जिला पुलिस अस्पताल में डाक्टरी नहीं, इंडोर सेवा पूरी तरह से ठप्प

- पूरे मामले को स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया गया एसपी - अगले तीन महीने में समस्या का समाधान

JagranPublish: Thu, 02 Jun 2022 07:52 PM (IST)Updated: Thu, 02 Jun 2022 07:52 PM (IST)
जिला पुलिस अस्पताल में डाक्टरी नहीं, इंडोर सेवा पूरी तरह से ठप्प

- पूरे मामले को स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया गया : एसपी

- अगले तीन महीने में समस्या का समाधान कर लिया जाएगा : सीएमओएच संवादसूत्र, बालुरघाट : एक साल से भी अधिक समय हो गए है, लेकिन बालुरघाट जिला पुलिस अस्पताल में कोई डॉक्टर या नर्स नहीं है। नतीजतन, अस्पताल की इनडोर सेवा पूरी तरह से बंद कर दी गई है। फिलहाल गिने-चुने पुलिसकर्मी ही बाहरी सेवाएं दे रहे हैं। जिन कमरों में पहले मरीजों को रखा जाता था, वहा अब पुलिस को रखा जाता था। लंबे समय से डॉक्टर नहीं होने से पुलिस कर्मी व उनके परिजन परेशानी में हैं। पुलिस अस्पताल में इलाज नहीं होने से उन मरीजों को निजी अस्पतालों या निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया जाता है। हालाकि, पुलिस अस्पताल में डॉक्टरों और नसरें की नियुक्ति के लिए जिला पुलिस ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को पत्र देकर अवगत कराया है।

गौरतलब है कि जिला पुलिस कर्मी और उनके परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए इस अस्पताल की स्थापना की गई है। यह अस्पताल 19वीं सदी के अंत में बालुरघाट पुलिस लाइन से सटे इलाके में बनाया गया था। जहा पुलिस कर्मियों और उनके परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए बनाया गया था। इसके अलावा अस्पताल में कैदियों के लिए भी इलाज की व्यवस्था है।

इस बीच, गुणवत्तापूर्ण अस्पताल सेवाएं प्रदान करने के लिए 2000 साल में यूएसजी सहित अन्य सेवाएं शुरू की गईं। पहले यहां एक डॉक्टर व नर्से नियमित रूप से बैठा करते थे। साथ में अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी रहते थे। हालाकि 31 जनवरी 2021 के बाद से पुलिस अस्पताल में कोई डॉक्टर या नर्स नहीं है। पुलिस अस्पताल में फिलहाल 13 स्टाफ सदस्य हैं। ये सभी पुलिस कर्मी हैं।

इस संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक राहुल दे ने बताया कि पुलिस अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग द्वारा डॉक्टरों की नियुक्ति की जाती है। लंबे समय से पुलिस अस्पताल में कोई डॉक्टर या नर्स नहीं है। पूरे मामले से स्वास्थ्य विभाग को अवगत करा दिया गया है. एक साल से अधिक समय से कोई डॉक्टर नहीं है जिससे दिक्कत हो रही है।

वही जिला मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ सुकुमार दे ने कहा कि जिले में इलाज को लेकर संकट है। जो पुलिस अस्पताल के प्रभारी थे, वे सेवानिवृत्त हो गए हैं। इस वजह से अस्पताल में नए डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे। उन्हें उम्मीद है कि अगले तीन महीने में समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।

उधर, उत्तर बंगाल के आईजी देवेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि अस्पताल को शुरू करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

Edited By Jagran

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