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कोरोना ने थाम ली एड्स के खात्मे की मुहिम

अल्मोड़ा में वैश्रि्वक महासंकट कोरोना से जंग के बीच बेशक एड्स को लोग भूल गए हैं।

By JagranEdited By: Published: Tue, 01 Dec 2020 07:19 AM (IST)Updated: Tue, 01 Dec 2020 07:19 AM (IST)
कोरोना ने थाम ली एड्स के खात्मे की मुहिम
कोरोना ने थाम ली एड्स के खात्मे की मुहिम

संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : वैश्रि्वक महासंकट कोरोना से जंग के बीच बेशक एड्स को लोग भूल गए हैं। मगर जरा सी असावधानी से चपेट में लेने वाले इस रोग का संक्रमण भी कम खोखला नहीं कर रहा। अन्य जिलों को छोड़ अल्मोड़ा का ही जिक्र करें तो यहा प्रत्येक माह एक से दो जबकि सालभर में औसतन 18 से 20 एड्स के मरीज चिह्निंत किए जा रहे हैं।

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महानगरों की तुलना में हालांकि पहाड़ में एड्स रोग कुछ कम है लेकिन नियंत्रण में भी नहीं है। यह बात और है कि संक्रमित मरीजों को अब बेहतर इलाज मिलने लगा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह मान लेना कि एड्स को हरा ही लिया जाएगा कहना मुश्किल है। जीवन के लिए खतरा बरकरार है। सूत्र कहते हैं कि अमुक व्यक्ति के रक्तदान व गर्भवती महिला के रक्त परीक्षण के दौरान एड्स का पता लग जाता है।

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जिला स्तर पर एलीजा टेस्ट की सुविधा

एड्स की जांच को अब जिला स्तर पर भी एलीजा टेस्ट की सुविधा विकसित होने से संक्रमितों का पता आसान हो गया है। वहीं जिला चिकित्सालय व अन्य संसाधनों से चपेट में आए मरीजों को समय पर दवा व अन्य उपचार भी दिया जा रहा।

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कोरोना ने थामी जनचेतना की मुहिम

अबकी कोराना संक्रमण का साया एड्स से बचाव को जनचेतना रैलियों पर पड़ा। मार्च दूसरे पखवाड़ा से लाकडाउन के बाद से अब तक अन्य वर्षो की भांति जनचेतना रैली निकालियां नहीं निकाली जा सकीं।

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आंकड़ों पर एक नजर

वर्ष रोगी

= 2013 : 30

= 2014 : 08

= 2015 : 24

= 2016 : 17

= 2017 : 21

= 2018 : 14

= 2019 : 22

= 2020 : 12 (अब तक)

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रक्तदान शिविर आज

जनचेतना के मकसद से कोरोनाकाल में विभिन्न विद्यालयों में आनलाइन पेंटिंग आदि प्रतियोगिताएं कराई गई थीं। मंगलवार को विश्व एड्स दिवस पर विजेताओं को जिला चिकित्सालय में पुरस्कृत किया जाएगा। साथ ही रक्तदान शिविर भी लगाया जाएगा।

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एड्स का इलाज तो है पर सावधानी व बचाव जरूरी है। ये मान लेना कि इलाज से बच जाएंगे, ठीक नहीं है। संक्रमित होने पर खतरा बना रहता है। लाकडाउन के दौरान दिल्ली आदि महानगरों से लौटे कुछ प्रवासियों की दवा खत्म होने पर हमने हल्द्वानी व देहरादून से मंगा घर तक पहुंचाई। जनपद में संख्या कम है लेकिन एड्स पर पूरी तरह नियंत्रण को सावधानी ही बचाव का जरिया है।

-डा. दीपांकर डेनियल, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी एवं नोडल अधिकारी एचआइवी प्रोग्राम'


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