अंतरिक्ष में रहने के दौरान ज्यादा तेजी से नष्ट होती हैं लाल रक्त कोशिकाएं, शोध में आया सामने

नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक 14 अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में किए गए विश्लेषण में पाया गया है कि धरती पर रहने के दौरान उनके शरीर के आरबीसी का जितना नुकसान होता उसकी तुलना में अंतरिक्ष में होने पर 54 प्रतिशत ज्यादा आरबीसी नष्ट हुए।

Neel RajputPublish: Tue, 18 Jan 2022 03:16 PM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 03:16 PM (IST)
अंतरिक्ष में रहने के दौरान ज्यादा तेजी से नष्ट होती हैं लाल रक्त कोशिकाएं, शोध में आया सामने

ओटावा (कनाडा), एएनआइ। इन दिनों अंतरिक्ष यात्र वैज्ञानिक शोधों के अलावा अमीरों के लिए रोमांचक पर्यटन का शौक भी बन रहा है। ऐसे में एक सचेत करने वाला अध्ययन सामने आया है। इस अध्ययन में पहली बार इस रहस्य को उजागर किया गया है कि अंतरिक्ष में होने के दौरान लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या किस प्रकार से ज्यादा तेजी से कम होती है। इस स्थिति को स्पेस एनीमिया कहा जाता है।

नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, 14 अंतरिक्ष यात्रियों के बारे में किए गए विश्लेषण में पाया गया है कि धरती पर रहने के दौरान उनके शरीर के आरबीसी का जितना नुकसान होता, उसकी तुलना में अंतरिक्ष में होने पर 54 प्रतिशत ज्यादा आरबीसी नष्ट हुए।

यूनिवर्सिटी आफ ओटावा के द ओटावा हास्पिटल के रिहैब्लिटैशन फिजिशियन और इस शोध के प्रमुख लेखक गाइ ट्रुडेल ने बताया कि पहले अंतरिक्ष मिशन से धरती पर लौटने के बाद से ही अंतरिक्ष यात्रियों में स्पेस एनीमिया होने की रिपोर्ट होती रही है। लेकिन हमें यह नहीं पता था कि यह क्यों होता है। हमारा अध्ययन दर्शाता है कि अंतरिक्ष में जाने पर लाल रक्त कोशिकाएं ज्यादा नष्ट होती हैं और यह प्रक्रिया पूरे मिशन के दौरान चालू रहती है। इस अध्ययन से पहले, स्पेस एनीमिया को अंतरिक्ष में पहुंचने पर यात्री के ऊपरी शरीर में स्थानांतरित होने वाले तरल पदार्थो के लिए एक त्वरित अनुकूलन माना जाता था। इस क्रम में अंतरिक्ष यात्रियों की रक्त वाहिकाओं का 10 प्रतिशत तरल का नुकसान हो जाता है। यह भी माना जाता था कि इसे संतुलित करने के लिए उनका 10 प्रतिशत आरबीसी भी नष्ट हो जाता है और अंतरिक्ष में रहने के दौरान 10 दिनों में यह सामान्य हो जाता है।

डाक्टर ट्रुडोस की टीम ने पाया कि अंतरिक्ष में होने के दौरान लाल रक्त कोशिकाएं अंतरिक्ष के असर के कारण नष्ट होती हैं, न कि सिर्फ द्रव पदार्थ के शिफ्ट होने से। टीम ने इसे दर्शाने के लिए 14 अंतरिक्ष यात्रियों के छह महीने अंतरिक्ष में रहने के दौरान आरबीसी का आकलन किया। शोधकर्ताओं के अनुसार, धरती पर हमारा शरीर प्रति सेकेंड 20 लाख आरबीसी बनाता और नष्ट करता है। उन्होंने पाया कि छह महीने तक अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों में 54 प्रतिशत या 30 लाख प्रति सेकेंड ज्यादा लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हुईं।

उनका कहना है कि यह तो गनीमत है कि अंतरिक्ष में जब भारहीनता की स्थिति में लाल रक्त कोशिकाओं का कम होना समस्या नहीं बनता है। लेकिन जब आप गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में होते हैं तो एनीमिया का असर तब महसूस होता है। ऐसा नहीं होने पर अंतरिक्ष में मिशन पूरा करने में स्वास्थ्य बाधक बन सकता है।

Edited By Neel Rajput

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