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गाजा टनल को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है हमास, जानें इन सुरंगों के बारे में सबकुछ

गाजा पर बनाई गई सुरंगें (टनल) हमास के लिए बेहद अहम हथियार हैं। साल 2014 में इजरायल के साथ जंग के बाद से लड़ाके इन्हें हथियार लाने-ले जाने दुश्मन देश में दाखिल होने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। जानें इस सुरंगों के बारे में सबकुछ...

Krishna Bihari SinghTue, 18 May 2021 06:05 AM (IST)
गाजा टनल को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है हमास, जानें इन सुरंगों के बारे में सबकुछ

नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। गाजा पर बनाई गई सुरंगें (टनल) हमास के लिए बेहद अहम हथियार हैं। 2014 में इजरायल के साथ जंग के बाद से लड़ाके इन्हें हथियार लाने-ले जाने, दुश्मन देश में दाखिल होकर सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल करते रहे हैं। गाजा का ऐसा ही टनल नेटवर्क मिस्र की ओर भी था। 2009 में यहां से आवाजाही रोकने के लिए अंडरग्राउंड बैरियर लगाए गए। हालांकि, 2011 में मिस्त्र ने पाबंदियों पर ढील देते हुए आवाजाही की छूट दे दी। इसके बाद फलस्तीनियों को बार्डर पार करने की आजादी मिल गई, लेकिन फिर 2013-2014 में मिस्त्र की सेना ने करीब 1,200 सुरंगे नष्ट कर दी थीं।

वर्ष 2007 में बनी थी पहल टनल

गाजा पट्टी और मिस्र के बीच पहली टनल 2007 में बनाई गई थी और इसका इस्तेमाल तस्करी के लिए किया जाता था। इससे पहले भी इस तरह के ढांचों से काम लिया जाता था। बाद में इन्हें इजरायल के खिलाफ इस्तेमाल किया जाने लगा।

जमीन के ऊपर से पता करना मुश्किल

इन सुरंगों का जमीन के ऊपर से पता लगाना मुश्किल है। इनकी छत कंक्रीट से बनी हैं। इन्हें बनाने में तीन से नौ करोड़ डॉलर की लागत आई है। इसका इस्तेमाल हमास के अलावा फलस्तीन में इस्लामिक जिहाद मूवमेंट भी करता है।

इजरायली सैनिक का किया था अपहरण

इन्हीं टनल का प्रयोग करके हमास ने 2006 में इजरायली सैनिक जिलाद शालित का अपहरण किया था और पांच साल तक बंदी बनाकर रखा था। इजरायल इन्हें खत्म करने की कोशिश लंबे वक्त से करता रहा, लेकिन पूरी तरह कामयाबी नहीं मिली है।

यह रहा है इतिहास

  • वर्ष 2014 में हुए युद्ध के दौरान इजरायल ने 30 सुरंगों को नष्ट कर दिया था।
  • वर्ष 2007 के बाद से हमास ने 1300 टनल बनाई हैं। इन पर करीब सवा अरब डालर का खर्च आया है।
  • वर्ष 2014 में गाजा युद्ध के दौरान हमास ने सुरंग में चलते सैनिकों का वीडियो जारी किया था।
  • एक दौर में करीब 22 हजार फलस्तीनी 2500 टनल के जरिये दोनों देशों के बीच अपना काम करते थे।

तेल भी किया जाता था आयात

इन टनल्स से तेल का आयात भी होता है। गाजा के अकेले पावर प्लांट को चलाने के लिए आयात कर लाए गए तेल पर ही निर्भर रहना पड़ता है। 2013 में जब मिस्त्र ने सैकड़ों की संख्या में टनल खत्म कर दीं तो तेल की कमी के चलते गाजा का ये अकेला पावर प्लांट भी बंद हो गया था। 

Edited By: Krishna Bihari Singh