समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने जताई चिंता, कही ये बात

गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने हल्द्वानी में प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए धर्म राजनीति गोरक्षा व पलायन आदि पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि पहाड़ों से पलायन विकास की दिशाहीन परिभाषा गढऩे का फल है।

Skand ShuklaPublish: Mon, 29 Nov 2021 09:15 AM (IST)Updated: Mon, 29 Nov 2021 09:29 AM (IST)
समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी पर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने जताई चिंता, कही ये बात

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Shankaracharya Swami Nischalanand : गोवर्धन मठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने हल्द्वानी में प्रबुद्धजनों को संबोधित करते हुए धर्म, राजनीति, गोरक्षा व पलायन आदि पर खुलकर विचार रखे। उन्होंने कहा कि पहाड़ों से पलायन विकास की दिशाहीन परिभाषा गढऩे का फल है।

स्मार्ट सिटी का नाम लेते हुए कहा, नेता जो शब्द देते हैं उसी का प्रभाव पड़ता है। इसी के चलते दुर्गम, सुरक्षित व देवस्थान कहे जाने वाले इलाकों से लोग पलायन कर नगर, महानगर तक सीमित होना चाहते हैं। महानगर शुद्ध मिट्टी, हवा, प्रकाश, आकाश, शुद्ध मुस्कान, शुद्ध मनोभाव सुलभ नहीं करा सकते। ऐसे शहर जीवन को भोजन करने व संतान उत्पन्न करने तक सीमित कर देंगे। इनसे आचार-विचार का विलोप होगा। संयुक्त परिवार खत्म होंगे। चीन हमारी तरफ घुस रहा, हम शहरों को पलायन कर रहे।

संवाद, सेवा, सेना का मूलमंत्र दिया

समुदाय विशेष की बढ़ती आबादी के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा उत्तराखंड को ही ले लें तो इसे इसाई, मुस्लिम, कम्युनिस्ट तंत्र का गढ़ बना दिया गया है। मठ, मंदिर को अपना किला समझकर शिक्षा, रक्षा, अर्थ, सेवा का प्रकल्प क्रियान्वित होना चाहिए। सबसे ऊपर सद्भावपूर्वक संवाद के माध्यम से सैद्धांतिक निष्पत्ति हो। बीच में सेवा का प्रकल्प हो व नीचे सेना हो। तब धर्म की रक्षा हो सकेगी। सनातन सिद्धांत को समझने, क्रियान्वित करने में जो प्रमाद हुआ, उसका परिणाम क्रिश्चियन, मुस्लिम व कम्युनिस्ट तंत्र है। हम उस प्रमाद को दूर कर देते हैं तो किसी से भिडऩे की जरूरत नहीं है। अलग जाति, पंथ, समाज से होते हुए सभी को हिंदू नाम से सूत्र में बंधकर रहना होगा।

Edited By Skand Shukla

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