अफगानिस्‍तान को किसी भी सूरत में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, अफगानियों को विश्‍व से मदद की उम्‍मीद: यूएन चीफ

अफगानिस्‍तान के खराब होते हालातों पर यूएन प्रमुख ने गहरी चिंता जताई है। उन्‍होंने विश्‍व से अपील की है कि वो अफगानियों की मदद को आगे आए। यूएनएससी में उन्‍होंने कहा कि अफगानी विश्‍व से इस बात की उम्‍मीद लगाए हुए हैं।

Kamal VermaPublish: Thu, 27 Jan 2022 08:37 AM (IST)Updated: Thu, 27 Jan 2022 09:32 AM (IST)
अफगानिस्‍तान को किसी भी सूरत में अकेला नहीं छोड़ा जा सकता, अफगानियों को विश्‍व से मदद की उम्‍मीद: यूएन चीफ

न्‍यूयार्क (एएनआई)। अफगानिस्‍तान के हालातों पर संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनिया गुतरेस ने चिंता व्‍यक्‍त करते हुए कहा है कि अफगानिस्‍तान एक धागे से लटका हुआ है जिसमें अफगानियों को छोड़ा नहीं जा सकता है। उन्‍होंने पूरी दुनिया से अपील की है कि सभी को अफगानियों के बेहतर भविष्‍य और उनकी मदद के लिए आगे ना चाहिए। उन्‍होंने यहां तक भी कहा है कि अफगानिस्‍तान की मदद करना पूरे विश्‍व की सुरक्षा को भी बेहद जरूरी है।

यूएन चीफ ने कहा कि ऐसे समय पर पूरे विश्‍व समुदाय की जरूरत है और इस काउंसिल ने अफगानिस्‍तान की बेहतरी के लिए, उसके विकास के लिए, विकास की राह पर अफगानिस्‍तान को आगे बढ़ाने के लिए और अफगानिस्‍तान को दोबारा बर्बादी की राह पर जाने से रोकने के लिए हाथ बढ़ाया है। संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी बात रखते हुए गुतरेस ने उन बातों को भी जोरदार तरीके से उठाया जिसकी बदौलत अफगानिस्‍तान का हाल ऐसा हुआ है। उन्‍होंने कहा कि तालिबान ने इस बात का भरोसा दिलाया है कि वो अफगानियों की हिफाजत करेगा, अफगानिस्‍तान में मानवाधिकार उल्‍लंघनों को होने से रोकेगा।

यूएन प्रमुख ने कहा है कि अफगानिस्‍तान लंबे समय तक राजनीतिक एजेंडा का शिकार बनता रहा है। इसके अलावा इसको अपनी रणनीतिक बढ़त और अपनी सोच और विचारों को थोपने और आतंकवाद का फैलाने के लिए भी इस्‍तेमाल किया जाता रहा है। आतंकवाद की आग में ये देश वर्षों से जलता आया है। इसलिए ये पूरी विश्‍व की एक जिम्‍मेदारी है कि अफगानिस्‍तान किसी भी तरह से अकेला और अलग न हो सके। उन्‍होंने कहा कि अफगानियों को शांति चाहिए और उन्‍हें विश्‍व समुदाय से उम्‍मीद है कि वो इसमें उनकी मदद करेगा। उन्‍हें हर हाल में मदद करनी ही होगी।

यूएन प्रमुख का ये भी कहना था कि अफगानियों को भीषण ठंड में मुश्किलों के साथ रहना पड़ा है। वहां की अर्थव्‍यवस्‍था चरमरा गई है। आधे से अधिक जनसंख्‍या को जबरदस्‍त भुखमरी का शिकार होना पड़ा है। इतना ही नहीं दो वक्‍त की रोटी के लिए माता पिता को अपने बच्‍चे तक बेचने पड़े हैं। उन्‍होंने अमेरिका द्वारा अफगानिस्‍तान के अरबों डालर के फंड रोकने पर कहा कि उन्‍हें पैसे की सख्‍त जरूरत है।

Edited By Kamal Verma

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