दो फरवरी से शुरू होंगे माघ के गुप्त नवरात्र, तांत्रिक क्रियाओं के ल‍िए जानिए क्या होती हैं 10 महाविद्याएं

Gupt Navratri 2022 Date and time इस साल अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार पहली नवरात्रि 02 फरवरी से शुरू हो रही है। हिंदी कैलेंडर 2078 के माघ मास की गुप्त नवरात्रि माघ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा यानि दो फरवरी बुधवार से शुरू होकर 10 फरवरी 2022 बृहस्पतिवार तक रहेगी।

Skand ShuklaPublish: Mon, 24 Jan 2022 08:20 AM (IST)Updated: Mon, 24 Jan 2022 08:20 AM (IST)
दो फरवरी से शुरू होंगे माघ के गुप्त नवरात्र, तांत्रिक क्रियाओं के ल‍िए जानिए क्या होती हैं 10 महाविद्याएं

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी: माघ महीने में आने वाले गुप्त नवरात्र दो फरवरी से शुरू हो रहे हैं। गुप्त नवरात्र में 10 महाविद्याओं की आराधना की जाती है। पर्व निर्णय सभा के सचिव डा नवीन चंद्र जोशी बताते हैं कि एक साल में चार नवरात्र आते हैं। चौत्र और आश्विन माह में आने वाले नवरात्र को मुख्य नवरात्र होते हैं। माघ व आषाढ़ में गुप्त नवरात्र आते हैं। ये नवरात्र गुप्त विद्याओं की साधना के लिए श्रेष्ठ होते हैं। ज्योतिषाचार्य डा नवीन चंद्र जोशी के मुताबिक, गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं के साधना की जाती हैं। ये महाविद्याएं देवी मां का ही स्वरूप हैं। इन महाविद्याओं के नाम हैं- मां काली, तारा देवी, षोडषी, भुवनेश्वरी, भैरवी, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी, और कमला देवी।

ग्रहों की वजह से खास रहेंगे गुप्त नवरात्र

गुप्त नवरात्र में तांत्रिक कियाएं की जाती हैं। गुप्त साधनाओं में राहु की स्थिति ज्यादा महत्वपूर्ण होती है और राहुकाल के समय कुछ विशेष पाठ करने से इनमें बड़े लाभ प्राप्त होते है। इस बार गुप्त नवरात्र ग्रहों की स्थिति के अनुसार ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं। इस बार राहु अपनी मित्र राशि वृषभ में है। सूर्य-शनि मकर राशि में रहेंगे। सूर्य-शनि एक साथ एक ही राशि में होने से तंत्र क्रियाएं जल्दी सफल हो सकती हैं।

साधना में गलती न हो

ज्योतिषाचार्य डा गोपाल दत्त त्रिपाठी बताते हैं कि महाविद्याओं की साधनाएं सामान्य पूजा-पाठ से एकदम अलग होती हैं। सही जानकारी के बिना, योग्य गुरु की शिक्षा के बिना साधनाएं नहीं करना चाहिए। महाविद्याओं की साधना में अगर कोई गलती हो जाती है तो साधना निष्फल हो जाती है और गलतियों का अशुभ असर भी हो सकता है। दस महाविद्या अपने आप में एक संपूर्ण साधना पद्धति है। इसमें मां भगवती के दस अलग-अलग शक्ति स्वरूपों की पूजा की जाती हैं।

1. काली महाविद्या साधना

मंत्र : “ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहाः”

दस महाविद्याओं में काली सर्वप्रथम हैं। इनकी साधना करने के बाद पूरे विश्व में ऐसा कुछ नहीं जो प्राप्त न हो सके। मुख्यतः इनकी आराधना बीमारी के नाश, शत्रुओं के नाश के लिए, दुष्ट आत्मा व दुष्ट ग्रह से बचाने के लिए, अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए, वाक सिद्धि के लिए, कवित्व शक्ति प्राप्त करने और राज्य प्राप्ति के लिए किया जाता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए उक्त मंत्र की कम से कम 9, 11, 21 माला का जप काले हकीक की माला से किया जाना चाहिए। मंत्र निम्न प्रकार है।

2. तारा महाविद्या

मंत्र : “ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट”

दस महाविद्याओं में दकसरे नंगर पर तारा को तारिणी भी कहा जाता है। जिस पर इनकी कृपा हो जाएं वो न समस्त दुखों से मुक्त हाे हाता है। इसीलिए इन्हें तारिणी भी कहा जाता है। इनकी आराधना से बुद्धि प्रखर हो उठती हैं और वाक् सिद्धी भी प्राप्त होती हैं। लेकिन इनका मंत्र ऋषियों द्वारा शापित और बहुत प्रबल हैं, अतः योग्य गुरु की देखरेख में ही इनकी साधना आरंभ करनी चाहिए। इनके मंत्र का जाप लाल मूंगा या स्फटिक की माला से किया जाता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए उक्त मंत्र का 11 माला जप करना चाहिए।

3. त्रिपुर सुंदरी/श्रीविद्या महाविद्या

मंत्र : “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः“

श्रीविद्या के नाम से प्रख्यात त्रिपुर सुंदरी महाविद्या दस महाविद्या साधना की पूर्णता को प्राप्त कराती हैं। इनका साधक खुद ही शिवमय होता है और वह अपने इशारे मात्र से जो चाहे कर सकता है। इनकी उपासना से भौतिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए रुद्राक्ष की माला से निम्न मंत्र का कम से कम 10 माला जप करना चाहिए।

4. भुवनेश्वरी महाविद्या

मंत्र : “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं नमः”

