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Uttarakhand Election 2022: मोदी केंद्रित रणनीति में फंसती दिख रही कांग्रेस

Uttarakhand Assembly Elections 2022 विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ मगर राजनीतिक पारा उछाल मारने लगा है। पीएम मोदी चार दिसंबर को चुनावी रणभेरी बजाने को देहरादून पहुंच रहे तो कांग्रेस ने भी राहुल गांधी के दौरे की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है।

By Raksha PanthriEdited By: Published: Tue, 30 Nov 2021 07:58 AM (IST)Updated: Tue, 30 Nov 2021 07:58 AM (IST)
Uttarakhand Election 2022: मोदी केंद्रित रणनीति में फंसती दिख रही कांग्रेस
Uttarakhand Election 2022: मोदी केंद्रित रणनीति में फंसती दिख रही कांग्रेस।

विकास धूलिया, देहरादून। Uttarakhand Assembly Elections 2022 उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम अभी घोषित नहीं हुआ, मगर राजनीतिक पारा उछाल मारने लगा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) चार दिसंबर को चुनावी रणभेरी बजाने को देहरादून पहुंच रहे हैं तो कांग्रेस ने भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के तंज के बाद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के दौरे की संभावना तलाशनी शुरू कर दी है। यह सब तो ठीक, लेकिन अब चर्चा इस बात की हो रही है कि कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जादू से बचने की लाख कोशिश के बावजूद न चाहते हुए भी उनके प्रभामंडल में फंसती दिख रही है। नमो मैजिक के सामने पिछले विधानसभा चुनाव के साथ ही दो लोकसभा चुनाव में समर्पण करने को मजबूर हुई कांग्रेस को सूझ नहीं रहा है कि किस तरह चुनावी महासमर को कांग्रेस बनाम मोदी की शक्ल लेने से रोका जाए।

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डबल इंजन स्लोगन याद है न आपको, लेकिन यह कब उछला, फिर बता देते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त जनवरी 2017 में देहरादून में पहली चुनावी जनसभा में मोदी ने डबल इंजन की बात कही थी। ठीक जैसे इस बार मोदी विधानसभा चुनाव का शंखनाद करने देहरादून पहुंच रहे हैं, पांच साल पहले भी आए थे। परेड मैदान में हुई इस जनसभा में मोदी ने केंद्र व राज्य में एक ही पार्टी की सरकार को डबल इंजन की संज्ञा देने के अलावा कई बड़ी घोषणाएं की थीं, जिनमें से एक को गेम चेंजर माना गया। जी हां, तब मोदी ने उत्तराखंड में चारधाम आल वेदर रोड प्रोजेक्ट शुरू करने की बात कही थी। महत्वपूर्ण यह कि मोदी की यह घोषणा अब पांच साल बाद धरातल पर उतरने को लगभग तैयार है। कांग्रेस लाख कहे कि भाजपा जुमलेबाजी करती है, लेकिन इस मामले में उसके पास कोई तर्क नहीं।

दरअसल, कांग्रेस को यही डर सता रहा है कि चार दिसंबर को प्रधानमंत्री मोदी डबल इंजन और चारधाम आलवेदर प्रोजेक्ट की तर्ज पर देहरादून में मिशन 2022 फतह करने को देवभूमि को क्या सौगात देने जा रहे हैं। वैसे कांग्रेस का यह डर बेबुनियाद भी नहीं। प्रधानमंत्री मोदी लगभग 26 हजार करोड़ की योजनाओं की घोषणा उत्तराखंड के लिए करने जा रहे हैं। इनमें लगभग 450 करोड़ की पेयजल व सीवेज परियोजना भी है, जो राजधानी के एक बहुत बड़े हिस्से को कवर करेगी। इसके अलावा लगभग चार हजार करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री परेड मैदान से करेंगे। कांग्रेस के नेता इन दिनों इन्हीं संभावित घोषणाओं की टोह लेने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि जवाबी मुद्दे तलाशे जा सकें।

चलिए, मूल मुददे की ओर लौटते हैं। नरेन्द्र मोदी वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में पहली बार राष्ट्रीय राजनीति के मैदान में उतरे, उनका जादू का ही असर रहा कि उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर भाजपा ने क्लीन स्वीप किया, लेकिन यह तो बस आगाज था। इसके बाद आए वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव, भाजपा ने 70 में से 57 सीटों पर जीत दर्ज की, ऐतिहासिक प्रदर्शन। कांग्रेस अब तक का सबसे बदतर प्रदर्शन करते हुए 11 सीटों पर जा सिमटी। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पांचों सीटों पर भाजपा की जीत और कांग्रेस का सूपड़ा साफ। यानी, तीन चुनावों में मोदी मैजिक के आगे कांग्रेस चारों खाने चित। अब वर्ष 2022 की जंग सामने है और मोदी मैजिक अब भी सबके सिर चढ़कर जोर-शोर से बोल रहा है। बस, यही वह चुनौती है, जिससे कांग्रेस बचना चाहती है।

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उत्तराखंड में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे और पार्टी के मुख्यमंत्री पद के भी सबसे बड़े दावेदार हरीश रावत इस बात से वाकिफ हैं कि अगर विधानसभा चुनाव रावत बनाम मोदी हुआ तो कांग्रेस के लिए इससे पार पाना लगभग नामुमकिन ही होगा। यही वजह है कि रावत पहले ही कह चुके हैं कि मोदी बड़े नेता हैं, उनका मुकाबला मोदी से नहीं, उत्तराखंड भाजपा के नेताओं से है। उत्तराखंड भाजपा भी किसी गलतफहमी में नहीं, लिहाजा पार्टी के चुनाव अभियान के केंद्र में मोदी ही हैं। भाजपा नेताओं को मालूम है कि प्रधानमंत्री मोदी की अपील सैन्यभूमि, देवभूमि उत्तराखंड में किस हद तक प्रभावी होती है। लिहाजा, कांग्रेस और हरीश रावत को घेरने के लिए भाजपा जो चक्रव्यूह रचने जा रही है, उससे बचने को रास्ते की तलाश की जाने लगी है। अब यह रास्ता राहुल के उत्तराखंड में कार्यक्रमों से निकालने की कोशिश जारी है।

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