिंदुओं और ईसाइयों के साथ हो रहे हैं।

पाक अदालतें न्याय देने में असफल

रिपोर्ट में पाकिस्तान की अदालतों की भी निंदा की गई है। अदालतें पीडि़तों को न्याय देने में असफल हैं। उन मामलों का उल्लेख भी किया गया है, जिनमें अदालत कोई न्याय नहीं दे पाईं।

पाक के दोषी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए

यूएस मानवाधिकार परिषद ने अमेरिकी सरकार से स्पष्ट कहा है कि जो सरकारी अधिकारी या संस्था उत्पीड़न कर रहे हैं या दंड देने में असफल हैं, उन पर व्यक्तिगत प्रतिंबंध लगाए जाएं। ईश निंदा कानून समाप्त होने तक जमानत योग्य बनाया जाए-धर्म के आधार पर गिरफ्तार सभी को रिहा किया जाए। हिंसा फैलाने वाले धर्म के ठेकेदार, धर्म परिवर्तन करने वालों को उत्तरदायी ठहराया जाए।