श्रीमद्भागवत कथा सुनने से आत्मा का परमात्मा से होता है मिलन

वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पंडित सुंदर कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने श्रीमद् भागवत की अमर कथा व सुखदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से सुनाया।

JagranPublish: Fri, 21 Jan 2022 11:02 PM (IST)Updated: Fri, 21 Jan 2022 11:02 PM (IST)
श्रीमद्भागवत कथा सुनने से आत्मा का परमात्मा से होता है मिलन

संतकबीर नगर : धनघटा तहसील क्षेत्र के महुली कस्बा में चल रहे नौ दिवसीय संगीतमयी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन शुक्रवार को राधे-राधे नाम से पूरा पंडाल गूंजता रहा। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पंडित सुंदर कृष्ण शास्त्री जी महाराज ने श्रीमद् भागवत की अमर कथा व सुखदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से सुनाया।

कथा व्यास ने कहा कि राजा परीक्षित की मृत्यु सातवें दिन सर्प दंश से होनी थी। जिस व्यक्ति को यह पता चल जाए कि उसकी मृत्यु सातवें दिन होगी, वह क्या करेगा, क्या सोचेगा। राजा परीक्षित यह जानकर अपना महल छोड़ दिए। श्रीकृष्ण की ओर से राजा परीक्षित को दिए गए श्राप से मुक्ति के लिए उन्हें भाई सुखदेव से मिलने की कथा सुनाई। कहा कि भागवत कथा का श्रवण आत्मा का परमात्मा से मिलन करवाता है। सुखदेव मुनि ने राजा परीक्षित से कहा कि सब को सात दिन में ही मरना है। इस सृष्टि में आठवां दिन तो अलग से बना नहीं है। संसार में जितने भी प्राणी हैं। सभी परिचित हैं, सब की मृत्यु एक न एक दिन तो होनी है। जो मनुष्य एक बार श्रीमद् भागवत कथा श्रवण कर लें और उसे सुनकर जीवन में उतार लें तो उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। उसे भगवान की प्राप्ति हो जाती है। ज्ञान के बिना जीवन में अंधेरा है और आचरण के बिना जीवन की पवित्रता नहीं है। चेतना के विकास के लिए ज्ञान के साथ-साथ अच्छा आचरण होना जरूरी है। इस अवसर पर कुसुम देवी, योगेन्द्र मिश्र, गोबिद, नरसिंह, प्रसिद्ध, पुरूषोत्तम, श्रवण, सौरभ, सूरज, आकाश, अंशुमान, चन्द्रदेव मिश्र, झिनकू मिश्र, मनीश, ज्ञानेंद्र, ओम प्रकाश, मुन्नी लाल, शिवमंगल, विपुल, विशाल, कमलेश शुक्ल, सर्वेश, राहुल आदि उपस्थित रहे।

Edited By Jagran

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