लाखों के फिल्टर टैंक बने सफेद हाथी

विकासखंड भिलंगना की दो सबसे बड़ी पेयजल योजनाओं पर लगाए गए लाखों के फिल्टर सफेद हाथी बनकर रह गए हैं। टैंक खराब होने के कारण क्षेत्रवासियों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है।

JagranPublish: Fri, 28 Jan 2022 11:00 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 11:00 PM (IST)
लाखों के फिल्टर टैंक बने सफेद हाथी

संवाद सूत्र, घनसाली: विकासखंड भिलंगना की दो सबसे बड़ी पेयजल योजनाओं पर लगाए गए लाखों के फिल्टर सफेद हाथी बनकर रह गए हैं। टैंक खराब होने के कारण क्षेत्रवासियों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। पिछले पांच वर्षों से क्षेत्रवासी फिल्टर टैंक ठीक करने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।

टिहरी शहर जलमग्न होने के बाद घनसाली बाजार ने बहुत जल्द बृहद रूप लेना शुरू कर दिया था, जहां बाजार का विस्तारीकरण होता गया। लगातार बढ़ती आबादी को देखते हुए जनता की मांग पर सरकार ने वर्ष 2007 में घनसाली शहर के लिए पानी की किल्लत को दूर करने के लिए रानीगढ से घनसाली के लिए 16 किलोमीटर लंबी पेयजल योजना का निर्माण करवाया था, जिसका कार्य जल निगम ने वर्ष 2009 में पूरा कर लिया था, लेकिन करोड़ों की योजना पर एक फिल्टर टैंक नहीं बन पाया था। क्षेत्रवासियों की दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत के बाद विभाग ने उक्त योजना पर वर्ष 2012-13, में 99 लाख खर्च कर क्विलाखाल के पास एक फिल्टर टैंक का निर्माण किया, लेकिन वह टैंक अधिकारियों की भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया और तकनीकी खामियों के कारण उस टैंक से पानी फिल्टर ही नहीं हो रहा, जिससे आज भी घनसाली नगर पंचायत सहित आसपास के आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। ऐसा नहीं है कि इस बात की शिकायत ग्रामीणों ने विभाग से लेकर सरकार तक नहीं की हो, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यही दशा चमियाला पेयजल योजना की है। क्षेत्र के लिए छतियारा से सेंदुल गांव तक 18 किलोमीटर लंबी सबसे बड़ी पेयजल योजना का निर्माण वर्ष 2014-2015 में किया था, जिसमें छतियारा के पास से बाल गंगा नदी से पानी को टैप कर सेंदुल डिग्री कालेज तक पहुंचाया जाना था। उक्त योजना पर भी दूषित पानी को फिल्टर करने के लिए विभाग ने 55 लाख रुपये का फिल्टर टैंक बनवाया, लेकिन उससे एक दिन भी पानी फिल्टर नहीं हुआ और तकनीकी खामियों के कारण वह फेल हो गया। जिस पर आज नागर पंचायत चमियाला सहित एक दर्जन के करीब ग्रामीणों को बाल गंगा नदी का दूषित पानी पीना पड़ रहा है। भिलंगना विकास खंड की दो सबसे बड़ी पेयजल योजनाओं पर बने दोनों फिल्टर टैंक का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। - दोनों योजनाओं के फिल्टर में तकनीकी दिक्कतें आई हैं, जिसके लिए विभाग की तरफ से शासन में पत्र भेजा कर नया फिल्टर टैंक बनने के लिए धन उपलब्ध कराने की मांग की गई। विभाग को पैसा मिलते ही उक्त दोनों फिल्टरों को ठीक किया जाएगा।

अभिषेक वर्मा

अधिशासी अभियंता जल संस्थान

Edited By Jagran

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