आत्मनिर्भर बन रही स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, जानिए देहरादून की पूजा तोमर के बारे में

देहरादून में स्वयं सहायता समूहों को संचालित करने वाली महिलाएं समाज की अन्य महिलाओं को दिशा प्रदान कर रही हैं। सरस्वती जागृति संस्था की संचालिका पूजा तोमर बताती हैं कि आठ वर्षों पूर्व उन्होंने तीन से चार महिलाओं को रोजगार देकर समूह को शुरू किया।

Sunil NegiPublish: Sat, 22 Jan 2022 07:44 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 09:54 PM (IST)
आत्मनिर्भर बन रही स्वयं सहायता समूह की महिलाएं, जानिए देहरादून की पूजा तोमर के बारे में

सुमित थपलियाल, देहरादून। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों को संचालित करने वाली महिलाएं अपने अनुभव और ज्ञान से समाज की अन्य महिलाओं व युवतियों को दिशा प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। महिलाओं और युवतियों को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उन्हें स्वावलंबन की डगर पर चलने की राह दिखा रही हैं। देहरादून की कई महिलाएं अब तक 40 से 160 लोग को साथ जोड़कर उन्हें रोजगार उपलब्ध करवा रही हैं। ऐसे में महिलाएं जहां आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बन रही हैं, वहीं आर्थिक रूप से भी सशक्त बन रही हैं।

पहाड़ी उत्पादों का दून में मिल रहा बाजार

पहाड़ी उत्पादों को देहरादून में बाजार उपलब्ध करवाने के लिए सरस्वती जागृति संस्था की संचालिका पूजा तोमर अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। पूजा बताती हैं कि आठ वर्षों पूर्व उन्होंने पहले तीन से चार महिलाओं को रोजगार देकर समूह को शुरू किया। स्थिति यह थी कि जब भी कभी पहाड़ी उत्पादों की बुकिंग आती तो खुद ही ई-रिक्शा व लोडर चलाकर सामान पहुंचाया। अब पहाड़ी उत्पादों की मांग बढ़ने लगी है, ऐसे में पहाड़ों में ही वहां के उत्पादों की पैकिंग, चौलाई के लड्डू बनवाने, पहाड़ी मसाले की पिसाई व उनकी पैकिंग, जूट के पैकेट बनाने, आगंनबाड़ी केंद्रों तक राशन के पैकेट उपलब्ध करवाने के लिए अब 40 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।

महिलाओं को किया जा रहा जागरूक

अपराजिता वेलफेयर सोसायटी महिलाओं के बनाए विभिन्न उत्पादों को बेचने, मैन्यूफेक्चरिंग व मार्केटिंग की बारीकियां, सामान का आनलाइन भुगतान के बारे में प्रशिक्षण देने का कार्य कर रही है। सोसायटी की संचालिका रजनी सिन्हा बताती हैं कि देहरादून के अलावा टिहरी, चंपावत, पौड़ी में यह कार्य किया जा रहा है। गांवों में अनाजों की बेहतर पैकिंग, घी, मसाले और विभिन्न त्योहारों पर महिलाओं को जोड़कर उन्हें आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अब तक समूह से जुड़कर 50 महिलाएं अब अलग से अपना कार्य कर रही है, जबकि 40 महिलाएं संस्था के साथ जुड़कर कार्य कर रही हैं।

Edited By Sunil Negi

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