कल्पेश्वर मंदिर को भूला पर्यटन विभाग

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से शैव सर्किट में पंचम केदार कल्पेश्वर को शामिल न किए जाने से स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। चेतावनी दी कि यदि कल्पेश्वर मंदिर को शैव सर्किट में शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

JagranPublish: Tue, 28 Jun 2022 10:04 PM (IST)Updated: Tue, 28 Jun 2022 10:04 PM (IST)
कल्पेश्वर मंदिर को भूला पर्यटन विभाग

संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से शैव सर्किट में पंचम केदार कल्पेश्वर को शामिल न किए जाने से स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है। चेतावनी दी कि यदि कल्पेश्वर मंदिर को शैव सर्किट में शामिल नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से जारी किए जा रहे बैनर, फ्लैक्स, जानकारी प्रपत्रों में उत्तराखंड शैव सर्किट के प्राचीन मंदिर, श्रद्धा, आस्था के केंद्र में उत्तराखंड के पंच केदारों में एक प्रसिद्ध शिव मंदिर कल्पेश्वर मंदिर का नाम शामिल नहीं किया गया है। पुराणों में जिस कल्पेश्वर मंदिर का उल्लेख है और देश दुनिया के शिवभक्त जिस कल्पेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं, उसे उत्तराखंड का पर्यटन विभाग कैसे भूल गया, यह गंभीर बात है।

उर्गम घाटी के देवग्राम के ग्राम प्रधान देवेंद्र रावत का कहना है कि उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से शैव सर्किट में गढ़वाल कुमाऊं के शिव मंदिर समेत चार केदारनाथ, मध्यमेश्वर, तुंगनाथ रुद्रनाथ को जोड़ा गया है और पंचम केदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर को हटाया गया है। उनका कहना है कि एक तरफ पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज उर्गम घाटी को पर्यटन सर्किट बनाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ शैव सर्किट से पंचम केदार हटा देते हैं, जिसका हम विरोध करते हैं।

कल्पनाथ मंदिर समिति के सचिव रघुबीर नेगी ने कहा कि अपना अलग ही महत्व है, जहां प्रतिवर्ष लाखों लोग बाबा कल्पेश्वर महादेव के दर्शन करते हैं। कहा कि वह उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद एवं पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की ओर से शैव सर्किट से कल्पेश्वर महादेव मंदिर हटाने का विरोध करते हैं। चेतावनी दी कि यदि कल्पेश्वर महादेव मंदिर को शैव सर्किट में शामिल नहीं किया गया तो उर्गम घाटी में आंदोलन किया जाएगा।

Edited By Jagran

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