बस के लिए जनता की दौड़, बोर्ड के आगे न बढ़ा 'स्टेशन'

कई दशक से पिसावां में बस स्टेशन के लिए खाली पड़ी जमीन यात्री सुविधाओं का अभाव सड़क पर खड़े होकर वाहनों का इंतजार करते यात्री।

JagranPublish: Fri, 28 Jan 2022 11:05 PM (IST)Updated: Fri, 28 Jan 2022 11:05 PM (IST)
बस के लिए जनता की दौड़, बोर्ड के आगे न बढ़ा 'स्टेशन'

अखिलेश सिंह, पिसावां (सीतापुर) :

पिसावां चौराहे के पास गोपामऊ मार्ग पर कई दशक से परिवहन निगम के बस स्टेशन निर्माण के लिए जमीन खाली पड़ी है। इस जमीन पर स्टेशन निर्माण शुरू नहीं हो सका। लोग आज भी बस स्टेशन बनने की राह देख रहे हैं। यहां यात्री सुविधाओं का अभाव है। आज तक एक अदद यात्री प्रतीक्षालय तक का निर्माण नहीं हो सका।

हरदोई, सीतापुर, मिश्रिख, लखनऊ के लिए बसें यहां से निकलती हैं। विभिन्न स्थानों के लिए यात्री यहां से वाहनों पर सवार होते हैं। बस स्टेशन व यात्री प्रतीक्षालय के अभाव में यात्री सड़क पर खड़े होकर वाहनों का इंतजार करते नजर आते हैं। यात्रियों के बैठने से लेकर प्रसाधन तक की सुविधाएं मिल पाना तो दूर की बात है। बुजुर्ग, महिला यात्रियों व बच्चों को काफी दिक्कतें होती हैं। दो वर्ष पहले बस स्टेशन की जमीन पर खंभे व कटीले तार लगाए गए थे। तब लोगों में उम्मीद जगी थी कि शायद बस स्टेशन का निर्माण शुरू होने वाला है, लेकिन तार व खंभे लगाकर काम छोड़ दिया गया। जमीन के पास ही परिवहन निगम ने बस स्टेशन का बोर्ड भी लगा रखा है। बस स्टेशन निर्माण की पहल आगे नहीं बढ़ सकी। रोडवेज बसें यहां रुकने का कोई निश्चित स्थान नहीं है।

बस स्टेशन के लिए आवंटित हुई थी 12 बीघा जमीन

पिसावां ग्राम पंचायत ने 1970 के आस पास 12 बीघा जमीन परिवहन निगम को आवंटित की थी। इस जमीन पर बस स्टेशन का निर्माण होना था। लोगों को उम्मीद थी कि बस स्टेशन निर्माण से बसों की संख्या बढ़ेगी, यात्रियों के लिए भी सुविधाएं विकसित होंगी, लेकिन यह जमीन 50 वर्ष से वीरान पड़ी है। दो वर्ष पूर्व परिवहन निगम ने तार व खंभे लगाकर छोड़ दिया।

परिवहन निगम ने नहीं दिखाई गंभीरता

तत्कालीन प्रधान सुरेंद्र सिंह ने यात्रियों के लिए पंचों के साथ बैठक कर जमीन का प्रस्ताव तैयार किया था। प्रस्ताव बनाकर जमीन परिवहन निगम के पक्ष में बस स्टेशन के लिए आवंटित की गई थी। सुरेंद्र सिंह के बाद प्रधान बने रघुवीर सिंह ने भी बस स्टेशन निर्माण के लिए प्रयास किए। परिवहन निगम ने निर्माण के लिए गंभीरता नहीं दिखाई।

यात्रियों को होती दिक्कतें

विभिन्न स्थानों के लिए यात्री पिसावां से वाहनों पर सवार होते हैं। आस पास दर्जनों गांवों के लोगों का केंद्र पिसावां ही है। धूप, गर्मी, बारिश व सर्दी में यात्री सड़क पर ही खड़े नजर आते हैं। बारिश होने पर लोग भागकर होटल व चाय की दुकानों में शरण लेते हैं। बुजुर्ग, महिला व बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यात्रियों की इस समस्या को परिवहन निगम ने कभी गंभीरता से नहीं लिया। कई स्थानों के लिए संचालित हैं बसें

एक बस लखनऊ से सिधौली, मिश्रिख होकर पिसावां होते हुए दिल्ली जाती है। यह दिल्ली से होकर पुन: इसी रास्ते लखनऊ जाती है। एक बस दिल्ली से शाहाबाद, पिहानी, पिसावां होकर नैमिषारण्य होते हुए औरंगाबाद तक चलती है। इसी मार्ग से यह दिल्ली वापस जाती है। सीतापुर से पिसावां होकर हरदोई के लिए पहले आठ रोडवेज बसें संचालित थीं। इस समय इन बसों का संचालन बंद चल रहा है। एक बस प्रतिदिन सेजखुर्द से पिसावां होकर सीतापुर सुबह जाती है। यही बस शाम को वापस लौटती हैं।

चित्र-28एसआइटी03-

बस स्टेशन निर्माण के लिए जनहित में जमीन परिवहन निगम को दी गई थी। आज तक निर्माण नहीं हो सका। जबकि जमीन देने का मकसद यात्रियों का हित था। खेद है निगम ने जनहित में निर्माण नहीं किया।

अतुल सिंह, पिसावां चित्र-28एसआइटी04-

बस स्टेशन न होने से यात्रियों को बहुत दिक्कतें होती हैं। बारिश में वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। प्रसाधन आदि की सुविधा नहीं है। यात्रियों की इस समस्या का निदान किया जाना चाहिए।

कौशल कुमार, सेरवाडीह चित्र-28एसआइटी05-

कुछ रूट की बसों का संचालन कोविड के कारण बंद कर दिया गया था। यह बसें संचालित की जाए तो बेहतर होगा। बस स्टेशन का निर्माण जल्दी कराया जाए, ताकि यात्रियों को राहत मिले।

राजेश, दौलतियापुर चित्र-28एसआइटी06-

बस स्टेशन का निर्माण बीच में शुरू होने की बात उठी थी। लेकिन तार व खंभे लगाकर काम बंद कर दिया। जमीन बस स्टेशन के लिए दी गई है तो यात्री हित में इसका निर्माण कराया जाना चाहिए।

रामबहादुर, पिसावां

Edited By Jagran

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