..और बाण गंगा में अचानक आने लगा काला पानी, जानें क्‍या हैंं कारण

मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में बह रही बाण गंगा में मंगलवार को उत्तराखंड के हरिद्वार की ओर से काला पानी बहकर आने लगा है जिससे श्रद्धालुओं ने गंगा घाट पर स्नान करना बंद कर दिया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान किए बगैर ही लौट गए।

Parveen VashishtaPublish: Tue, 25 Jan 2022 05:58 PM (IST)Updated: Tue, 25 Jan 2022 05:58 PM (IST)
..और बाण गंगा में अचानक आने लगा काला पानी, जानें क्‍या हैंं कारण

मुजफ्फरनगर, जागरण संवाददाता। पौराणिक तीर्थनगरी शुकतीर्थ में बह रही बाण गंगा में काला पानी आना शुरू हो गया है जिसके चलते श्रद्धालुओं ने स्नान करना बंद कर दिया है। जिससे नगरी के पंडित पुरोहित व साधु-संतों में रोष बना है।

हरिद्वार की ओर से आया काला पानी

शुकतीर्थ में बह रही बाण गंगा में मंगलवार को अचानक उत्तराखंड के हरिद्वार की ओर से काला पानी बहकर आने लगा, जिससे श्रद्धालुओं ने गंगा घाट पर स्नान करना बंद कर दिया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान किए बगैर ही लौट गए। इससे नगरी के पंडित पुरोहित दुकानदारों व साधु-संतों में रोष है। संतों का कहना कि प्रत्येक वर्ष बाण गंगा में लक्सर फैक्ट्रियों से केमिकल डाला जाता है, लेकिन प्रशासन के द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है। श्री गंगा सेवा समिति के महामंत्री महकार सिंह ने बताया कि मंगलवार की सुबह से बाण गंगा में काला पानी आना शुरू हो गया था जो निरंतर बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि इससे पहले वर्षों में भी हरिद्वार की ओर से बाण गंगा में कई काला पानी आने से जीव जंतु व मछली आदि की भी मौत हो चुकी है लेकिन हर बार प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाता है। उधर, प्रदूूषण नियंत्रण बोर्ड के लैब सहायक सर्वेश कुमार ने बताया कि सैंपल के लिए टीम शुकतीर्थ भेजी जा रही है।

एक माह में छह कंपनियों पर कार्रवाई, वसूले 4.80 लाख

मुजफ्फरनगर, जागरण संवाददाता। ई-कामर्स के माध्यम से व्यापार करने वाली कंपनियां पैकेङ्क्षजग संबंधी अनियमतता से ग्राहकों को भ्रमित कर रही हैं। विधिक माप विज्ञान विभाग ऐसी कंपनियों पर अंकुश लगाने के लिए उन पर जुर्माना लगाने की कार्रवाई कर चुका है। कंपनियों से शमन शुल्क के रूप में मोटी रकम वसूल कर जहां घटतौली पर अंकुश लग रहा है वहीं, सरकार का राजस्व भी बढ़ रहा है। एक माह में ऐसी छह कंपनियों से 4.80 लाख शमन शुल्क वसूला गया है। इनमें स्थानीय ही नहीं बाहरी कंपनियां भी शामिल हैं।

Edited By Parveen Vashishta

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