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यूपी ने विधायक अमनमणि पर लिया एक्शन, तो सख्त कदम उठाने से क्यों कतरा रही उत्तराखंड सरकार

उत्तराखंड पहुंच दबंगई दिखाने वाले उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि त्रिपाठी के प्रति दरियादिली दिखाने वाली उत्तराखंड सरकार को उत्तर प्रदेश ने आइना दिखाया है।

Raksha PanthariWed, 06 May 2020 09:17 AM (IST)
यूपी ने विधायक अमनमणि पर लिया एक्शन, तो सख्त कदम उठाने से क्यों कतरा रही उत्तराखंड सरकार

देहरादून, राज्य ब्यूरो। लॉकडाउन के नियमों को धता बता उत्तराखंड पहुंच दबंगई दिखाने वाले उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि त्रिपाठी के प्रति दरियादिली दिखाने वाली उत्तराखंड सरकार को उत्तर प्रदेश ने आइना दिखाया है। उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंचते ही विधायक को उप्र सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब उत्तर प्रदेश यह कर सकता है तो उत्तराखंड सरकार सख्त कदम उठाने से क्यों कतराती रही।

हालांकि, शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने विधायक को अनुमति देने के मामले में अफसरों की चूक मानते हुए जांच कराने की बात कही थी, मगर अभी तक जांच अधिकारी नियुक्त नहीं हुआ है। अब मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस ने जो एफआइआर दर्ज की है, उसी के आधार पर विवेचना होगी। अब सवाल उठ रहा है कि सही कौन बोल रहा है। चर्चा है कि इस हाइप्रोफाइल मामले को पूरी तरह रफा-दफा करने की तैयारी चल रही है।

उत्तर प्रदेश के विधायक अमनमणि त्रिपाठी मामला पिछले तीन दिनों से सुर्खियों में है। वह बेधड़क अपने 11 साथियों के साथ उत्तराखंड आते हैं। वे बदरीनाथ और केदारनाथ जाने की अनुमति भी लेते हैं, जबकि वहां जाने की किसी को इजाजत नहीं है। फिर हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, चमोली और पौड़ी जिलों की सीमा से होते हुए कर्णप्रयाग तक पहुंचते हैं। इस दौरान पांच स्थानों पर विधायक ने नियम कायदों का उल्लंघन किया, मगर अफसर उन्हें सैल्यूट करते रहे। यही नहीं, अफसरों से बदसलूकी के बावजूद उन्हें जाने कैसे दिया गया, इस सवाल का जवाब आना बाकी है।

अब सवाल यह है कि विधायक को अनुमति ही क्यों दी गई, क्यों उनके लिए रेड कार्पेट बिछाया गया, क्यों सरकारी काम में बाधा व बदसलूकी के मामले दर्ज नहीं किए गए। ऐसे एक नहीं कई सवाल मुहंबाए खड़े हैं। यही विधायक जब उत्तराखंड से अपने राज्य उत्तर प्रदेश पहुंचते हैं तो कानून के उल्लंघन के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर क्वारंटाइन में भेज दिया जाता है। प्रश्न उठ रहा कि ऐसा साहस उत्तराखंड क्यों नहीं दिखा पाया।

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छीछालेदर के बाद सोमवार को शासकीय प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने विधायक को अनुमति दिए जाने को अफसरों की चूक माना था। साथ ही मामले की जांच की बात कही थी। इसके बावजूद जिम्मेदारों के खिलाफ एक्शन तो दूर अभी तक कोई जांच अधिकारी नियुक्त न होना, सरकारी रवायत पर सवाल खड़े करता है। मंगलवार को मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने जांच कमेटी के सवाल को टाल दिया। अलबत्ता, कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। जो एफआइआर दर्ज हुई है, उसी के आधार पर विवेचना होगी और जो निकलकर आएगा, उसी के अनुरूप कार्रवाई होगी।

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Edited By Raksha Panthari

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