फगुवा में दरकी पहाड़ी, मैक्स वाहन मलबे में दफन

पिथौरागढ़ सीमांत क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन जारी है।

JagranPublish: Tue, 05 Oct 2021 09:49 PM (IST)Updated: Tue, 05 Oct 2021 09:49 PM (IST)
फगुवा में दरकी पहाड़ी, मैक्स वाहन मलबे में दफन

संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़ : सीमांत क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन जारी है। देर रात फगुवा के पास पहाड़ी दरकने से एक मैक्स वाहन मलबे में दफन हो गया। कुछ ही देर पहले वाहन से सवारियां उतरी थी। देवयोग से जनहानि टल गई।

वल्थी निवासी हरीश सिंह मेहता मदकोट से धारचूला टैक्सी का संचालन करते हैं। देर रात वे धारचूला से सवारियां लेकर लौटे। सवारियां उतारने के बाद उन्होंने अपना वाहन फगुवा में सड़क के किनारे खड़ा किया। अचानक पहाड़ी दरक गई। मलबा और पेड़ मैक्स के ऊपर आ गिरे। पूरा वाहन मलबे में दब गया। वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ। जिस वक्त घटना हुई मौके पर कोई नहीं था, जिसके चलते जनहानि टल गई। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। बीते रोज ढुनामानी में तुमड़ियागाड़ के उफान पर आ जाने से पैदल पुल बह गया। पुल बह जाने से ग्रामीणों का मदकोट बाजार से संपर्क भंग हो गया है। छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। जौलढूंगा सड़क बदहाल बनी हुई है। वाहन कीचड़ में धंस रहे हैं। यात्रियों को वाहन में धक्का लगाकर उन्हें कीचड़ से निकालना पड़ रहा है। मदकोट बाजार को जोड़ने वाली 300 मीटर कच्ची सड़क तलैया बनी हुई है। लोगों को आवागमन में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ========= आलू की फसल सड़ने के कगार पर मदकोट: आलू उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी मदकोट क्षेत्र के काश्तकार अक्टूबर माह में भी जारी बरसात से परेशान हैं। आलू की फसल लगभग तैयार है। अगले 15 दिनों में आलू खेत से निकाला जाना है। लगातार बारिश से आलू के खेतों में ही सड़ जाने का खतरा पैदा हो गया है। काश्तकार लक्ष्मण सिंह, दिनेश सिंह ने बताया कि सितंबर माह के दूसरे पखवाड़े में बारिश का क्रम थम जाता था, लेकिन इस वर्ष अक्टूबर माह में भी बारिश हो रही है। इससे खेतों में पानी की मात्रा बढ़ गई है। नमी की वजह से आलू की ग्रोथ रुक गई है। बारिश नहीं थमी तो आलू खेतों में ही सड़ जाएगा। क्षेत्र के सैकड़ों काश्तकार आलू उत्पादन से अपनी आजीविका चलाते हैं। मदकोट क्षेत्र का आलू पिथौरागढ़ सहित अल्मोड़ा और हल्द्वानी तक भी जाता है। किसान नुकसान की आशंका से परेशान हैं।

Edited By Jagran

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