नहीं चल सकी कमलापुर चीनी मिल, बकाया भी अटका

बकाया गन्ना मूल्य पाने को किसानों ने लगाई दौड़ लेकिन नतीजा शून्य ही रहा जनप्रतिनिधि भी नहीं दे पाए राहत।

JagranPublish: Sun, 23 Jan 2022 11:43 PM (IST)Updated: Sun, 23 Jan 2022 11:43 PM (IST)
नहीं चल सकी कमलापुर चीनी मिल, बकाया भी अटका

सीतापुर : बकाया गन्ना मूल्य के लिए लंबी दौड़ लगाने के बाद कमलापुर क्षेत्र के किसान थक चुके हैं। अब तो वह उम्मीद भी छोड़ चुके हैं। कमलापुर चीनी मिल ने क्षेत्र के कई हजार किसानों का गन्ना मूल्य अब तक नहीं दिया है। इस चीनी मिल ने किसानों को आर्थिक रूप से तगड़ी चोट दे रखी है। फरवरी 2009 में चीनी मिल बंद हो गई। गन्ना किसानों के जख्म पर हमारे जनप्रतिनिधि भी राहत का मरहम नहीं लगा पाए हैं। जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) संजय सिसौदिया खुद कहते हैं कि इस चीनी मिल पर किसी-किसी किसान का तीन-तीन लाख रुपये से भी ज्यादा गन्ना मूल्य बकाया है। किसानों को बकाया गन्ना मूल्य दिलाने को सरकारी स्तर पर काफी प्रयास हुए हैं। लेकिन, अब तक कामयाबी नहीं मिली है।

कोर्ट ने गन्ना समिति को सिक्योर्ड क्रेडिटर नहीं माना :

डीसीओ संजय सिसोदिया के मुताबिक कोलकाता हाईकोर्ट में हमारी समिति को सिक्योर्ड क्रेडिटर (सुरक्षित लेनदार) नहीं माना। वैसे हमने हाईकोर्ट में पक्ष रखा कि पहले विभागीय व किसानों की देनदारी चुकता की जाए लेकिन, कोर्ट ने निर्णय दिया कि चीनी मिल को लोन देने वाला देना बैंक सिक्योर्ड क्रेडिटर है। इसलिए चीनी मिल की नीलामी में जो पैसा मिला वह कोर्ट ने देना बैंक को दिलाया।

अब एनओसी पर टिकी उम्मीद :

डीसीओ को उम्मीद है कि अब चीनी मिल के जो नए मालिक मेसर्स आरएन इंफ्राकान आएंगे। हो सकता है वह देनदारी अदा करें। मिल प्रबंधन यदि विभाग से कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगता है तो हम ये दस्तावेज तभी देंगे जब बकाया चुकता हो जाएगा।

ये भी जानें

- बंद चीनी मिल पर बकाया गन्ना मूल्य व अंशदान के ब्याज सहित भुगतान के संबंध में गन्ना विभाग ने कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।

- दाखिल याचिका में 30 जून 2016 तक चीनी मिल पर बाकी देनदारी का विवरण गन्ना विभाग ने कोर्ट में प्रस्तुत कर रखा है।

- कोलकाता हाईकोर्ट ने देना बैंक के पक्ष में निर्णय दिया था। इसके विरुद्ध उप्र सरकार ने हाईकोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका प्रस्तुत की थी।

- कोर्ट ने 11 जनवरी 2018 को सरकार की अर्जी खारिज कर देना बैंक के पक्ष में दिए अपने पूर्व के निर्णय को बरकरार रखा था।

- चीनी मिल के पास पेराई लाइसेंस के लिए वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय से जारी आइईएम का प्रमाण पत्र व अन्य विभागों से संबंधित अनापत्तियां-औपचारिकताएं भी पूरी नहीं हैं।

कमलापुर चीनी मिल पर बकाया देनदारी :

वित्तीय वर्ष - गन्ना मूल्य - अंशदान बैंक समेत कुल

2006-07 - 169.57 - 429.25

2007-08 - 1144.89 - 2244.17

2008-09 - 81.46 - 191.39

कुल - 1395.92 - 2864.81

नोट-उक्त बकाएदारी लाख रुपये में है।

टूट रही बकाया भुगतान की उम्मीद :

कमलापुर के नरेश दीक्षित ने बताया कि मेरा लगभग दो लाख रुपये मैग्ना शुगर मिल कमलापुर पर बकाया है। मिल बंद होने के बाद भुगतान पाने को काफी प्रयास किया, अब तो बकाया मिलने की उम्मीदें टूटने लगी हैं। इस मामले में जन प्रतिनिधि भी खामोश हैं।

बेहड़ा के कबीर खां ने बताया कि कमलापुर मिल पर मेरा करीब डेढ़ लाख रुपये गन्ना भुगतान बाकी है। मिल बंद होने के बाद भुगतान फंसा है। सरकार किसानों का बकाया भुगतान कराने में रुचि लेती तो आज हमारे से कई किसानों का भला हो जाता।

बैकुंठपुर के सुरेश कुमार ने बताया कि कमलापुर चीनी मिल बंद होने से लगभग एक लाख रुपये का भुगतान फंसा है। गन्ना विभाग, जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक गुहार लगाई, मगर बकाया पैसा नहीं मिल सका है। नेता इस मामले पर कोशिश भी नहीं करते।

बैकुंठपुर के अरविद तिवारी ने बताया कि हम छोटे काश्तकारों के लिए एक-एक पाई मायने रखती है। चीनी मिल पर लगभग 25 हजार रुपया बाकी है। कई सरकारें बदलीं, हर बार बंद चीनी मिल चलवाने और बकाया भुगतान का वादा हुआ लेकिन, नतीजा शून्य है।

Edited By Jagran

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