देहरादून में फ्लैट दिलाने के नाम पर एनआरआइ से ठगे एक करोड़ 30 लाख रुपये

देहरादून में कुछ व्यक्तियों ने फ्लैट दिलाने के नाम पर एनआरआइ से लाखों रुपये ठग लिए। इस मामले में पुलिस ने एसए बिलटैक के निदेशक सहित सात नामजद और अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है।

Publish: Sat, 22 Jan 2022 07:38 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 07:38 PM (IST)
देहरादून में फ्लैट दिलाने के नाम पर एनआरआइ से ठगे एक करोड़ 30 लाख रुपये

जागरण संवाददाता, देहरादून। अर्टिगो रेजीडेंसी में फ्लैट दिलाने के नाम पर कुछ व्यक्तियों ने एनआरआइ से लाखों रुपये (35 लाख रुपये नकद और 95 लाख रुपये बैंक की ईएमआइ के रूप में) ठग लिए। इस मामले में राजपुर थाना पुलिस ने एसए बिलटेक के निदेशक सहित सात नामजद व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बैंक के कुछ कार्मिकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिसकी जांच की जा रही है।

शिकायतकर्त्‍ता संजीव शर्मा ने 19 जनवरी को राजपुर थाने में तहरीर देकर बताया कि वह मलेशिया की आयल एंड गैस कंपनी में मैनेजर हैं। एसए बिलटैक के प्रतिनिधि गौरव आहुजा निवासी विजय पार्क एक्सटेंशन, देहरादून ने उन्हें अर्टिगो रेजीडेंसी में फ्लैट दिलाने के लिए संपर्क किया। उसने बताया कि प्रोजेक्ट आइसीआइसीआइ बैंक से अप्रुव्ड है और एमडीडीए से प्रोजेक्ट का नक्शा पास है। गौरव ने उनकी मुलाकात एसए बिलटैक के निदेशक प्रेमदत्त शर्मा, सुनीता शर्मा, आराधना शर्मा और प्रेमदत्त शर्मा के दामाद अरुण सैगन से करवाई। आरोपितों ने बताया कि फ्लैट का लोन आइसीआइसीआइ बैंक से पास करवा देंगे। जब तक फ्लैट पर कब्जा नहीं दिया जाता, तब तक एसए बिलटैक ही लोन की किश्तें अदा करता रहेगा। शिकायतकर्त्‍ता ने आरोपितों की बातों में आकर एक फ्लैट बुक करवा दिया, जिसकी कीमत दो करोड़ 18 लाख 40 हजार रुपये बताई गई। संजीव शर्मा ने बताया कि उन्होंने 15 अप्रैल से सात जून 2014 तक 35 लाख रुपये अग्रिम धनराशि के रूप में दिए। एसए बिलटैक की ओर से फ्लैट के लोन के संबंध में 19 नवंबर 2016 को आइसीआइसीआइ बैंक को पत्र लिखा गया, जिसके आधार पर बैंक की ओर से एक करोड़ 65 लाख रुपये लोन स्वीकृत कर एसए बिलटैक के खाते में ट्रांसफर कर दिए।

शिकायतकर्त्‍ता ने दिसंबर 2020 को प्रेमदत्त शर्मा व सुनीता शर्मा से फ्लैट की रजिस्ट्री करने को कहा तो वह टाल मटोल करने लगे। शक होने पर उन्होंने एमडीडीए में जाकर प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी हासिल की तो पता चला कि एमडीडीए से प्रोजेक्ट का केवल छह मंजिल तक का ही नक्शा पास है, जबकि आरोपितों की ओर से पीड़ि‍त को सातवीं मंजिल पर फ्लैट दिया गया था। जिस भूमि पर फ्लैट बनाए जा रहे हैं, उस पर भूमि के स्वामी व एसए बिलटैक के निदेशक के बीच विवाद चल रहा है और भूमि के स्वामी ने इकरारनामा निरस्त कर दिया है।

पीड़ि‍त ने बताया कि अब तक वह आरोपितों को 35 लाख रुपये नकद व 95 लाख रुपये बैंक की ईएमआइ दे चुके हैं। जब उन्होंने आरोपितों से अपनी धनराशि वापस मांगी तो उन्होंने अलग-अलग तिथियों के सात चेक दिए, जो बाउंस हो गए। उन्होंने कहा कि जब एसए बिलटैक के पास छह मंजिल तक ही फ्लैट बनाने की अनुमति थी तो बैंक अधिकारी ने कैसे सातवें मंजिल पर फ्लैट का लोन पास कर दिया। थानाध्यक्ष राजपुर मोहन सिंह ने बताया कि आरोपित प्रेमदत्त शर्मा, आराधना शर्मा, सुनीता शर्मा, अरुण सैगन चारों निवासी हिंद अपार्टमेंट द्वारिका, नई दिल्ली, गुरमीत कौर, सुनील अग्रवाल, गौरव आहुजा व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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