तालिबान से डर गया पाकिस्‍तान! अफगानिस्‍तान की सरकार के विरोध और धमकी के बाद डूरंड लाइन पर रोकी फेंसिंग

डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान के बीच उपजे तनाव पर फिलहाल विराम लग गया है। पाकिस्‍तान ने तालिबान सरकार के सामने फिलहाल घुटने टेक दिए हैं और फेंसिंग का काम भी रोक दिया है। तालिबान ने सीमा पर फेंसिंग को गलत बताया था।

Kamal VermaPublish: Tue, 18 Jan 2022 12:01 PM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 03:33 PM (IST)
तालिबान से डर गया पाकिस्‍तान! अफगानिस्‍तान की सरकार के विरोध और धमकी के बाद डूरंड लाइन पर रोकी फेंसिंग

इस्‍लामाबाद (एएनआई)। पाकिस्‍तान ने अफगानिस्‍तान से लगती अपनी सीमा जिसको डूरंड लाइन के नाम से जाना जाता है पर फेंसिंग लगाने का काम फिलहाल रोक दिया है। इसके साथ ही पाकिस्‍तान की सरकार ने तालिबान सरकार के सामने घुटने टेक दिए हैं। आपको बता दें कि तालिबान ने पिछले दिनों कई बार इस लाइन पर पाकिस्‍तान सेना के जवानों को न सिर्फ फेंसिंग करने से रोक दिया था बल्कि उनका सामान भी जब्‍त कर लिया था। तालिबान ने साफ कर दिया है कि पाकिस्‍तान को इस तरह की फेंसिंग करने का कोई अधिकार नहीं है। तालिबान का यहां तक कहना है कि ये नियमों के खिलाफ है।

आपको बता दें कि अफगानिस्‍तान पर कब्‍जे से करीब दो दशक पहले तक तालिबान यहां से आपरेट करता रहा था। लेकिन अफगानिस्‍तान पर तालिबान के कब्‍जे के बाद पाकिस्‍तान की सरकार ने इस लाइन पर फेंसिंग करने की कोशिश की थी, जिसको तालिबान ने धमकी देकर रोक दिया था। अफगानिस्‍तान के अल अरेबिया की खबर के मुताबिक पाकिस्‍तान को ये गलतफहमी थी कि अफगानिस्‍तान में तालिबान की एक कमजोर सरकार आई है। लिहाजा उसने इसका फायदा उठाते हुए डूरंड लाइन पर फेंसिंग करने की सोची थी। लेकिन अब ये गलतफहमी तालिबान ने दूर कर दी है।

खबर के मुताबिक तालिबान ने इस मसले पर पाकिस्‍तान का न सिर्फ पुरजोर विरोध किया है बल्कि पाकिस्‍तान सेना को दोबारा ऐसा न करने की धमकी तक दे डाली है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्‍तान ने फेंसिंग के काम को टेक्टिकली रोक दिया है। इसकी एक बड़ी वजह अफगानिस्‍तान में विश्‍व के कई देशों द्वारा मानवता के आधार पर भेजी जाने वाले राहत सामग्री बताई गई है। आपको बता दें कि सीमा पर फेंसिंग लगाए जाने की वजह से इस्‍लामाबाद और काबुल के बीच तनाव काफी बढ़ गया था।

अफगानियों के लिए इसको डूरंड लाइन के नाम से पहचाना जाता है। 1893 में ब्रिटिश अधिकारी ने अफगानिस्‍तान के अमीर से एक समझौता कर इस लाइन का निर्धारण किया था। उस वक्‍त पश्‍तून कबीले की सीमा को निर्धारित करना इसका एक मकसद था जिसको पश्‍तूनिस्‍तान के विचार से आगे बढ़ाया गया था।

Edited By Kamal Verma

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