सचिवालय में नियुक्तियों को चुनौती, विधानसभा सचिव व सचिव कार्मिक से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

विज्ञप्ति में 19 प्रतिशत का आरक्षण अनुसूचित जाति एवं जनजाति को दिया गया है वह विज्ञापित पदों पर दिया गया है जबकि यह आरक्षण 31 अगस्त 2001 के शासनादेश के रोस्टर के अनुसार दिया जाना था। यही नही यह आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ के आदेश के विपरीत है।

Prashant MishraPublish: Tue, 18 Jan 2022 05:13 PM (IST)Updated: Tue, 18 Jan 2022 05:13 PM (IST)
सचिवालय में नियुक्तियों को चुनौती, विधानसभा सचिव व सचिव कार्मिक से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

जागरण संवाददाता, नैनीताल : हाई कोर्ट ने विधानसभा सचिवालय में हो रही नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। शीतकालीन अवकाश अवधि के दौरान न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनएस धानिक की एकलपीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुए सचिव विधान सभा और सचिव कार्मिक को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने को कहा है।

उत्तराखण्ड सचिवालय अनुसूचित जाति एवं जनजाति कार्मिक बहुद्देशीय मानव संसाधन विकास कल्याण के अध्यक्ष वीरेंद्र पाल ने याचिका दायर कर विधान सभा सचिवालय के लिए जारी पहली अक्टूबर 2021 की विज्ञप्ति को चुनौती दी है । याचिकाकर्ता का कहना है कि सचिव विधान सभा व सचिव कार्मिक की ओर से जारी विज्ञप्ति में  18 जुलाई 2001, 31 अगस्त 2001 के शासनादेश व संविधान के अनुच्छेद 16 का पालन नही किया गया है।

विधान सभा सचिव ने सूचना का अधिकार के तहत उन्हें जो सूचना उपलब्ध कराई है, उसमें कहा गया है कि विज्ञप्ति में सामान्य वर्ग के लिए कोई पद खाली नहीं है, ये पद अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए है। विज्ञप्ति में 19 प्रतिशत का आरक्षण अनुसूचित जाति एवं जनजाति को दिया गया है, वह विज्ञापित पदों पर दिया गया है जबकि यह आरक्षण 31 अगस्त 2001 के शासनादेश के रोस्टर के अनुसार दिया जाना था। यही नही यह आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ के आदेश के विपरीत भी है।

Edited By Prashant Mishra

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