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कोरोना वायरस के इलाज में उपयोग होने वाली इन दवाओं पर हेल्थ एक्सपर्ट्स में भिड़ंत- जानिए क्‍या है कहना

कोविड-19 के इलाज में इस्‍तेमाल होने वाली दवाओं को लेकर विशेषज्ञों में रार मची है। कुछ विशेषज्ञ जो एक दवा को कारगर मान रहे हैं वहीं दूसरे इसको बेकार बताते हुए खारिज कर रहे हैं। वहीं डब्‍ल्‍यूएचओ के शोध ने भी दवा पर सवाल उठाए हैं।

Kamal VermaFri, 20 Nov 2020 08:35 PM (IST)
कोरोना वायरस के इलाज में उपयोग होने वाली इन दवाओं पर हेल्थ एक्सपर्ट्स में भिड़ंत- जानिए क्‍या है कहना

वाशिंगटन (एपी)। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज को कौन सी दवा ज्‍यादा कारगर होगी? इस सवाल पर विशेषज्ञों में एक राय नहीं बन रही है। आलम ये है कि कुछ विशेषज्ञ उन दवाओं के उपयोग को सिरे से नकार रहे हैं जिन्‍हें दूसरे सही बता रहे हैं। एक्‍सपर्ट का मानना है किविभिन्‍न हिस्‍सों में रहने वाले लोगों पर वैक्‍सीन का असर भी भिन्‍न-भिन्‍न हो सकता है। ये उनके रहने वाली जगह या क्षेत्र से प्रभावित हो सकता है। हालांकि इस मुद्दे पर चली ये बहस नई नहीं है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि कोविड-19 की शुरुआत के बाद जब दुनिया की विभिन्‍न कंपनियों ने इसको लेकर शोध शुरू किया था तभी ये बात कही जाने लगी थी कि वैक्‍सीन का असर भिन्‍न भिन्‍न लोगों पर अलग-अलग हो सकता है। उस दौरान ये भी कहा गया था कि ये जरूरी नहीं है कि एक ही वैक्‍सीन सभी लोगों पर कारगर साबित हो जाए। इसकी कुछ बड़ी वजहों में क्षेत्रों की अपनी भौगोलिक असमानताएं और कोरोना वायरस के प्रभाव में आ रहा बदलाव था।

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन का शोध 

इस बहस पर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के गाइडलाइंस पैनल ने रेमडेसिविर दवा को लेकर सलाह दी है कि इसका कोई सुबूत नहीं मिला है कि ये इसमें कारगर है और इसके उपयोग के बाद सांस लेने के लिए किसी तरह की कत्रिम मशीन का उपयोग नहीं करना पड़ेगा। लेकिन वही अमेरिका और दूसरे देशों ने संगठन की इस बात से इत्‍तफाक नहीं रखते हैं। इनका कहना है कि ये दवा इस वायरस की रोकथाम में कारगर साबित हुई है और उम्‍मीदों पर खरी उतरी है। इसके उपयोग के बाद अस्‍पताल में मौजूद मरीजों में जल्‍दी रिकवरी देखी गई है। इसके उपयोग के बाद औसतन पांच दिनों में मरीज को फायदा पहुंचा है।

एफडीए की गाइडलाइंस को नहीं मान रहे 

वहीं अमेरिका में ही कुछ मेडिकल ग्रुप फूड एंड ड्रग एडमिनिस्‍ट्रेशन की जारी गाइडलाइंस के तहत बताई गई दो थैरेपी को नकार रहे हैं, जिन्‍हें आपातकाल के लिए बताया गया था। इन ग्रुप का यहां तक कहना है कि अब तक इन दोनों ही थैरेपी के कोविड-19 की रोकथाम में कारगर होने के कोई प्रमाण सामने नहीं आ हैं। न ही ऐसा कोई प्रमाण सामने आया है कि इसके इलाज में इन दोनों थैरेपी के इस्‍तेमाल की सलाह दी गई हो। डॉक्‍टरों में इस बात को लेकर भी असमंजस बरकरार है कि डेक्‍सामिथासोन (dexamethasone) और ऐसी ही मिलती जुलती दवाओं का कब और कैसे इस्‍तेमाल किया जाए। इसको लेकर भी डॉक्‍टर अंधेरे में है कि इस वायरस पर tocilizumab कारगर होगी या नहीं।

