घूमने के हैं शौकीन तो देर मत करें, यहां चलते-फिरते घर से होगी वादियों की सैर; मिलेंगी ये सुविधाएं और जानें- क्या है किराया

Uttarakhand Tourism उत्तराखंड में आने वाले दिनों में चलते-फिरते घर जैसे वाहन यानी कैरावैन से सैलानी यहां के पर्यटक स्थलों की न सिर्फ सैर कर सकेंगे बल्कि इसी में उनके ठहरने की व्यवस्था भी होगी। इसके लिए वातानुकूलित बसों को लग्जरी सूइट में बदला जाएगा।

Raksha PanthriPublish: Fri, 26 Nov 2021 03:47 PM (IST)Updated: Fri, 26 Nov 2021 06:22 PM (IST)
घूमने के हैं शौकीन तो देर मत करें, यहां चलते-फिरते घर से होगी वादियों की सैर; मिलेंगी ये सुविधाएं और जानें- क्या है किराया

केदार दत्त, देहरादून। Uttarakhand Tourism नैसर्गिक सुंदरता से परिपूर्ण उत्तराखंड की वादियां हमेशा से सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रही हैं। अब पर्यटन के अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए राज्य के पर्यटन विभाग ने नई पहल की है। आने वाले दिनों में चलते-फिरते घर जैसे वाहन यानी कैरावैन से सैलानी यहां के पर्यटक स्थलों की न सिर्फ सैर कर सकेंगे, बल्कि इसी में उनके ठहरने की व्यवस्था भी होगी। इसके लिए वातानुकूलित बसों को लग्जरी सूइट में बदला जाएगा। पर्यटन एवं छावनी नगर लैंसडौन में इस प्रयोग के सार्थक नतीजे सामने आने से उत्साहित पर्यटन विभाग ने कैरावैन नीति तैयार की है। इसके तहत राज्य में जगह-जगह कैरावैन पार्क बनेंगे।

दो बसों को बनाया कैरावैन

उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) पर्यटन गतिविधियों से जुड़ा है। बीते साल उसने पर्यटन के क्षेत्र में कुछ नया करने के उद्देश्य से कैरावैन कांसेप्ट को धरातल पर उतारने का निर्णय लिया। निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक डा. आशीष चौहान के निर्देशन में निगम की दो वातानुकूलित बस कैरावैन में तब्दील की गईं। इनमें घर जैसी सुविधाएं जुटाने पर प्रति बस करीब आठ लाख रुपये की लागत आई।

16 परिवारों ने लिया कैरावैन का आनंद

कैरावैन में सैर करना और रहना सैलानियों के लिए नया अनुभव है। दो कैरावैन तैयार होने के बाद इन्हें इसी वर्ष अक्टूबर में लैंसडौन में टिप-इन-टाप में खड़ा किया गया। टिप-इन-टाप स्थित निगम के टूरिस्ट हट के प्रबधक नंदादत्त पुरोहित बताते हैं कि अब तक इन दोनों कैरावैन में 16 परिवारों के 40 लोग रह चुके हैं। टिप-इन-टाप आने वाले सैलानियों के लिए कैरावैन आकर्षण का केंद्र भी है। इनमें रहते हुए सैलानी चौखंभा समेत हिमालय की अन्य चोटियों का दीदार कर सकते हैं।

यह हैं सुविधाएं

कैरावैन में एक डबल बेड, एक सिंगल बेड, दो कुर्सियां मय टेबल, एसी, टीवी, छोटा फ्रिज, ओवन, बाथरूम जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। कैरावैन का मूवमेंट होने पर उसमें इंडक्शन चूल्हा भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। कैरावैन में एक परिवार के तीन से चार व्यक्ति आसानी से रह सकते हैं।

किराया भी पहुंच में

लैंसडौन में खड़ी कैरावैन में चौबीस घंटे रहने का किराया 3,360 रुपये है। यह निगम की टूरिस्ट हट के किराये से से सस्ता है। सेमी डीलक्स से ऊपर स्तर की हट में एक दिन का किराया 3,584 से 8,288 रुपये तक है। यदि कैरावैन को सौ किमी के दायरे में सैर के लिए ले जाना है तो इसका किराया 15 हजार रुपये प्रतिदिन तय है। कैरावैन की बुकिंग आनलाइन व आफलाइन की जा सकती है।

निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा यूटीडीबी

कैरावैन के विचार को धरातल पर उतारने और निजी क्षेत्र को इसके लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (यूटीडीबी) ने कैरावैन नीति तैयार की है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति कैरावैन संचालित करना चाहता है तो उसे पर्वतीय भूगोल के अनुसार बड़ा वाहन खरीदकर उसे घर के रूप में विकसित करना होगा। साथ ही, यूटीडीबी में पंजीकरण करना होगा। कैरावैन के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने का प्रविधान किया जा रहा है।

जगह-जगह बनेंगे कैरावैन पार्क

राज्य के पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर बताते हैं कि कैरावैन नीति के तहत प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर कैरावैन पार्क बनाए जाएंगे। यह ऐसा स्थल होगा, जहां पार्किंग स्थल पर भोजन, बिजली, पानी, सीवरेज समेत सभी सुविधाएं उपलब्ध हों। इसके लिए कैरावैन संचालक को शुल्क देना होगा। बताया कि कैरावैन से सैर में पर्यटकों को रहने के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। साथ ही, जिन क्षेत्रों में रहने की सुविधा नहीं है, वहां कैरावैन से सैर की जा सकती है।

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Edited By Raksha Panthri

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