UP Election 2022 : बागी धरती 'बलिया' में ताल ठोक रहे राजनीतिक धुरंधर, बढ़ रही सियासी तपिश

UP Vidhan Sabha Election 2022 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडेय लोकनायक जयप्रकाश नारायण और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का भी यह गृह जनपद है। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां की सात सीटों में पांच पर भाजपा ने जीत हासिल की।

Abhishek SharmaPublish: Sat, 22 Jan 2022 02:08 PM (IST)Updated: Sat, 22 Jan 2022 02:08 PM (IST)
UP Election 2022 : बागी धरती 'बलिया' में ताल ठोक रहे राजनीतिक धुरंधर, बढ़ रही सियासी तपिश

वाराणसी, जागरण संवाददाता। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के गृह जनपद बलिया में सियासी तपिश बढ़ गई है। टिकट की तस्वीर अभी धुंधली है, लेकिन सभी प्रमुख दल मतबूत दांव लगाने की तैयारी में हैं। राजनीतिक रूप से समृद्ध जनपद बगावती तेवर के लिए जाना जाता है। 1857 की क्रांति के नायक मंगल पांडेय, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र का भी यह गृह जनपद है। 2017 के विधानसभा चुनाव में यहां की सात सीटों में पांच पर भाजपा ने जीत हासिल की। सपा और बसपा के खाते में एक-एक सीट गई। कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला। इस बार हर सीट पर दिलचस्प मुकाबले के संकेत मिल रहे हैं। बलिया से लवकुश सिंह की रिपोर्ट...।

यह भी जानें

- जिले के फेफना विधायक उपेंद्र तिवारी और बलिया नगर के आनंद स्वरूप शुक्ल प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।

- बांसडीह विधानसभा क्षेत्र के विधायक पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी सदन में नेता प्रतिपक्ष हैं।

- सपा सरकार में मंत्री रहे नारद राय, अंबिका चौधरी भी इसी जिले से हैं।

बांसडीह : इस बार भी रोचक रहेगा मुकाबला

कुल वोटर : 4,03,813

क्षेत्र की विशेषताएं : तहसील मुख्यालय। हुसैनाबाद गांव में प्रदेश के जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण केंद्र निर्माणाधीन।

राजनीतिक इतिहास : कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री बच्चा पाठक 1969 के बाद सात बार विधायक रहे। सपा के पूर्व मंत्री और नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी भी यहीं से चुनाव लड़ते हैं। 2017 में कांटे की लड़ाई रही। मात्र 1,687 मतों से उनकी जीत हुई थी। चौधरी को 50,855 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहीं निर्दलीय केतकी सिंह को 49,276 और तीसरे स्थान पर रहे सुभासपा के अरविंद राजभर को 40,234 वोट मिले थे।

सामाजिक समीकरण : क्षत्रिय, यादव मतदाता बहुल क्षेत्र। पिछड़ी और राजभर समाज के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौजूदा परिदृश्य : पिछली बार सुभासपा-भाजपा साथ थीं। इस बार सपा और सुभासपा का गठबंधन है। इसलिए रोमांचक मुकाबला होने के आसार हैं।

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सिकंदरपुर : गुलाब की नगरी में कौन पड़ेगा भारी

कुल वोटर : 3,00,777

क्षेत्र की विशेषताएं : गुलाब जल, गुलाब सकरी, इत्र और फूलों की खेती के लिए प्रसिद्धि।

राजनीतिक इतिहास : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शिवमंगल सिंह 1977 व 1985 में प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। 1996 में समता के राजधारी सिंह मंत्री बने। 2012 में मो. जियाउद्दीन रिजवी को सपा सरकार में मंत्री बनने का मौका मिला। 2017 में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। भाजपा के संजय यादव को 69,536 वोट और सपा के जियाउद्दीन रिजवी को 45,988 और बसपा को राजनारायण को 34,639 वोट मिले थे।

सामाजिक समीकरण : यादव, क्षत्रिय, राजभर, ब्राह्मण मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं। यहां राजनीति जातिगत समीकरण से प्रभावित होती है।

मौजूदा परिदृश्य : भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की ओर से मजबूती से चुनावी मैदान सजाया जा रहा है। अभी किसी भी दल ने टिकट की घोषणा नहीं की है।

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रसड़ा : भाजपा व सपा दोनों की नजर

कुल वोटर : 3,54,332

क्षेत्र की विशेषताएं : चीनी मिल, गुड़ मंडी और सूफी संत रोशन शाह व श्रीनाथ बाबा का धाम।

राजनीतिक इतिहास : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र सिंह गृह राच्य मंत्री रहे। घुरा राम बसपा शासन में स्वास्थ्य राच्यमंत्री रहे। 2012 और 2017 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार उमाशंकर सिंह का ही दबदबा रहा। पिछले चुनाव में उमाशंकर को 92,272 और भाजपा से लड़े रामइकबाल को 58,385 वोट मिले थे।

सामाजिक समीकरण : अनुसूचित जाति के मतदाताओं की बहुलता है। पिछड़ी और क्षत्रिय समाज के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौजूदा परिदृश्य : भाजपा और सपा दोनों की सीट पर नजर है। ऐसे में दिलचस्प मुकाबले की तस्वीर बनती दिख रही है। बसपा अपनी सीट बचाने की जुगत में है।

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बेल्थरारोड : सुरक्षित सीट पर जातिगत समीकरण

