Year Ender 2021 : तीन सीएम बदले फिर भी इन चार बड़े प्रोजेक्‍ट पर आगे नहीं बढ़ सका काम

Year Ender 2021 साल बीतनेको तैयार हैं। सरकार से लेकर जनता भी हिसाब जोडऩे में लगी है कि 2021 में क्या खोया क्या पाया। बात अगर हल्द्वानी से जुड़े विकास कार्यों की करें तो 46 साल पुराने प्रोजेक्ट जमरानी बांध को लेकर ही कुछ उम्मीद जगी है।

Skand ShuklaPublish: Mon, 27 Dec 2021 11:32 AM (IST)Updated: Mon, 27 Dec 2021 11:34 AM (IST)
Year Ender 2021 : तीन सीएम बदले फिर भी इन चार बड़े प्रोजेक्‍ट पर आगे नहीं बढ़ सका काम

गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी : Year Ender 2021 : साल बीतनेको तैयार हैं। सरकार से लेकर जनता भी हिसाब जोडऩे में लगी है कि 2021 में क्या खोया क्या पाया। बात अगर हल्द्वानी से जुड़े विकास कार्यों की करें तो 46 साल पुराने प्रोजेक्ट जमरानी बांध को लेकर ही कुछ उम्मीद जगी है। धारा 11 लागू होने की वजह से बांध निर्माण एरिया की जमीन अब किसी को बेची या खरीदी नहीं जा सकती। लेकिन आइएसबीटी, रिंग रोड और इंटरनेशनल चिडिय़ाघर को लेकर मामला आगे नहीं बढ़ सका। अब देखना यह है 2022 में नई सरकार का इन प्रोजेक्ट को लेकर क्या रुख रहेगा।

जमरानी बांध

1975 में बांध की पहली डीपीआर 61.25 करोड़ की थी। 1989 में इसमें संशोधन के बाद 144 करोड़ की जरूरत पड़ी। लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब 400 हेक्टेयर में बनने वाले बांध को 2700 करोड़ की जरूरत है। बजट एडीबी से मिलेगा। इसलिए सर्वे व प्रस्ताव में उसके हर सुझाव को शामिल किया जा रहा। बांध की जद में आ रहे छह गांव के लोगों के विस्थापन को किच्छा के पराग फार्म में जगह ढूंढी गई है। बस अंतिम फैसला शासन से होना है। हालांकि, दिसंबर लास्ट में धारा 11 का आदेश आने से एक बड़ी बाधा जरूर दूर हुई है। भूमि अधिग्रहण की इस धारा के मुताबिक अब निजी नाप भूमि पर खरीद - फरोख्त बंद हो चुकी है।

आइएसबीटी 

कांग्रेस सरकार में तत्कालीन वित्तमंत्री स्व. डा. इंदिरा हृदयेश के प्रयासों से गौलापार में स्टेडियम के बगल में आइएसबीटी का काम शुरू हुआ था। तब इसका बजट 75 करोड़ था। लेकिन भाजपा सरकार आते ही प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया। जिसके बाद दावा किया गया कि तीनपानी में ओपन यूनिवर्सिटी के बगल में नई जमीन ढूंढ ली गई है। अब यहां निर्माण होगा। लेकिन पांच साल में एक पिलर तक खड़ा नहीं हो सका। फिलहाल गौलापार से प्रोजेक्ट शिफ्ट करने का मामला हाई कोर्ट में भी चल रहा है।

रिंग रोड

2017 में भाजपा की सरकार बनने पर तब सीएम रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 22 अप्रैल को पहली बार नैनीताल पहुँचने पर हल्द्वानी में रिंग रोड बनाने की घोषणा की थी। तब इस बड़े प्रोजेक्ट की लागत 400 करोड़ आंकी गई थी। 51 किमी लम्बी रिंग रोड कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी को जाम के संकट से निजात दिलाने को बेहद अहम मानी गई। लेकिन तमाम सर्वे व डिजाइन में सर्वे के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ सका। राज्य सरकार ने इसका प्रस्ताव केंद्र के पास भेजा है। केंद्र से पैसे मिलने पर अब कुछ होगा। इस प्रोजेक्ट को अब करीब 1800 करोड़ का बजट चाहिए।

इंटरनेशनल चिडिय़ाघर

गौलापार के चिडिय़ाघर का प्रस्ताव कांग्रेस शासन में साल 2015 में बना था। तराई पूर्वी वन प्रभाग की 412 हेक्टेयर जमीन में यह जू बनना था। 2019 में इसका काम पूरा करने में 300 करोड़ से अधिक की लागत बताई गई। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर ही पिछली सरकार में जू निदेशक, अपर निदेशक और रेंजर समेत अन्य पद भी बना दिए गए। मगर बजट के अभाव में शहर का एक और अहम प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में नजर आया। 13 किमी बाउंड्री वाल के अलावा अंदर एक कृत्रिम झील ही यहां बन सकी है। हकीकत यह है कि बैठकों और वीसी में इस प्रोजेक्ट को लेकर कई बार चर्चा तो हुई लेकिन धरातल पर कुछ देखने को नहीं मिला।

Edited By Skand Shukla

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