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कोविड-19 से उबरने के बाद भी लंबे समय तक पूरी तरह से ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं मरीज!

कोविड-19 से पूरी दुनिया में अब तक 31058352 मरीज ठीक हो गए हैं। लेकिन विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की चिंता का सबब वो लोग हैं जो ठीक होने के कुछ माह बाद भी ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं।

Kamal VermaSun, 01 Nov 2020 03:59 PM (IST)
कोविड-19 से उबरने के बाद भी लंबे समय तक पूरी तरह से ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं मरीज!

संयुक्‍त राष्‍ट्र। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 महामारी के उन मामलों पर चिन्ता जताई है जिनमें लोग इस वायरस के संक्रमण से उबरने के बाद भी लंबे समय तक पूरी तरह से ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं। डब्‍ल्‍यूएचओ ने इसको लेकर जो इमरजेंसी कमेटी की एक मीटिंग बुलाई थी उसमें इसके मौजूदा हालात पर चिंता जताई गई और समीक्षा भी की गई। इसके बाद एक बयान में डब्‍ल्‍यूएचओ ने कहा कि कोविड-19 अब भी अंतरराष्‍ट्रीय चिंता की एक बड़ी वजह और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा बना हुआ है। आपको बता दें कि कोविड-19 की शुरुआत दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर से हुई थी। इसके बाद जनवरी के अंत और फरवरी के मध्‍य तक इसके मरीज लगभग आधी दुनिया में सामने आ गए थे। इसके बाद से लगातार इसका प्रकोप पूरी दुनिया में बढ़ा ही है।

रॉयटर के ताजा आंकड़े बताते हैं कि पूरी दुनिया में इसके अब तक 46,120,511 मामले सामने आ चुके हैं जबकि 1,195,428 मौत भी हो चुकी है। इसके अलावा 31,058,352 मरीज ठीक भी हो चुके हैं। वहीं डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताबिक इसके अब तक 45678440 मामले सामने आए हैं और 1189945 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। ये आंकड़े 1 नवंबर 2020 की दोपहर 2 बजे तक के हैं। संगठन के आंकड़े ये भी बताते हैं कि दुनिया के 219 देशों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। इनमें अमेरिका में नौ माह के बाद भी सर्वाधिक मामले सामने आ रहे है।

अमेरिका में ही कोविड-19 के मरीजों की संख्‍या सबसे अधिक है और बीते कुछ माह से ये नंबर एक पर बना हुआ है। इसके बाद भारत विश्‍व में दूसरे नंबर पर है। हालांकि भारत में यदि कुछ राज्‍यों को छोड़ दिया जाए तो कमोबेश इसके मामलों में जबरदस्‍त गिरावट का दौर देखा जा रहा है। भारत में इसके मरीजों का रिकवरी रेट भी लगभग 91 फीसद है जो कि अन्‍य देशों के मुकाबले कहीं बेहतर है। भारत में पहले भी प्रति दस लाख की आबादी पर कोविड-19 के कम मामले सामने आए थे। हालांकि देश की राजधानी दिल्‍ली में इसकी थर्ड वेव बताई जा रही है।

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने का कहना है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान ऐसे मरीजों के मामले लगातार सामने आए हैं जो कोविड-19 के मध्यम और दीर्घकालीन प्रभावों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि उनके लक्षण अनेक प्रकार के हैं जो समय के साथ बदलते हैं और शरीर के किसी भी अंग या प्रणाली पर असर डाल सकते हैं। ये लक्षण थकान, खांसी, और सांस फूलने से लेकर फेफड़ों और दिल सहित अन्य अंगों में सूजन या चोट जैसे हो सकते हैं। ये अपना प्रभाव न्यूरॉलॉजिकल या तन्त्रिका पर भी छोड़ते हैं।

महानिदेशक घेबरेयेसस का कहना है कि इस वायरस के बारे मे अब भी जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि उन्‍होंने ये भी माना कि ये वायरस केवल लोगों की जान ही नहीं लेता है बल्कि इसका असर इससे भी व्‍यापक हो सकता है। कुछ लोगों के लिये यह बीमारी लंबे समय के लिये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है। इसके चलते होने वाली परेशानियों से मरीज उबर तो जाता है लेकिन इसमें कुछ सप्‍ताह या महीनों का समय लग जाता है। उनका ये भी कहना है कि कोविड-19 के शरीर पर होने वाले दीर्घकालीन प्रभावों का सामना करने वालों के बारे में कोई संख्‍या की जानकारी स्‍पष्‍टतौर पर नहीं है। लेकिन इसके संक्रमण के बाद उसके अन्य लक्षण या जटिलताएं अस्पतालों में भर्ती होने और घरों में ही स्वास्थ्य लाभ करने वाले, दोनों प्रकार के संक्रमितों में देखने को मिले हैं। ऐसे मामले महिलाओं और पुरुषों, युवाओं और बुज़ुर्गों और बच्चों में भी देखने को मिले हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 संक्रमण पर काबू पाने के लिए अधिक से अधिक रिसर्च करने की बात भी कही है। महासचिव का कहना है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य देखभाल के सर्वश्रेष्ठ मानक स्थापित करने में मदद मिलेगी। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की इमरजेंसी कमेटी ने यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और सदस्य देशों से अंतरराष्‍ट्रीय यातायात, निगरानी और कॉन्टैक्ट ट्रेसिन्ग प्रयासों में तथ्यपरक, जोखिम-आधारित और सुसंगत उपाय अपनाने की अहमियत पर बल दिया है। समिति का कहना है कि महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में कार्रवाई का राजनीतिकरण करने से बचा जाना होगा।