अधर में सेटेलाइट बस अड्डे की उम्मीदें

25 लाख रुपये सेटेलाइट बस अड्डा के लिए चाहिए। 1960 से रेलवे की जमीन पर संचालित है रोडवेज बस अड्डा। सेटेलाइट बस अड्डा निर्माण के लिए 24 अप्रैल 2021 को क्षेत्र प्रबंधक ने मुख्यालय भेजी थी फाइल पैरवी नहीं होने से अधर में लटकी।

JagranPublish: Mon, 17 Jan 2022 12:13 AM (IST)Updated: Mon, 17 Jan 2022 12:13 AM (IST)
अधर में सेटेलाइट बस अड्डे की उम्मीदें

सीतापुर : हमारे जनप्रतिनिधि शहर को जाम के झाम से मुक्ति नहीं दिला पाए हैं और अब विधायकी का चुनाव फिर आ गया है। वैसे स्थानीय स्तर पर परिवहन निगम के अधिकारियों ने अपना काम किया। लेकिन, जनप्रतिनिधियों की भूमिका शून्य रही। यातायात जाम होने में रोडवेज बस अड्डा और चौराहे पर रेलवे क्रासिंग का भी बड़ा योगदान है। हर कोई चाहता है, उसे जाम की दिक्कतों से न जूझना पड़े। दुख तब होता है जब एंबुलेंस जाम में फंस जाती है, जो कि जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए हूटर बजाकर जगह मांगती है। लेकिन, आगे खड़े वाहन खुद जाम में उलझे होते हैं। कुछ समय पहले डीएम विशाल भारद्वाज भी जाम में फंसे तो उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया था। बहरहाल, रेलवे की छह बीघा जमीन पर वर्ष 1960 से रोडवेज बस अड्डा संचालित हो रहा है।

गल्ला व्यापारी हनुमान प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि विकास कार्य की ओर ध्यान देने वाला कोई नेता ही नहीं है। सभी राजनीति को व्यापार मानकर वोट लेते हैं। चुनाव जीतने के बाद जनता की समस्या से उनका मतलब नहीं रहता है। बीच शहर में रोडवेज बस अड्डा है, यहां पर जाम लगने पर रोगी एंबुलेंस में तड़प रहा होता है।

व्यापारी सत्य नारायण ने बताया कि हम चाहते हैं कि लोकल बसें इसी पुराने रोडवेज बस अड्डे से संचालित हों और लंबे रूट वाली बसों के लिए बाईपास पर सेटेलाइट बस अड्डा बने। इससे लोकल में जाम की दिक्कत कम हो सकती है। साथ ही दो बटालियन चौराहे के सामने रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज बन जाए। इससे बच्चे समय से स्कूल पहुंच सकेंगे। मार्ग पर आवागमन भी आसान होगा।

सुभाष नगर के अवनीश मौर्य ने बताया कि रोडवेज बस अड्डा दो बटालियन पीएसी चौराहे पर है, जहां से लखीमपुर मार्ग है। चौराहे के पास रेलवे क्रासिग है। क्रासिग बंद होने पर जाम के प्रभाव में चौराहे का यातायात प्रभावित होता है। बस अड्डा के पास वाहनों की भीड़ लगती है। क्रासिग खुलने पर भी चौराहे से पुलिस लाइन तिराहे तक पहुंचने में आधे घंटे से भी अधिक समय लगता है।

कार ड्राइवर इलियास ने बताया कि रोडवेज बस अड्डा शहर के बीच में होने से यहां की जाम में अधिकारी भी फंसते हैं। कुछ महीने पहले डीएम भी इसी जाम के झाम में फंस गए थे। जन प्रतिनिधियों को चाहिए रोडवेज बस अड्डा को शहर से बाहर कराएं। पहले सेटेलाइट बस अड्डे की बात उठी थी। बाईपास पर जमीन भी मिली थी, फिर पता नहीं क्या हुआ, नेता या फिर अधिकारी जानें।

जनप्रतिनिधि पैरवी करते तो बनती बात..

सीतापुर में सेटेलाइट बस अड्डा बनाने के संबंध में प्रबंधक हरदोई परिक्षेत्र ने अधिशासी अभियंता-पूर्वी (परिवहन निगम उप्र) को पत्रावली 24 अप्रैल 2021 को भेजी थी। भूमि अधिग्रहण को 25 लाख रुपये उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। सुनवाई नहीं होने पर क्षेत्र प्रबंधक ने फिर अभियंता को 21 अगस्त 2021 को पत्र लिखा था। इसमें भूमि अधिग्रहण के संबंध में अभियंता से तत्काल कार्रवाई का अनुरोध भी किया था। लेकिन, कार्रवाई शून्य ही है।

Edited By Jagran

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