नहीं रहीं आजादी के दीवानों की कहानी सुनाने वाली 107 साल की दादी

आजादी के दीवानों की कहानी सुनाने वाली 107 वर्षीय रधुली आमा यानी दादी का निधन हो गया है। वह क्षेत्र की सबसे बुजुर्ग मतदाता थीं और कई बार उन्हें जिला निर्वाचन विभाग समानित कर चुका था। इस बार भी वह मतदान करना चाहता थीं।

Skand ShuklaPublish: Sun, 16 Jan 2022 02:56 PM (IST)Updated: Sun, 16 Jan 2022 04:48 PM (IST)
नहीं रहीं आजादी के दीवानों की कहानी सुनाने वाली 107 साल की दादी

बागेश्वर, जागरण संवाददाता : आजादी के दीवानों की कहानी सुनाने वाली 107 वर्षीय रधुली आमा यानी दादी का निधन हो गया है। वह क्षेत्र की सबसे बुजुर्ग मतदाता थीं और कई बार उन्हें जिला निर्वाचन विभाग समानित कर चुका था। इस बार भी वह मतदान करना चाहता थीं। उनके निधन पर पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है।

बागेश्वर जिले की मल्ला डोबा के कठपुड़िया तोक गांव निवासी रधुली देवी का निधन हो गया है। वह गांव की सबसे बुजुर्ग महिला थी। उनकी उम्र 107 वर्ष थी। उनके निधन से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। विधानसभी चुनाव में वह मतदान करने की बात भी कह रही थीं। जिसका मलाल उनके स्वजनों को है। डनफाट क्षेत्र की सबसे बुजुर्ग महिला रधुली देवी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।

उन्हें सबसे बुजुर्ग मतदाता के रूप में कई बार सम्मानित किया गया था। वह इस बार भी विधानसभा चुनाव में मतदान करने की बात कर रही थीं। 1915 में उनका जन्म हुआ था। वह स्वतंत्रता संग्राम के किस्से भी अपने नाती-पोतों और गांव के बच्चों को सुनाती थी। जब नौघर टी-स्टेट अंग्रेज अधिकारी आते थे, उस दौर के किस्से भी उनके जुबान पर तैरते थे। गणंतत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर उन्हें स्थानीय विद्यालय में बुलाया जाता है।

मल्ला डोबा की प्रधान हेमा राना, प्रधान नौघर ममता मेहरा, क्षेपंस नंदन सिंह मेहरा, पूर्व प्रधान मोहन सिंह मेहरा, कैलाश मेहरा, नंदा बल्लभ भट्ट, पूर्व राज्यमंत्री गोपाल दत्त भट्ट, पूर्व जिपंस एवं अनाशक्ति आश्रम के सलाहकार कृष्ण सिंह बिष्ट आदि ने शोक जताया है। वह आजादी के समय की थीं। नवजवानों में जोश भरतीं थी। राष्ट्रीय पर्व पर वह तिरंगा फहराने के लिए बच्चों को भी प्रेरित करती थीं।

Edited By Skand Shukla

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