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बात पते की : बताइए, कौन लापरवाह कौन जिम्मेदार, ऐसे तो शहर में बढ़ेगा ही कोरोना Meerut News

यह बेहद ही खतरनाक संकेत हैं मेरठ में कोरोना अपनी गति बढ़ा रहा है। सरकारी अमला इसके लिए आम जनता को लापरवाह बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है लेकिन लखनऊ से आई खास अफसरों की टीम की जांच में सरकारी लापरवाही मिली।

By Prem BhattEdited By: Published: Tue, 29 Sep 2020 01:30 PM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2020 01:30 PM (IST)
बात पते की : बताइए, कौन लापरवाह कौन जिम्मेदार, ऐसे तो शहर में बढ़ेगा ही कोरोना Meerut News
हर स्‍तर पर लापरवाही को दूर करके ही कोरोना पर काबू पाया जा सकता है।

मेरठ, [अनुज शर्मा]। Special Column मेरठ में कोरोना गति पर है। सरकारी अमला इसके लिए आम जनता को लापरवाह बताकर अपना पल्ला झाड़ रहा है, लेकिन लखनऊ से आई खास अफसरों की टीम की जांच में सरकारी लापरवाही मिली। संक्रमण रोकने के लिए जो काम तेजी से होने चाहिए, वे सुस्त हैं। संक्रमित लोगों के संपर्कों की खोज, इनमें से संदिग्धों की तत्काल जांच और संक्रमितों के होम आइसोलेशन के आवेदन पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा किया नहीं जा रहा है। होम आइसोलेशन में रहने वाले मरीजों की खबर भी कोई नहीं ले रहा है। यह सारी जिम्मेदारी छोटे अफसरों की है। वरिष्ठ अफसर बैठक और दौरे में व्यस्त रहते हैं। आखिर लापरवाही के इन हालात में कोरोना क्यों न बढ़े। नोडल अधिकारी को इसके लिए अल्टीमेटम देना पड़ा। इन हालात में कोरोना मरीज और जनता का भगवान ही मालिक है। देखते हैं, अब क्या होता है।

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चर्चा में हैं पुराने साहब

पुराने डीएम साहब आजकल खूब चर्चाओं में हैं। साहब ढाई साल से ज्यादा जिले में रहे। जब तक रहे, पूरे रौब के साथ। हालांकि उन्होंने कभी सत्ताधारी विधायक, सांसद, मंत्री और पार्टी पदाधिकारियों से नहीं बिगाड़ी, लेकिन कई बार उनकी बात मानी भी नहीं। परिणामत: नाराजगी पैदा होना स्वाभाविक था, लेकिन उनमें से कोई भी साहब का कुछ बिगाड़ नहीं पाया। तभी तो साहब के नजदीकी दावा करते थे कि साहब का कनेक्शन बहुत ऊपर तक है। सरकार में भी उनकी गहरी पैठ है। वे जब तक चाहेंगे, मेरठ में ही रहेंगे। हुआ भी वैसा ही, लेकिन तबादला होते ही साहब चर्चाओं में हैं। उनपर जाते जाते सरकारी जमीनों के संबंध में आदेश करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप तो जांच का विषय है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन आरोपों की जांच का आदेश भी तो कोई नहीं दे रहा है।

घर के नीचे दौड़ेगी रेल

जनता को रेल के रास्ते झट से दिल्ली पहुंचाने की सुविधा देने की तैयारी जोरों पर है, लेकिन इसके लिए लोगों को अपनी शांति और रात की नींद कुर्बान करनी पड़ सकती है। वर्ष 2025 में दिल्ली तक रैपिड रेल चलाने का सरकार का वादा है। इसका काम तेजी से चल भी रहा है। अभी तक शहर के बाहर काम होता दिखाई दे रहा था, लेकिन अब शहर के भीतर भी काम का झाम दिखने लगा है। शहर के बीच से रैपिड रेल को भूमिगत टनल और स्टेशनों से गुजारा जाएगा। जानकारों की मानें तो इसका एलाइनमेंट सीधा होगा। यह बाजार, गली, मोहल्ले सभी के नीचे से गुजरेगी। एक स्टेशन से ट्रेन में बैठने वाला सीधे दूसरे स्टेशन पर ही जाकर निकलेगा। इस बीच में ट्रेन कहां से गुजरी, न ट्रेन के यात्री को पता होगा, न ही ऊपर मकानों में रहने वाले लोगों को।

उजड़ जाएगा बसों का अस्पताल

रैपिड रेल का एक स्टेशन भैंसाली बस स्टेशन और वर्कशॉप की भूमि पर बनेगा। एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन ने जमीन मांगी थी। रोडवेज ने वर्कशाप की जमीन के बदले जमीन, और वर्कशाप बनाकर देने की शर्त रखी थी। एनसीआरटीसी इसके लिए तैयार था। एमडीए से बात करके शताब्दीनगर कालोनी में जमीन की व्यवस्था भी कर ली गई, लेकिन अचानक स्थिति उलट गई। वर्कशॉप की जमीन के मालिकाना हक की जांच की गई तो यह जमीन रोडवेज के स्थान पर सदर तहसील की निकली। राजस्व विभाग की इस जमीन को रैपिड रेल को देने का निर्णय अब शासन लेगा। जमीन तो रैपिड को देनी ही है। यहां स्थापित रोडवेज का वर्कशॉप भी हटेगा, लेकिन वर्कशाप को इसके बदले में अब जमीन मिलनी भी मुश्किल ही लगती है। चूंकि जमीन का मालिक रोडवेज नहीं है, लिहाजा वह अब कोई शर्त रखने की स्थिति में भी अब नहीं है।


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