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योगाभ्यास से साधकों ने जाने सुखी जीवन के रहस्य

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में योग प्रशिक्षकों ने साधकों को विभिन्न

By JagranEdited By: Published: Tue, 06 Mar 2018 07:23 PM (IST)Updated: Tue, 06 Mar 2018 07:23 PM (IST)
योगाभ्यास से साधकों ने जाने सुखी जीवन के रहस्य
योगाभ्यास से साधकों ने जाने सुखी जीवन के रहस्य

जागरण संवाददाता, ऋषिकेश: अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में योग प्रशिक्षकों ने साधकों को विभिन्न योगाभ्यास के माध्यम से सुखमय जीवन जीने के सूत्र बताए। सुबह से लेकर सायं तक अलग-अलग सत्रों में दुनिया भर से पहुंचे योग साधक योग साधना में लीन रहे।

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परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के छठे दिन तड़के चार बजे से ही गंगा तट पर योग कक्षाएं शुरू हो गई थी। अमेरिका से आए सिख योगगुरू और विश्व प्रसिद्ध योगाचार्य गुरूमुख कौर खालसा, गुरूशब्द ¨सह व किआ मिलर ने साधकों को कुंडलिनी योग का अभ्यास कराया। अमेरिका की ही प्रसिद्ध योगाचार्य केटी बी हैप्पी ने विन्यासा योग, परमार्थ निकेतन की नंदिनी त्रिपाठी ने सुक्ष्म योग, यूके से आई योगाचार्य शाऊल डेविड ने हृदय शक्ति को केंद्रित करने, अमेरिका के योगाचार्य डेना सेराये ने 'हार्ट ऑफ हनुमान', अमेरिका की ऐना फॉरेस्ट व ऑस्ट्रेलिया के जोस कैलार्को ने 'फॉरेस्ट योग' का प्रशिक्षण दिया। फॉरेस्ट योग के बारे में बताया कि एक संगीत, दर्शन, प्रार्थना, कविता के समग्रता की एक आधुनिक शैली है।

सूर्य उदय के समय गंगा तट पर अमेरिका से आई अंद्रा जार्ज के मधुर संगीत ने सभी प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा आयरलैंड के योगाचार्य ब्राउन सिद्धार्थ इंगले ने सोमैमेटिक योग, योगाचार्य जुल्स फेबर ने प्राणायाम और ध्यान, स्वामी उत्तमानंद ने संस्कृत मंत्र कार्यशाला का नेतृत्व किया जो ओम और ओम नम: शिवाय के आंतरिक अर्थ पर केंद्रित रही।

दोपहर के सत्र में डॉ. अंजना भगत ने प्रारंभिक चक्र ध्यान, अमेरिका की डैफनी त्से ने आत्मा के लिये जप, परमार्थ निकेतन की स्वामिनी आदित्यनंदा सरस्वती ने आध्यात्मिक पाठ्यक्रम-एक दिव्य कल पर उद्बोधन दिया। केटी फिशर ने जप के माध्यम से होने वाली शारीरिक कंपन आवृत्तियों पर ध्यान केंद्रित करने की विधा का अभ्यास कराया। साध्वी आभा सरस्वती ने योग निद्रा और विशेष ध्यान के सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने योग निद्रा से शरीर पर होने वाले प्रभावों के विषय में गूढ़ जानकारी दी और कहा कि योगनिद्रा, आध्यात्मिक निद्रा है, यह सोने और जागने के बीच की विशेष स्थिति है जो आत्मिक उन्नति के लिये अत्यंत लाभदायक है।


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