मां भुवनेश्वरी क्षण मात्र में प्रसन्न होने वाली देवी है जो उक्त की किसी भी इच्छा को पलक झपकते पूरा कर सकती है। परन्तु एक बार ये रूठ जाएं तो इन्हें मनाना अत्यन्त कठिन होता है, अतः इनके भक्तों को कभी किसी सज्जन, स्त्री अथवा जीव को नहीं सताना चाहिए। इन्हें प्रसन्न करने के लिए स्फटिक की माला से उक्त मंत्र का कम से कम ग्यारह या इक्कीस माला का जप कर मां भुवनेश्वरी की आराधना करनी चाहिए।

5. छिन्नमस्ता महाविद्या

मंत्र : “श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट स्वाहा:”

दस महाविद्याओं में सर्वाधिक उग्र साधना छिन्नमस्ता की मानी गई है। इनकी आराधना तुरंत फलदायी है। मां छिन्नमस्ता की आराधना शत्रु को परास्त करने के लिए, रोजगार में सफलता के लिए, नौकरी में पदोन्नति के लिए, कोर्ट केस में विजय के लिए तथा कुंडली जागरण के लिए की जाती है। इनकी साधना किसी योग्य व अनुभवी गुरु के दिशा-निर्देश में ही करनी चाहिए क्योंकि अत्यन्त उग्र होने के कारण जरा सी भी असावधानी साधक की मृत्यु का कारण बन सकती है। इनकी प्रसन्नता के लिए रुद्राक्ष या काले हकीक की माला से उक्त मंत्र का न्यूनतम 11 या 21 माला मंत्र जप करना चाहिए।

6. त्रिपुर भैरवी महाविद्या

मंत्र : “ॐ ह्रीं भैरवी कलौं ह्रीं स्वाहा:”

दस महाविद्याओं में त्रिपुर भैरवी महाविद्या को श्रीविद्या अथवा गुप्त गायत्री विद्या भी कहा जाता है। इनकी आराधना से भक्त स्वयं ही शक्ति स्वरूप बन जाता है और उसके इशारे मात्र से ही ब्रह्मांड की शक्तियां कार्य करने लगती हैं। इनकी साधना भी तुरंत फलदायी है और इनकी कृपा से बड़ी से बड़ी तांत्रिक शक्तियां भी साधक का कुछ नहीं बिगाड़ पाती हैं। मां त्रिपुरभैरवी को प्रसन्न करने के लिए मूंगे की माला से उक्त मंत्र का कम से कम 15 माला मंत्र जप करना चाहिए।

7. धूमावती महाविद्या

मंत्र : “ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा:”

एक मात्र धूमावती महाविद्या ही ऐसी साधना है जो किसी मंदिर अथवा घर में नहीं की जाती वरन किसी श्मशान में की जाती हैं। इनका स्वरूप विधवा तथा अत्यन्त रौद्र है। इन्हें अलक्ष्मी भी कहा गया है। ये जीवन में आने वाले किसी भी संकट अथवा जादू-टोना, भूत-प्रेत, अन्य नकारात्मक शक्तियों को पलक झपकते खत्म कर देती है। मां धूमावती को प्रसन्न करने के लिए मोती की माला या काले हकीक की माला से उक्त मंत्र का कम से कम नौ माला जप करना चाहिए।

8. बगलामुखी महाविद्या

मंत्र: “ॐ ह्लीं बगलामुखी देव्यै ह्लीं ॐ नम:”

वाकसिद्धी के लिए बगलामुखी महाविद्या से बढ़कर अन्य कोई साधना नहीं है। इनकी आराधना से प्रबल से प्रबल शत्रु भी जड़ सहित नष्ट हो जाता है। इन्हें ब्रह्मास्त्र भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु की संहारक शक्ति है। इनकी आराधना कोर्ट कचहरी में विजय, शत्रु का नाश, सरकारी अधिकारियों को अनुकूल बनाने तथा अन्य कहीं भी सफलता पाने के लिए की जाती है। इनके वरदान से व्यक्ति जो भी कह दें, वहीं सच होने लगता है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए हल्दी की माला से उक्त मंत्र का कम से कम 16 या 21 माला मंत्र का जप करना चाहिए।

9. मातंगी महाविद्या

मंत्र : “ॐ ह्रीं ऐं भगवती मतंगेश्वरी श्रीं स्वाहा:”

गृहस्थ जीवन में आ रहे किसी भी संकट को दूर करने के लिए मां मातंगी महाविद्या की साधना अत्यन्त उपयोगी मानी गई है। इनकी कृपा से सभी बिगड़े काम अपने आप ही बनते चले जाते हैं। इनकी आराधना युवक-युवतियों के शीघ्र विवाह हेतु, पुत्र प्राप्ति के लिए, सौभाग्य प्राप्ति के लिए, अकस्मात आए संकट दूर करने आदि कार्यों के लिए की जाती है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए स्फटिक की माला से उक्त मंत्र का कम से कम 12 माला मंत्र जप करना चाहिए।

10. कमला महाविद्या

मंत्र : “ॐ हसौ: जगत प्रसुत्तयै स्वाहा:”

सभी दस महाविद्याओं में कमला महाविद्या सर्वाधिक सौम्य साधना है। दीवाली पर इन्हीं की आराधना की जाती है। साक्षात महालक्ष्मी का आव्हान करने के लिए ही मां कमला की पूजा करनी चाहिए। मां कमला की प्रसन्नता से ही इस विश्व का कार्य-व्यापार चल रहा है और इन्हीं की आराधना से व्यक्ति को समस्त प्रकार के सुख-सौभाग्य, रिद्धि-सिद्धी, अखंड धन भंडार की प्राप्ति होती है। इनकी उपासना के लिए साधक को कमलगट्टे की माला से उक्त मंत्र का कम से कम 10 अथवा 21 माला मंत्र जप करना चाहिए।

Edited By Skand Shukla

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