Uttarakhand Election 2022: सर्द मौसम में घुलनी शुरू हुई चुनावी गर्माहट, कोरोना के चलते इंटरनेट मीडिया बन रहा प्रचार का सबसे बड़ा सहारा

Uttarakhand Vidhan Sabha Election 2022 चुनाव के लिए यूं तो सभी राजनीतिक दल मैदान में उतर चुके हैं लेकिन सर्द मौसम और कोरोना ने उनके कदम ठिठकाए हैं। घर-घर दस्तक देने के साथ ही वातावरण में चुनावी गर्माहट घुलेगी। इसके साथ ही इंटरनेट मीडिया पर भी खास फोकस रहेगा।

Sunil NegiPublish: Fri, 21 Jan 2022 08:26 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 08:26 PM (IST)
Uttarakhand Election 2022: सर्द मौसम में घुलनी शुरू हुई चुनावी गर्माहट, कोरोना के चलते इंटरनेट मीडिया बन रहा प्रचार का सबसे बड़ा सहारा

राज्य ब्यूरो, देहरादून: प्रदेश में भले ही मौसम सर्द हो लेकिन राजनीतिक दलों द्वारा टिकट आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने के बाद चुनावी गर्माहट बढ़ने लगी है। कहीं समर्थकों का शोर है तो कहीं टिकट कटने से असंतुष्टों की नाराजगी। इन सबके बीच नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर भले ही जन सभा और बड़ी बैठकें नहीं हो पा रही हैं, लेकिन प्रत्याशियों ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से चुनावी प्रचार तेज कर दिया है।

प्रदेश में 14 फरवरी को प्रदेश की नई विधानसभा के लिए मतदान होना है। इसके लिए सभी राजनीतिक दल मैदान में कूद चुके हैं। दलों द्वारा प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जा रहे हैं। जिन्हें टिकट मिला है, उन्होंने तेजी से प्रचार शुरू कर दिया है। प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण बरती जा रही सख्ती के बीच प्रत्याशियों के सामने प्रचार को धार देने की चुनौती भी बनी हुई है। कोरोना संक्रमण के कारण आयोग ने बड़ी सभाओं के आयोजन पर रोक लगाई हुई है और बैठकों में भी संख्या सीमित रखी है। इस कारण प्रत्याशी प्रचार को गति नहीं दे पा रहे हैं। घर-घर प्रचार पर रोक तो नहीं है लेकिन संक्रमण के कारण आमजन की नाराजगी का भी भय प्रत्याशियों के मन में है। इन परिस्थितियों में राजनीति दलों के साथ ही प्रत्याशियों का पूरा फोकस इंटरनेट मीडिया की ओर हो गया है। इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप, यू टयूब व इंस्टाग्राम के जरिये मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा मोबाइल कंपनियों से संपर्क कर एसएमएस और काल के जरिये भी मतदाताओं तक संदेश पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, दलों के सामने एक बड़ी चुनौती सुदूरवर्ती क्षेत्रों में मतदाताओं तक पहुंच बनाने की भी है। दरअसल, प्रदेश के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में संचार सेवाएं बहुत अच्छी नहीं हैं। ऐसे में यहां दलों व प्रत्याशियों को खुद ही मतदाताओं तक पहुंचना पड़ेगा।

Edited By Sunil Negi

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