कुल वोटर : 3,53,776

क्षेत्र की विशेषताएं : इब्राहिमपट्टी में बड़ा पावरग्रिड। पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर का गृह क्षेत्र।

राजनीतिक इतिहास : 1962 में रसड़ा विधानसभा से अलग होकर सीयर विधानसभा क्षेत्र बना। 2012 के परिसीमन में इसका नाम बेल्थरारोड हुआ। 1985 के बाद चार बार शारदानंद अंचल विधायक बने। सपा सरकार में तीन बार मंत्री रहे। 2017 में यह सीट भाजपा के खाते में चली गई। भाजपा के धनंजय कन्नौजिया को 75,504 और सपा के गोरख पासवान को 59,185 मत मिले थे।

सामाजिक समीकरण : अनुसूचित जाति का बाहुल्य। पिछड़ी और सामान्य जाति के मतदाता चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौजूदा परिदृश्य : इस सीट पर सभी प्रमुख दल समीकरण तैयार करने में जुटे हैं। उम्मीदवारों की घोषणा होने के बाद ही तस्वीर स्पष्ट होगी।

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बैरिया : छोटे लोहिया के गृह क्षेत्र में ज्‍यादा शोर

कुल वोटर : 3,62,293

क्षेत्र की विशेषताएं : गंगा-सरयू का संगम। लोकनायक जयप्रकाश नारायण और छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र, साहित्यकार केदारनाथ सिंह, बलिया के सांसद वीरेद्र सिंह मस्त का गृह क्षेत्र।

राजनीतिक इतिहास : 2002 में चुने गए भाजपा विधायक भरत सिंह मंत्री भी रहे। 2012 से पहले यह विधानसभा क्षेत्र द्वाबा के नाम से था। नए परिसीमन के बाद नाम बैरिया हो गया। 2012 में यहां सपा की जीत हुई। सपा के जयप्रकाश अंचल विधायक बने थे। 2017 में भाजपा ने जीत हासिल की। भाजपा के सुरेंद्र सिंह को 64,868 वोट, सपा के जयप्रकाश अंचल को 47,791 और बसपा के जवाहर को 27,974 वोट मिले थे।

सामाजिक समीकरण : यादव और क्षत्रिय समाज के मतदाताओं की संख्या च्यादा है। ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील रहा है।

मौजूदा परिदृश्य : विधान सभा क्षेत्र में राजनीतिक शोर च्यादा है। अभी तक किसी भी दल से टिकट की घोषणा नहीं हुई है।

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फेफना : रोमांचक रण के लिए सज रहा मैदान

कुल वोटर : 362293

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क्षेत्र की विशेषताएं : खादी आश्रम, रेलवे जंक्शन। सपा के संस्थापक सदस्य पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी का गृह क्षेत्र, भाजपा मंत्री उपेंद्र तिवारी का गृह क्षेत्र।

राजनीतिक इतिहास : भाजपा और सपा के बीच हर बार रोचक लड़ाई हुई है। सपा के पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी 1993, 1996, 2002, 2007 में विधायक रहे। 2012 में इस सीट पर भाजपा के उपेंद्र तिवारी ने कब्जा जमा लिया। 2017 में अंबिका चौधरी सपा से अनबन होने के बाद बसपा से चुनाव लड़े। दोबारा भाजपा के उपेंद्र ने उन्हें मात दी, वे मंत्री बने। उन्हें 70588 वोट, बसपा के अंबिका को 52691 और सपा के संग्राम सिंह यादव को 50016 मत मिले थे।

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सामाजिक समीकरण : पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या च्यादा है। भूमिहार, क्षत्रिय और ब्राह्मण वर्ग के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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मौजूदा परिदृष्य : भाजपा, सपा और बसपा की ओर से दमदार उम्मीदवार चुनाव की तैयारी में जुटे हैं। टिकट की घोषणा अभी नहीं हुई हैं, लेकिन लड़ाई रोमांचक स्थिति में दिख रही है।

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नगर बलिया : हर बार से अलग होगा नगर बलिया का रण

कुल वोटर : 367671

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क्षेत्र की विशेषताएं : 1857 अगस्त क्रांति के नायक मंगल पांडेय का गृह विधान सभा क्षेत्र। महर्षि भृगु का मंदिर, ददरी मेला वीर लोरिक स्टेडियम।

राजनीतिक इतिहास : सपा और भाजपा में हर बार टक्कर रही है। सपा के नारद राय 2012 में सपा से जीत कर मंत्री बने थे। 2017 में सपा से अनबन होने के बाद वह बसपा से चुनाव लड़े थे, लेकिन इस सीट पर भाजपा के आनंद स्वरूप ने कब्जा जमा लिया। उन्हें 92889 वोट मिले थे। सपा के लक्ष्मण गुप्ता को 52878 और बसपा के नारद राय को 31515 वोट मिले थे।

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सामाजिक समीकरण : विधान सभा में ब्राह्मण जाति और व्यापारी वर्ग के मतदाता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मौजूदा परिदृश्य : भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की ओर से तैयारी चल रही है। संभावित उम्मीदवार जनसंपर्क बढ़ा दिए हैं। टिकट की घोषणा का इंतजार है।

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(इनपुट : इश्तियाक अहमद, रवींद्र सिंह, रणजीत सिंह, धीरज मिश्रा व विजय मद्धेशिया)

Edited By Abhishek Sharma

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