नदी में बैठा हाथी बाहर निकला तो गिर पड़ा जमीन पर, फिर उठा ही नहीं; यहां तीन दिन में दो हाथियों की मौत

कोटद्वार रेंज में एक और हाथी की मौत हो गई। पिछले तीन दिनों में रेंज में दो हाथियों की मौत हो चुकी है। प्रभाग की इस रेंज के अंतर्गत गिवई बीट में खोह नदी के तट नर हाथी का शव बरामद किया गया है।

Raksha PanthriPublish: Fri, 21 Jan 2022 02:19 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 02:19 PM (IST)
नदी में बैठा हाथी बाहर निकला तो गिर पड़ा जमीन पर, फिर उठा ही नहीं; यहां तीन दिन में दो हाथियों की मौत

जागरण संवाददाता, कोटद्वार। लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज में पिछले तीन दिनों में दो हाथियों की मौत हो गई है। रेंज की लालपानी बीट के बाद अब गिवईं बीट में वन कर्मियों ने एक हाथी का शव बरामद किया। महकमा हाथी की मौत का कारण बीमारी बता रहा है।

बताते चलें कि तीन दिन पूर्व कोटद्वार रेंज की लालपानी बीट में एक हाथी मृत मिला था। शुक्रवार सुबह वन कर्मियों ने रेंज की गिवईं बीट-दो में एक हाथी को मृत पाया। बताया जा रहा है कि गुरूवार शाम यह हाथी खोह नदी में लेटा हुआ था। विभागीय कर्मी इस पर नजर रखे हुए थे। रात में हाथी नदी के बाहर निकला और नदी तट पर ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही प्रभागीय वनाधिकारी अमरेश कुमार, रेंज अधिकारी प्रदीप उनियाल, एसओजी प्रभारी अनुराग जुयाल मौके पर पहुंचे। प्रभागीय वनाधिकारी अमरेश कुमार ने बताया कि करीब मृत हाथी नर है व उसकी आयु करीब बीस वर्षीय है। बताया कि प्रथम दृष्टया हाथी की मौत बीमारी से होनी प्रतीत हो रही है। मृत्यु के वास्तविक कारणों की जांच को हाथी का पोस्टमार्टम करवा दिया गया है।

सूअरों ने रौंदी फसल, काश्तकार परेशान

जयहरीखाल विकास खंड के ग्राम बिल्टिया और राईसेरा में जंगली सूअर का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। आए दिन जंगली सूअर आबादी क्षेत्र में घुसकर की फसल बर्बाद कर रहे हैं। आक्रोशित काश्तकारों ने वन विभाग से जंगली जानवरों के आतंक से निजात दिलवाने की मांग की है। कहा कि फसल बर्बाद होने से काश्तकारों के समक्ष आर्थिक संकट खड़ा होने लगा है।

ग्राम बिल्टिया और रईसेरा के अधिकांश ग्रामीण खेती पर ही निर्भर है। लेकिन, पिछले कई माह से जंगली सूअर ग्रामीणों की मेहनत से लगाई गई फसल को बबर्दा कर रहे हैं। काश्तकार हयात सिंह, मनबर सिंह व राजेश्वर सिंह ने बताया कि गांव का अधिकांश भाग वन क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में शाम ढलते ही जंगली जानवर गांव के भीतर पहुंच जाते हैं। गुरुवार रात जंगली सूअरों ने गजे सिंह के खेत में घुसकर उनकी गेहूं की फसल बर्बाद कर दी।

हालत यह है कि ग्रामीण पूरी रात जागकर फसलों की रखवाली कर रहे हैं। बताया कि सूअरों के साथ चीतल, सांभर व बंदर भी काश्तकारों की खेती के लिए मुसीबत बने हुए हैं। खेती बर्बाद होने से काश्तकारों के समक्ष आर्थिक समस्याएं उत्पन्न होने लगी है। कई ग्रामीण खेती छोड़ मेहनत-मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से निजात के लिए गांव के आसपास सुरक्षा दीवार बनवाने की मांग की है।

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Edited By Raksha Panthri

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