श्रीलंका को वित्तीय संकट से उबारेगा भारत, 2.4 अरब डालर की देगा मदद

भारत ने विदेशी ऋण भुगतान और व्यापार के लिए वित्तीय बाधाओं को दूर करने में मदद करने के लिए श्रीलंका को मदद का वादा किया है। इससे पहले शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने श्रीलंका के वित्त मंत्री तुलसी राजपक्षे के साथ वर्चुअल बैठक भी की थी।

Mahen KhannaPublish: Thu, 20 Jan 2022 02:09 PM (IST)Updated: Thu, 20 Jan 2022 02:09 PM (IST)
श्रीलंका को वित्तीय संकट से उबारेगा भारत, 2.4 अरब डालर की देगा मदद

नई दिल्ली, एएनआइ। गंभीर वित्तीय संकट को झेल रहे श्रीलंका की ओर भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत ने विदेशी ऋण भुगतान और व्यापार के लिए वित्तीय बाधाओं को दूर करने में मदद करने के लिए श्रीलंका को 2.415 बिलियन अमरीकी डालर देने का वादा किया है। इससे पहले शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने श्रीलंका के वित्त मंत्री तुलसी राजपक्षे के साथ वर्चुअल बैठक की थी। बैठक के दौरान, जयशंकर ने बताया था कि भारत हमेशा श्रीलंका के साथ खड़ा रहा है और कोरोना के महामारी से उत्पन्न आर्थिक और अन्य चुनौतियों पर काबू पाने के लिए हर संभव मदद करना जारी रखेगा।

सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत की मदद

श्रीलंका को अपनी आर्थिक चुनौतियों से उबरने में मदद करने के लिए, भारत ने सार्क मुद्रा विनिमय व्यवस्था के तहत श्रीलंका को 400 मिलियन अमरीकी डालर की अतिरिक्त मदद की है और दो महीने के लिए 515.2 मिलियन अमरीकी डालर के एसीयू (एशियाई समाशोधन संघ) के निपटान को स्थगित कर दिया है। नीति अनुसंधान समूह (पीआरजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि श्रीलंका को भारत का महत्वपूर्ण समर्थन मौजूदा ईंधन संकट के बीच आया है जहां श्रीलंकी देश में अमेरिकी डालर की कमी के कारण खरीद करने में असमर्थ है।

श्रीलंका में चीन की गतिविधियों पर भारत की पैनी नजर

रिपोर्ट के अनुसार भारत के साथ बिगड़ते संबंधों के बीच वित्त मंत्री बासिल राजपक्षे के दिल्ली दौरे से रिश्ते को और मजबूती मिली है। पालिसी रिसर्च ग्रुप ने बताया कि त्रिंकोमाली तेल टैंक, वेस्ट कंटेनर टर्मिनल और कई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं भारत को पेश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका में चीन की गतिविधियों पर भारत की पैनी नजर है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी की हाल की द्वीप राष्ट्र यात्रा पर प्रकाश डालते हुए, पीआरजी रिपोर्ट में कहा गया है कि वांग यी, जिन्होंने श्रीलंका के शीर्ष अधिकारियों के साथ अपनी हालिया बातचीत के दौरान कहा था कि 'किसी भी 'तीसरे देश' को उनके साथ घनिष्ठ संबंधों में 'हस्तक्षेप' नहीं करना चाहिए'। श्रीलंका और भारत ने संकट को खत्म करने और प्रतिक्रिया करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

श्रीलंका पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है चीन

पालिसी रिसर्च ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार चीन पिछले एक दशक से श्रीलंका का सबसे बड़ा ऋणदाता रहा है और उसकी प्रमुख विकास परियोजनाओं में एक विवादास्पद भूमिका निभा रहा है। चीन भूमि पर कब्जा करके श्रीलंका पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की निकटता में उपस्थिति का मतलब भारत के लिए सुरक्षा खतरा है।

Edited By Mahen Khanna

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