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मेरठ: घर में सो रही दो बहनों को सांप ने डसा, झाड़ फूंक में लगे रहे स्‍वजन, दोनों की मौत

मेरठ के आलमगीरपुर बढ़ला-8 का मामला घर में सो रही दो बहनों को सांप ने डसा। झांडफ़ूंक में लगे रहे स्वजन। एक ने मौके पर दूसरी ने इलाज को ले जाते समय तोड़ा दम। जन प्रतिनिधि पहुंचे मुआवजे की मांग।

Taruna TayalWed, 01 Sep 2021 09:28 PM (IST)
मेरठ: घर में सो रही दो बहनों को सांप ने डसा, झाड़ फूंक में लगे रहे स्‍वजन, दोनों की मौत

मेरठ, जेएनएन। गांव आलमगीरपुर बढ़ला-8 निवासी आरिफ मजदूरी करता है। मंगलवार रात उनकी बेटी दस वर्षीय इकरा और आठ वर्ष की आलिया एक चारपाई पर सो रही थीं। दूसरी चारपाई पर उनकी पत्नी रिहाना और अन्य बच्चे सोए हुए थे।

रात करीब दो बजे सांप ने इकरा की गर्दन व आलिया के हाथ में डस लिया। आरिफ दोनों बच्चियों को ग्राम प्रधानपति पपीत चौधरी की मदद से परीक्षितगढ़ में निजी डाक्टर के पास ले गए, जहां आलिया को मृत घोषित कर दिया। डाक्टरों के इलाज से मना करने पर स्वजन इकरा को गंभीर हालत में पहले गांव गेसूपुर और फिर भगवानपुर में सपेरों के पास ले गए। उन्होंने दवा दी लेकिन उसका शरीर नीला हो गया। इसके बाद उसे किसी झाड़ फंूक करने वाले के पास मवाना ले जाने लगे लेकिन रास्ते में उसकी भी मौत हो गई। स्वजन ने बिना पोस्टमार्टम कराए दोनों को गांव में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया। गांव और घर में शोक पसरा है।

बच सकती थी इकरा की जान

सांप के डसने के बाद स्वजन ने सपेरों से इलाज के फेर में इकरा के इलाज में देरी कर दी। उसने भी 12 घंटे बाद दम तोड़ दिया। मां ने बताया इकरा ने ही उसे सोते हुए उठाया और सर्पदंश की जानकारी दी।

जन प्रतिनिधि पहुंचे, मुआवजे की मांग

पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, सपा नेता वितुल त्यागी, ग्राम प्रधान पति पपीत चौधरी समेत अन्य जनप्रतिनिधि घर पर पहुंचे। लोगों ने पीडि़त स्वजन के लिए मुआवजे की मांग की। राजस्व निरीक्षक सुशील शर्मा ने भी घर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।

झाड़ फूंक नहीं है सर्पदंश का इलाज

सीएचसी मवाना के प्रभारी डा. सतीश भाष्कर का कहना है कि आज भी लोग सर्पदंश के मामलों में सपेरों व झाड़ फूंक में विश्वास करते हैैं। एलोपैथी में इसका सटीक इलाज है।

ये सावधानी बरतें

-सर्पदंश वाले स्थान के आसपास कपड़े से बंध लगा दें। नश्तर भी लगा दें।

-खून निकले तो घबराएं नहीं, खून को बहने दें।

-तत्काल मरीज को डाक्टर के पास ले जाकर प्राथमिक उपचार दिलाएं।

-झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें।

-सर्पदंश के मामलों में ज्यादातर मौतें दशहत में भी होती हैं। घबराना नहीं चाहिए।  

Edited By: Taruna Tayal

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