कुपोषित पशुओं में होता है ठंड का असर अधिक

जोगिया ब्लाक के ककरही गांव में गुरुवार को पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। महिला पशुपालकों को दुधारू के स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी दी गई। ठंड से बचाव के उपाय बताया। पशुओं के स्वास्थ्य की जांच की। आवश्यकता के अनुसार निश्शुल्क दवा वितरित की गई।

JagranPublish: Thu, 20 Jan 2022 10:39 PM (IST)Updated: Thu, 20 Jan 2022 10:39 PM (IST)
कुपोषित पशुओं में होता है ठंड का असर अधिक

सिद्धार्थनगर : जोगिया ब्लाक के ककरही गांव में गुरुवार को पशु स्वास्थ्य शिविर का आयोजन हुआ। महिला पशुपालकों को दुधारू के स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी दी गई। ठंड से बचाव के उपाय बताया। पशुओं के स्वास्थ्य की जांच की। आवश्यकता के अनुसार निश्शुल्क दवा वितरित की गई।

जोगिया के पशु चिकित्साधिकारी डा. बलराम चौरसिया ने कहा कुपोषित पशुओं में ठंड का असर अधिक होता है। इस समय न्यूनतम तापमान घटकर आठ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पशुओं के शरीर का नियत तापमान 38 डिग्री सेल्सियस होता है। ठंडक में शरीर मे मौजूद ऊर्जा का बड़ा भाग सर्दी के दुष्प्रभाव से बचाव में नष्ट हो जाता है। इससे ऊर्जा की कमी हो जाती है। पौष्टिक आहार की कमी से पशु ठंड की चपेट में आ जाते हैं। जिसका परिणाम यह होता है कि शरीर का तापमान अनियंत्रित होकर वातावरण के साथ घट जाता है। सामान्य से बहुत कम तापमान होने की स्थिति में जैविक क्रिया शिथिल बहुत शिथिल हो जाती है। ठंड से प्रभावित पशु की दिल की गति रूकने से मौत भी हो सकती है। ठंड से बचाव के लिए पशु को पौष्टिक आहार के साथ साफ व ताजा पानी पिलाएं। इन्हें बंद स्थान पर रखे। फर्श पर सूखी पत्ती या पुआल बिछाएं। गर्म कपड़ा या बोरा डालें। पशुओं के पास आग जलाने की व्यवस्था करें। गायत्री, रीना, माधुरी, अनीता, मीरा, जुगुरी आदि मौजूद रहे। सुअरों की धमाचौकड़ी से बर्बाद हो रही सब्जी की खेती

सिद्धार्थनगर : नगर से सटे पांच से छह गांवों में पालतु व जंगली सुअरों का आतंक मचा हुआ है। इन गांवों के खेतों में कई परिवार सब्जी की खेती कर अपना भरण पोषण करते रहे हैं पर सुअरों की धमाचौकड़ी से उनकी रोजी पर संकट छा गया है। परेशान किसान इससे निजात के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहा है। रामगढ के किसान राजेश यादव, आजादनगर के किसान शिवकुमार, राप्ती नगर के गंगाराम, सियरापार के अभय कुमार तिवारी, पुरबौली के शेषनाथ आदि किसानों ने बताया कि नगर से करीब सात गांवों के सौ से अधिक किसानों का हस्ताक्षरयुक्त शिकायती पत्र बीते 11 सितंबर को थाना समाधान दिवस, सात अक्टूबर को नगर पालिका ईओ व 20 अक्टूबर को एसडीएम बांसी को दिया गया। पर न तो सुअर पालकों को बुलाकर हिदायत दी गई और न हीं उन्हें पकड़वाने का ही कोई इंतजाम किया गया। परेशान किसानों का कहना था कि सब्जी की खेती से परिवार का भरण पोषण सहित कई घरेलू कार्य संपन्न होते थे पर अब इनकी वजह से वह भी छिन गया। अब तो खेत बेंच देने की नौबत आ गई है।

कोतवाल संजय कुमार मिश्र ने कहा कि मैं जबसे आया तब से इस तरह का कोई शिकायती पत्र हमें प्राप्त नहीं हुआ। किसान यदि शिकायत पत्र देंगे तो अवश्य सुअर पालकों को इन्हें बांध कर रखने की हिदायत व चेतावनी दी जाएगी।

Edited By Jagran

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