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दीपावली में उल्‍लू के शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग हुआ मुस्तैद

दीपावली में वन्यजीवों के शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग मुस्तैद हो गया है। प्रभागीय वनाधिकारी ने दून के विभिन्न इलाकों में चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। वन कर्मियों ने रात को गश्त बढ़ा दी है और वन सीमाओं पर पैनी नजर रखी जा रही है।

By Sunil NegiEdited By: Published: Wed, 11 Nov 2020 12:41 PM (IST)Updated: Wed, 11 Nov 2020 12:41 PM (IST)
दीपावली में उल्‍लू के शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग हुआ मुस्तैद
दीपावली के दौरान वन्यजीवों के शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग मुस्तैद हो गया है।

देहरादून, जेएनएन। दीपावली के दौरान वन्यजीवों के शिकार की आशंका को देखते हुए वन विभाग मुस्तैद हो गया है। प्रभागीय वनाधिकारी ने दून के विभिन्न इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। वन कर्मियों ने रात को गश्त बढ़ा दी है और वन सीमाओं पर पैनी नजर रखी जा रही है।

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त्योहारी सीजन में वन्यजीव तस्करी और शिकार की घटनाएं बढ़ जाती हैं। खासकर दीपावली के दौरान अंधविश्वास के चलते उल्लू का शिकार करने के मामले बढ़ जाते हैं। इसी को देखते हुए वन विभाग भी सतर्क हो गया है। प्रभागीय वनाधिकारी राजीव धीमान ने बताया कि शिकार की आशंका को देखते हुए चेकिंग बढ़ा दी गई है। साथ ही रात्रि गश्त पर भी जोर दिया जा रहा है।

इन दिनों शहर के विभिन्न इलाकों में गश्त की जा रही है। बीते मंगलवार से ही वन विभाग की विभिन्न टीमों ने प्रेमनगर, आशारोड़ी, रायपुर, टपकेश्वर आदि क्षेत्रों में चेकिंग अभियान जारी है। इसके अलावा पुराने शिकारियों पर भी नजर रखी जा रही है। वहीं, वन सीमाओं पर गश्त और चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं। बताया कि रात के अमय अक्सर शिकारी कच्चे रास्तों से वन क्षेत्रों में प्रवेश कर शिकार करते हैं।

दुलर्भ प्रजाति का ब्लैक सोल्डर काइट पकड़ा

देहरादून के रानीपोखरी में एक दुलर्भ प्रजाति की चील मिली है। ब्लैक सोल्डर काइट नाम की यह चील उत्तर भारत में बेहद कम पाई जाती है। सोमवार को वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना मिली कि रानीपोखरी स्थित एक घर में दुर्लभ पक्षी आ गया है। रेस्क्यू टीम के प्रभारी रवि जोशी अन्य सदस्यों के साथ पहुंचे। उन्होंने चील को पकड़कर दुर्गम क्षेत्र में गंगा के किनारे छोड़ दिया। रवि जोशी ने बताया कि यह चील मुख्यत: घास के मैदानों व नदी किनारे घाटियों में पाई जाती है। यह काफी घुमंतू होती हैं, लेकिन रिहायशी इलाकों की ओर नहीं जाती। यह 30 सेमी से 1.5 मीटर (1-3 फीट) तक के हो सकते हैं। ऑस्टे्रलिया में बहुतायत में पाई जाती है, लेकिन उत्तर भारत में इन्हें कम ही देखा जाता है। इन्हें कई बार अंगूर आदि के बागीचों में भी देखा जा सकता है। 

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