कूड़ा निस्तारण हवा-हवाई, बजट मिला पर स्थापित नहीं करा सके प्लांट

प्लांट को गलत स्थल चयन बना विवाद की जड़ एनजीटी में भी पहुंचा मामला जहां जगह पाई उड़ेल दिया कूड़ा हर मुहल्ले की नालियों-नालों में भरा है कूड़ा

JagranPublish: Mon, 13 Dec 2021 11:35 PM (IST)Updated: Mon, 13 Dec 2021 11:35 PM (IST)
कूड़ा निस्तारण हवा-हवाई, बजट मिला पर स्थापित नहीं करा सके प्लांट

सीतापुर : नगर पालिका परिषद सीतापुर में गीला-सूखा कूड़ा निस्तारण कागजों पर है। वैसे सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने को बजट मिला लेकिन, जिम्मेदार प्लांट लगाने की शुरुआत तक नहीं कर सके हैं। शहर से रोजाना कई ट्रक कूड़ा निकलता है। कहने को गीला-सूखा कूड़ा अलग एकत्र हो रहा है। ट्रीटमेंट कर निस्तारण भी हो रहा है, जबकि हकीकत ये है कि पालिका के पास कूड़ा निस्तारण के कोई इंतजाम ही नहीं हैं। टेड़वा चिलौला में मदर्स प्राइड स्कूल के पड़ोस और कोतवाली देहात के पीछे खुले में डाले जा रहे कूड़े की दुर्गंध से हर कोई परेशान है। बच्चे और अभिभावक भी डीएम से गुहार लगा चुके हैं। स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई तो स्कूल प्रबंधक ने 2018 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में नगर पालिका के विरुद्ध मुकदमा किया था। मदर्स प्राइड स्कूल के प्रबंधक कुणाल आनंद ने पिछले महीने निदेशक स्वच्छ भारत मिशन से शिकायत की है।

टेड़वा चिलौला में कूड़ा निस्तारण की ईओ ने बताई विधि

अधिशासी अधिकारी वैभव त्रिपाठी का कहना है कि बायो कल्चर सेल्यूशन खरीद रहे हैं। कूड़े में इसके प्रयोग से दुर्गंध कंट्रोल होगी। कूड़ा निस्तारण टेड़वा चिलौला में हो रहा है। कूड़े के ढेर पर जेसीबी को बार-बार घुमाकर बड़ा कचरा ऊपर आ जाता है और कंपोस्ट वाला कूड़ा नीचे जमीन में दब जाता है। हालांकि टेड़वा चिलौला में अभी विधिवत निस्तारण नहीं हो रहा है। वैसे शहर में डोर-टू-डोर गीला-सूखा अलग कूड़ा एकत्र कर उसे कोट चौराहे के पास एमआरएफ सेंटर पर ले जाया जा रहा है, वहीं निस्तारण होता है।

दो साल पहले मिले थे तीन करोड़ रुपये

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के जिला समन्वयक संजीत यादव का कहना है कि गीला कूड़ा निस्तारण को टेड़वा चिलौला में प्लांट लगना था लेकिन, उस स्वीकृत स्थल पर कार्यदायी संस्था जल निगम (सीएंडडीसी) ने प्लांट लगाने से मना कर दिया है। इसलिए फाइल दोबारा डीएम को भेज रहे हैं। सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने को 1.2 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इस प्लांट स्थापना के लिए नगर पालिका को डेढ़-दो साल पहले तीन करोड़ रुपये मिले थे लेकिन, नियम-निर्देश नहीं मिले थे। अब छह महीने पहले गाइड लाइन आई है। हर रोज करीब 70 टन कूड़ा निस्तारण क्षमता वाला प्लांट लगना है।

Edited By Jagran

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