रेमडेसिविर पर शोध

जिस तरह से विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की रेमडेसिविर पर शोध किया है उस तरह से tocilizumab पर किए गए शोध के शुरुआती परिणाम कहीं सामने नहीं आए हैं और न ही इसको स्‍वतंत्र रूप से वैज्ञानिकों ने रिव्‍यू ही किया है। यही वजह है कि डॉक्‍टरों में इसको लेकर असमंजस बरकरार है। यूनिवर्सिटी ऑफ पीट्सबर्ग के डॉक्‍टर डेरेक एंगस मानते हैं कि इस तरह का असमंजस गलत भी नहीं है। डॉक्‍टर एंगस कई बीमारियों के लिए खोजे गए इलाज और उसकी टेस्टिंग में शामिल रह चुके हैं। उन्‍होंने कहा किइसके लिए डिटेल देखनी बेहद जरूरी है। इस बात से मैसेचुसेट्स जनरल अस्‍पताल में इंफेक्शियस डिजीज के प्रमुख भी इत्‍तफाक रखते हैं। उनका कहना है कि केवल प्रेस रिलीज के दम पर किसी भी तरह की दवा का उपयोग करना बेहद मुश्किल है। एंगस का ये भी कहना है कि जब तक नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्‍थ की गाइडलाइंस में उस दवा के बारे में न बताया जाए, उसका उपयोग करना मुश्किल है। कोविड-19 की वैक्‍सीन को लेकर बन रही अलग-अलग राय पर उन्‍होंने कहा कि ये बेहद अजीब बात है कि इस पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है।

बढ़ गई है परेशानी 

जहां तक रेमडेसिविर की बात है तो डब्‍ल्‍यूएचओ की गाइडलाइंस से इसके इस्‍तेमाल से परेशानी और बढ़ गई है। संगठन का ये शोध व्‍यापक तौर पर किया गया है। इस दवा को पांच दिनों तक आईवी के तहत दिया जाता है। इसकी कीमत भी अधिक है। इसके बाद भी ये कारगर नहीं है। आपको बता दें कि रेमडेसिविर की दवा को Gilead Sciences Inc, Veklury के नाम से बेचती है। वहीं दूसरे देशों में इसको अलग-अलग नाम से बेचा जाता है। एक गैर लाभकारी संस्‍था इंस्टिट्यूट फॉर क्‍लीनिकल एंड इकनॉमिक रिव्‍यू ने इसकी कीमत पर विचार करने के बाद कहा है कि अस्‍पताल में मौजूद मरीजों के लिए इसकी कीमत 2470 डॉलर होनी चाहिए।

एक तिहाई ही हुई खरीद 

अमेरिकी स्‍थ्‍वास्‍थ्‍य विभाग के अधिकारी का कहना है कि अस्‍पतालों ने इस दवा की एक तिहाई खुराक उस वक्‍त खरीदी थीं जब इसकी कमी की बात सामने आई थी। जुलाई से सितंबर तक इसकी पांच लाख खुराक मौजूद थीं जिनमें से केवल 161,000 ही बिकी हैं। इकसे अलावा एक नए डेवलेपमेंट में गुरुवार को एफडीए ने आपातकाल में दूसरी एंटी इंफ्लेमेटरी दवा के उपयोग को भी मंजूरी दे दी है। इसका नाम baricitinib है जो रेमडेसिविर के साथ उपयोग में लाई जा सकेगी। इस दवा की बिक्री लिली करती जो Olumiant के रूप में इसको बेचती है। इसका इस्‍तेमाल अर्थराइटिस, ओवररिएक्टिंग इम्‍यून सिस्‍टम और शरीर में जलन होने पर किया जाता है।

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