This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.
OK

Amroha Mass Murder Case: आजादी के बाद किसी महिला को पहली फांसी, बेटे से कहा- मैं हूं बुरी मां, मुझे कभी याद न करना

अमरोहा के खूनी इश्क की दास्तां बेटे से 15 दिन पहले जेल में मिली तो फफक पड़ी थी शबनम। शबनम के बेटे को पाल रहे दंपती ने ताउम्र खुद की संतान पैदा नहीं करने का किया निश्चय ।

Taruna TayalThu, 18 Feb 2021 02:52 PM (IST)
Amroha Mass Murder Case: आजादी के बाद किसी महिला को पहली फांसी, बेटे से कहा- मैं हूं बुरी मां, मुझे कभी याद न करना

बुलंदशहर, [मनोज मिश्रा]। अंधे प्रेम में परिवार के सात सदस्यों का निर्ममता से कत्ल करने वाली शबनम के बेटे को शहर का एक दंपती अपने बेटे की तरह पाल रहा है। मथुरा जेल में शबनम की फांसी की तैयारी जारी है। 15 दिन पहले जब वह अपने 12 साल के बेटे से मिली तो लिपटकर रो पड़ी। उसे समझाया, बेटा पढ़-लिखकर नेक इंसान बनना। छोटे मम्मी-पापा का नाम रोशन करना, कभी जिद मत करना और मुझे याद मत करना।

बुलंदशहर का एक दंपती शबनम के बेटे के अभिभावक का फर्ज पूरी जिम्मेदारी से निभा रहा है। बच्चा नगर के प्रतिष्ठित पब्लिक स्कूल में कक्षा छह में पढ़ रहा है। दंपती ने ताउम्र खुद की संतान पैदा नहीं करने का निश्चय किया है, ताकि बच्चे के लिए प्यार कम न हो। 13 दिसंबर-2008 को मुरादाबाद जेल में शबनम की कोख से जन्मा बच्चा इस दंपती को छोटे मम्मी-पापा कहता है। 15 दिन पहले ही दंपती उसे शबनम से मिलवाने रामपुर जेल ले गया था। मां-बेटे का मिलन हुआ तो वह वह 40 मिनट तक लगातार रोती रही, बेटे को गोद में लेकर पुचकारती रही। दंपती के मुताबिक, शायद उसे अपनी मौत का आभास हो गया था। जेल से लौटते वक्त बच्चे ने उनसे पूछा भी था कि- पापा, बड़ी मम्मी क्यों रो रही थीं। मुझे बार-बार क्यों चूम रही थीं। उन्होंने ऐसा क्यों बोला कि तुम पढ़-लिखकर अच्छा इंसान बनना और छोटे मम्मी-पापा का नाम रोशन करना। अपने सवालों का जवाब नहीं मिलने पर वह काफी देर तक उन्हें एकटक देखता रहा।

छह साल जेल में रहा था बच्चा

शबनम का बेटा छह साल सात माह 21 दिन मां शबनम के साथ जेल में रहा था। 30 जुलाई 2015 को बाल कल्याण समिति अमरोहा ने बेहतर परवरिश एवं शिक्षा के लिए उसे बुलंदशहर के इस दंपती को सौंप दिया था। बुलंदशहर में रहकर करीब छह साल से वह इसी परिवार का हिस्सा है। शबनम के बेटे के लिए अब यही उसके माता-पिता हैं। स्कूल रिकार्ड में भी माता-पिता के रूप में इसी दंपती का नाम दर्ज है। दंपती ने बताया कि वह हर तीन-चार महीने में बेटे को शबनम से मिलवाने जेल ले जाते हैं। 15 दिन पहले ही रामपुर जेल गए थे। शबनम रामपुर व उसका पति सलीम बरेली जेल में बंद है। बाल कल्याण समिति के बुलाने पर वह उसे लेकर लेकर पेश होते रहे हैं। बेटे की बेहतर परवरिश के लिए दो साल पूर्व इस दंपती को बुलंदशहर में सम्मानित भी किया गया था। 14 अप्रैल 2008 की रात शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने परिवार के सात सदस्यों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। उसे सलीम से दो माह का गर्भ था।

फांसी से पहले जरूर मिलवाऊंगा

शबनम को जिस अपराध के लिए फांसी की सजा हुई है, उसमें कोई कुछ नहीं कर सकता। दंपती कहता है, सुबह से ही अखबार व टीवी चैनल पर फांसी की खबर आ रही है। कहा जा रहा है कि जल्द ही शबनम के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। भारत में एकमात्र महिला फांसीघर मथुरा में है, जहां उसे फांसी दी जाएगी। जल्द उसे मथुरा जेल ले जाया जाएगा। वह देश की पहली महिला होगी जिसे फांसी दी जाएगी। दोनों कहते हैं, तारीख तय होने पर वह बच्चे को उसकी मां से अंतिम बार मिलवाने जरूर ले जाएंगे।

राष्ट्रपति अंकल जी, मेरी मां को माफ कर दीजिए

बुधवार शाम शबनम के बेटे का एक फोटो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। इसमें वह राष्ट्रपति से अपनी मां को माफ करने की तख्ती लिए दिख रहा है। तख्ती पर लिखा है, राष्ट्रपति अंकल मेरी मां शबनम को माफ कर दीजिए। बच्चे की यह अपील इंटरनेट मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

यह भी पढ़ें: शबनम व सलीम को फांसी पर लटकाने के लिए पवन जल्लाद तैयार, गुनहगारों के लिए कही ये बड़ी बात

मेरठ में कोरोना वायरस से जुडी सभी खबरे

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!