लालच में पड़े तो लुटेगी जीवन भर की कमाई

-शहर की एक शिक्षिका का बैंक खाता हुआ खाली -साइबर ठगों ने पल में ही उड़ा लिए छह लाख से अधिक -एक छा

JagranPublish: Sat, 04 Dec 2021 03:24 PM (IST)Updated: Sat, 04 Dec 2021 03:24 PM (IST)
लालच में पड़े तो लुटेगी जीवन भर की कमाई

-शहर की एक शिक्षिका का बैंक खाता हुआ खाली

-साइबर ठगों ने पल में ही उड़ा लिए छह लाख से अधिक

-एक छात्रा के खाते से भी करीब एक लाख रुपये गायब

-साइबर थाने में दर्ज कराई गई दोनों मामलों की शिकायत

-इंटरनेट मीडिया में विज्ञापन देख लालच में पड़े कि फंसे एक्सक्लूसिव मोहन झा, सिलीगुड़ी : लालच बुरी बला है वाली कहावत बस एक मुहावरा बन कर ही रह गया है। इस मुहावरे को पढ़ने के बाद गुरु अपने शिष्यों को लालच नहीं करने की सीख भी देते हैं। लेकिन रुपये की चमक के सामने यह सीख फीका पड़ गया। लालच का पासा फेंक कर साइबर ठग सिलीगुड़ी की एक शिक्षिका और एक छात्रा से लाखों रुपये ठगने मे कामयाब हो गए। दोनों पीड़ितों ने मेट्रोपॉलिटन पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने शिकायत भी दर्ज कराई है। जबकि साइबर क्राइम की टीम मामले की तफ्तीश मे जुटी है। ऑनलाइन फ्राड पूरे देश के सामने एक गंभीर समस्या है। ऑनलाइन ठग गिरोह पलक झपकते ही जि़ंदगी भर की जमा-पूंजी चट कर राहे हैं। जबकि पुलिस व अन्य जाच एजेंसिया ऑनलाइन ठग गिरोह के चक्रव्यूह को भेदने मे अब तक असफल ही रही हैं। हांलाकि नाकाम ही सही लेकिन इनकी कोशिश जारी है। जागरूक बनना ऑनलाइन ठगी से बचने का सबसे आसान तरीका है। इसलिए पुलिस व अन्य जाच एजेंसिया भी साइबर ठगी के खिलाफ जागरूकता अभियान पर विशेष जोर दे रही है। लेकिन जागरूक बनने के लिए लालच बुरी बला है वाली कहावत को अपने जीवन मे स्थान देने की जरूरत है।

सिलीगुड़ी मेट्रोपॉलिटन पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में ऐसे ही दो मामले दर्ज हुए हैं। पहला मामला प्रधान नगर थाना अंतर्गत चंपासारी इलाका निवासी एक शिक्षिका ने दर्ज कराई है। वहीं दूसरा सिलीगुड़ी थाना अंतर्गत खालपाड़ा निवासी एक छात्रा ने। लालच ने तो एक बार शिक्षिका को लुटाया ही बल्कि उसकी भरपाई करने की जुगत मे दोबारा ठगी की शिकार हुई। दर्ज शिकायत के मुताबिक फेसबुक पर एक ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी के बैनर तले कम समय मे लाखों रुपया कमाने का एक विज्ञापन उन्होने देखा। उस विज्ञापन को क्लिक कर जानकारी हासिल करने के क्रम में उन्हे ठग का फोन आया। फोन करने वाली महिला ने दो व्हाट्सएप नंबर मुहैया कराया। व्हाट्सएप पर उसने लाखों कमाई की तरकीब बताई और फिर उसके फर्जी एप मे रजिस्ट्रेशन के नाम पर मोबाइल नंबर समेत बैंक की जानकारी हासिल की। मोटी रकम निकालने के लिए ठग ने शिक्षिका को उस एप के वालेट मे तीन छोटी-छोटी रकम जमा दिखा कर एक ही झटके मे पाच लाख 34 हज़ार 800 रुपये झपट लिए। बैंक खाते से इतनी बड़ी रकम लूटते ही शिक्षिका के पैरों तले जमीन खिसक गई। लालच के चक्कर में पड़कर शिक्षिका ने अपने कुछ दोस्तों व रिश्तेदारों से कर्ज भी लिया था। अब इसकी भरपाई के लिए वह कर्ज तलाशने लगी। उसी क्रम मे फेसबुक पर एक नामी-गिरामी कर्ज देने वाली निजी कंपनी का विज्ञापन देखा। उस विज्ञापन को क्लिक कर जानकारी हासिल करने के क्रम में फिर से फोन आया। इस बार फोन करने वाले ने खुद को कर्ज देने वाली संस्था का मैनेजर बताया। कर्ज देने के लिए पहले कागजात मांगे और कई तरह का चार्ज दिखाकर 99 हजार 476 रुपए झपट लिया। दोनों बार में शिक्षिका से कुल छह लाख 34 हजार 276 रुपए की ठगी की गई। अंत में हारकर शिक्षिका ने साईबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

दूसरा मामला शहर के खालपाड़ा निवासी एक छात्रा के साथ घटी है। छात्रा को मोबाइल पर स्टडी फ्रॉम होम से संबंधित एक मैसेज मिला, जिसमें एक व्हाट्सएप नंबर संलग्न था। इस मैसेज में पढ़ाई के साथ रोजाना कमाने का ऑफर दिया गया। इस जमाने में पढ़ाई के लिए रुपए लिये जाते हैं, वहां देने की बात कही गई। छात्रा ठगी के इस दस्तक को नजरअंदाज कर लालच में पड़ गई। दिए व्हाट्सएप नंबर पर मैसेज देते ही पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कराने को कहा गया। जिसका चार्ज एक सौ रुपए बताया गया। लेकिन एक सौ का रिचार्ज कराने पर दोगुना उसके खाते में देने का आश्वासन दिया गया और रिचार्ज कराते ही रकम प्राप्त भी हुआ। दोगुने रकम की लालच में छात्रा ने फिर एक हजार का रिचार्ज कराया तो एक हजार 300 प्राप्त हुआ। इसके बाद इन्होंने पांच हजार, फिर उससे, अधिक, फिर अधिक करते-करते कुल 94 हजार 500 रुपया ठग को भेज दिया और कुछ प्राप्त नहीं हुआ। अंत में खेल समझ आने पर उसने भी साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है। क्या कहते हैं पुलिस कमिश्नर

इस संबंध में पुलिस कमिश्नर गौरव शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन फ्रॉड से लोगों को बचाने के लिए पुलिस की तरफ से लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। बल्कि कई मामलों में हमने शिकायतकर्ता को रकम वापस भी दिलाया है। लेकिन ऑनलाइन फ्रॉड मामलों की जांच में काफी समय लगता है। जानकारियां हासिल करने के लिए हमें फेसबुक व अन्य सोशल मीडिया पर निर्भर होना पड़ता है। लेकिन फिर भी मामलों का निपटारा करने के लिए पुलिस हर संभव प्रयास कर रही है।

Edited By Jagran

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