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कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी रखें फेफड़ों का ख्याल, इस तरह प्रभावित कर रहा है वायरस

Take Care Of Lungs फेफड़ों के अलावा दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है कोरोना वायरस। सीएमओ संजीव मांगलिक का कहना है कि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी फेफड़े लिवर हदय रोग आदि बीमारियों के भी लोग शिकार हो रहे हैं।

Taruna TayalSat, 05 Jun 2021 09:59 PM (IST)
कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी रखें फेफड़ों का ख्याल, इस तरह प्रभावित कर रहा है वायरस

सहारनपुर, जेएनएन। कोरोना को भले ही आप मात दे रहे हो, लेकिन निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी लापरवाही नही करनी है, क्योंकि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी फेफड़े, लिवर, हदय रोग आदि बीमारियों के भी लोग शिकार हो रहे हैं।

हालांकि सहारनपुर के जिला अस्पताल में पोस्ट कोविड मरीजों की संख्या अधिक नहीं है। इक्का दुक्का आते हैं तो उन्हें उपचार देकर घर वापस भेज दिया जाता है। सीएमओ डा. संजीव मांगलिक का कहना है कि निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी वायरस ब्रेन और तंत्रिका को भी प्रभावत करता है। जिससे नसों में सुन्नपन, अवसाद, भूलने की बीमारी आदि भी हो सकती है। इसलिए कोरोना को हराने वाले मरीजों को अधिक ध्यान देने की जरूरत है। पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिलने पर हो सकता है बड़ा नुकसानकोविड संक्रमण के दौरान कुछ बड़ी संख्या में मरीजों को आक्सीजन की जरूरत पड़ी।

सीएमओ डा. संजीव मांगलिक का कहना है कि आक्सीजन की कमी के कारण मष्तिष्क पर गहरा दुष्प्रभाव पड़ता है। इस स्थिति को हाईपोक्सिक ब्रेन इंजरी कहा जाता है। इसके मरीज की रिकवरी में काफी परेशानी होती है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण के बाद सिरदर्द, लकवा, मिर्गी होने की भी संभावना बढ़ जाती है। ठीक से नींद न आना भी हो सकता है। पोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम में है निदानपोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम में मरीज के लक्षणों का सही निदान एवं उपचार बताया गया है।

सीएमओ डा. संजीव मांगलिक का कहना है कि फिजियोथैरेपी से भी मरीज का निदान किया जा सकता है। जो लोग कोरोना की चपेट में आए है। उन्हें पोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम की और भी जरूरत है। बच्चों के वार्ड की पूरी है तैयारी कहा जा रहा है कि देश में तीसरी लहर के दौरान यह वायरस बच्चों पर बड़ा असर डालने वाला है। इसलिए जिला अस्पताल सहारनपुर के सीएमओ ने बच्चा वार्ड को लेकर पूरी तैयारी कर ली है। उन्होंने बताया कि 50 मरीजों के बेड की व्यवस्था जिला अस्पताल में की गई है। इसके अलावा 100 बेड की व्यवस्था मेडिकल कालेज पिलखनी में की गई है। बच्चों के स्पेशलिस्ट की मांग बढ़ सकती है। 

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